मादुरो के हाथों में हथकड़ी और डिटेंशन सेंटर नया ठिकाना, वेनेजुएला के राष्ट्रपति की आई पहली तस्वीर

Jan 4, 2026 - 06:14
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मादुरो के हाथों में हथकड़ी और डिटेंशन सेंटर नया ठिकाना, वेनेजुएला के राष्ट्रपति की आई पहली तस्वीर

वाशिंगटन.

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पहली तस्वीरें सामने आ गई हैं। लैटिन अमेरिकी देश के इस कद्दावर नेता को न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) के मुख्यालय में कड़ी सुरक्षा के बीच देखा गया।

जारी किए गए वीडियो में मादुरो को हथकड़ियों में और सैनिकों के घेरे में मुख्यालय के गलियारे से ले जाते हुए दिखाया गया है। आपको बता दें कि शनिवार को अमेरिकी हवाई हमलों के बाद मादुरो और उनकी पत्नी, सीलिया फ्लोर्स को वेनेजुएला से न्यूयॉर्क लाया गया। मादुरो अब फेडरल कस्टडी में रहेंगे। अमेरिकी न्याय विभाग ने उन पर 'नार्को-टेररिज्म' की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है, जिसके तहत उन पर मुकदमा चलाया जाएगा।

अमेरिका की नजर वेनेजुएला के तेल खजाने पर
इस सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका कम से कम अस्थायी रूप से वेनेजुएला का शासन संभालेगा। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों का उपयोग करेगा और अन्य देशों को बड़ी मात्रा में तेल बेचेगा। ट्रंप ने कहा, "हम देश को तब तक चलाएंगे जब तक कि हम एक सुरक्षित, उचित और विवेकपूर्ण सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित नहीं कर लेते।"

डेलसी रोड्रिगेज बनीं कार्यवाहक राष्ट्रपति
इधर वेनेजुएला में मचे सियासी घमासान के बीच देश की सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक चैंबर ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने उपराष्ट्रपति डेलसी रोड्रिगेज को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, रोड्रिगेज प्रशासनिक निरंतरता और राष्ट्र की व्यापक रक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभालेंगी। कोर्ट अब इस बात पर बहस करेगा कि राष्ट्रपति की जबरन अनुपस्थिति की स्थिति में राज्य की संप्रभुता को बनाए रखने के लिए कानूनी ढांचा क्या होना चाहिए।

आपको यह भी बता दें कि ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व की प्लानिंग महीनों से चल रही थी। रिहर्सल के बाद यह मिशन मात्र 30 मिनट में पूरा हुआ। वर्तमान में राजधानी काराकास में स्थिति तनावपूर्ण है। रूस और चीन जैसे देशों ने इस कार्रवाई पर कड़ी नजर रखी हुई है, जबकि अमेरिकी तेल कंपनियां बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए निवेश की तैयारी कर रही हैं।

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