घाटशिला उपचुनाव से पहले JMM को बड़ा झटका, सैकड़ों कार्यकर्ता भाजपा में शामिल

Nov 10, 2025 - 10:44
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घाटशिला उपचुनाव से पहले JMM को बड़ा झटका, सैकड़ों कार्यकर्ता भाजपा में शामिल

घाटशिला

घाटशिला विधानसभा सीट पर मतदान कल यानी 11 नवंबर को कराया जाएगा। 14 नवंबर को मतगणना होगी। वहीं, घाटशिला उपचुनाव से पहले झामुमो को बड़ा झटका लगा है।

झामुमो ने जनता को केवल निराश किया
दरअसल, बीते रविवार को झामुमो महिला मोर्चा की नगर अध्यक्ष लिली भगत के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने झामुमो पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा नेता चंपई सोरेन ने नए सदस्यों का स्वागत किया। इस दौरान चंपई सोरेन ने कहा कि अब जनता का रुझान साफ दिखने लगा है। घाटशिला से परिवर्तन की शुरुआत हो चुकी है। जनता झूठे वादों से ऊब चुकी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वास जता रही है। चंपई सोरेन ने कहा कि यह सिर्फ पार्टी परिवर्तन नहीं, बल्कि “विचारधारा का बदलाव” है। उन्होंने कहा कि भाजपा विकास और पारदर्शिता की राजनीति करती है, जबकि झामुमो ने जनता को केवल निराश किया है।

बता दें कि झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के आकस्मिक निधन से खाली हुई इस सीट पर अब उनके बेटे सोमेश चंद्र सोरेन मैदान में हैं और भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन ताल ठोक रहे हैं। दोनों ही संताल समाज से आते हैं। इसलिए संभावना है कि आदिवासी मत दोनों तरफ जाएगा। भाजपा के अपने सहयोगी लोजपा के सहारे चार प्रतिशत दलित मतों को साथ लाने की कोशिश में हैं। झामुमो गठबंधन के मुस्लिम मंत्री भी अल्पसंख्यक मतों को अपने पाले में लाने के लिए लगे हैं, लेकिन भाजपा आदिवासी मतों के अलावा कुड़मी, पिछड़ी और अन्य दलित मतों पर नजर रख रही है। चंपाई के गहरे मित्र विद्युतवरण महतो की भी इस क्षेत्र में काफी पकड़ है। वे तीन बार से जमशेदपुर लोकसभा के सांसद भी हैं।

ज्ञात हो कि रामदास सोरेन एक साल से ज्यादा समय से किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनका 15 अगस्त को एक अस्पताल में निधन हो गया था। इसी के कारण घाटशिला सीट पर उपचुनाव कराने की आवश्यकता पड़ी।

 

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