महाकाल दर्शन आसान होगा: कॉरिडोर तक 710 मीटर नया रास्ता, जून 2027 तक पूरी होगी परियोजना

Nov 11, 2025 - 03:44
 0  9
महाकाल दर्शन आसान होगा: कॉरिडोर तक 710 मीटर नया रास्ता, जून 2027 तक पूरी होगी परियोजना

उज्जैन 

 मध्यप्रदेश सरकार उज्जैन को नया रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब क्षिप्रा नदी के घाटों (Kshipra Ghat) पर होने वाली आरती को बनारस और हरिद्वार की गंगा आरती (Shipra is a tributary of Ganga) की तरह भव्य और आधुनिक रूप में आयोजित किया जाएगा। सरकार चाहती है कि आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ (2028) तक उज्जैन में ऐसी आरती शुरू हो जाए, जिसे देखने वाले श्रद्धालु भावविभोर हो उठें।

इस दिशा में राज्य सरकार ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है। इसका उद्देश्य ऐसी पेशेवर एजेंसियों का चयन करना है, जो टेक्निक, म्यूजिक, लाइट और परम्परा को ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट को अंजाम दे सकें।
तकनीक से बनेगी आरती आकर्षक

उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि इस पहल का मकसद क्षिप्रा आरती (Kshipra River) को इतना भव्य और यादगार बनाना है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यहां का अनुभव जीवनभर याद रखें।

महाकाल लोक जाने के लिए 710 मीटर लंबा और 22.18 मीटर चौड़ा नया रास्ता बन रहा है। 63 करोड़ की लागत से बनने वाला यह सुगम रास्ता जून 2027 तक तैयार हो जाएगा। रेलवे से भी सहमति मिल गई है। इससे अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को महाकाल लोक तक पहुंचना आसान होगा। अभी उन्हें पार्किंग से पुल पर चढ़ने के बाद 2100 मीटर लंबी दूरी तय कर महाकाल लोक पहुंचना पड़ रहा है।

भीड़ नियंत्रण में रहेगी: इंदौर, देवास से आने वाले यात्री हरिफाटक के पास वाहन पार्क कर सीधे महाकाल लोक पहुंच सकेंगे। महाशिवरात्रि, नागपंचमी, नववर्ष पर भीड़ नियंत्रण में की जा सकेगी। 2. यातायात का दबाव कम होगा: पैदल यात्रियों के लिए अलग मार्ग बनने से हरिफाटक ब्रिज, महाकाल घाटी, नीलगंगा, इंदौर रोड, जयसिंहपुरा में यातायात का दबाव कम होगा।

उन्होंने कहा, हमने ऐसी एजेंसियों से प्रस्ताव मांगे हैं, जो तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आरती को और आकर्षक बना सकें। इसका मकसद यह है कि जब श्रद्धालु घाट पर आएं तो उन्हें सिर्फ आरती नहीं, बल्कि भावनात्मक अनुभव हो। 
गंगा आरती क्यों है प्रेरणा का स्रोत

हरिद्वार और बनारस की महागंगा आरती में हर शाम सैकड़ों पुजारी, घंटों और दीपों के साथ गंगा आरती करते हैं। वाराणसी की दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती अपने आप में खास होती है। यहां दर्जनों पुजारी एक साथ समान वेशभूषा में दीप थाल लेकर मंत्रोच्चार करते हैं।

हर पुजारी एक लय में जब आरती करते हैं तो भव्य नजारा होता है। शंखनाद, घंटों की गूंज और वेद मंत्रों की ध्वनि श्रद्धालुओं के मन में गहराई तक उतर जाती है।अब मध्यप्रदेश की डॉ.मोहन यादव सरकार चाहती है कि उज्जैन की क्षिप्रा आरती (shipra river in ujjain) भी इसी तरह का भव्य अनुभव दे। 

तकनीक से सजेगी क्षिप्रा आरती

एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट में कहा गया है कि आरती में परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम होना चाहिए। सरकार ने एजेंसियों से ऐसे सुझाव मांगे हैं।जिनमें AI आधारित प्रोजेक्शन मैपिंग, सिंक्न्रोनाइज्ड लाइटिंग, साउंड और विजुअल स्टोरीटेलिंग, होलोग्राम और AR/VR अनुभव और आध्यात्मिक संगीत संयोजन जैसी तकनीकें शामिल होंगी।

इन तकनीकों की मदद से घाटों पर आरती का अनुभव केवल धार्मिक न रहकर दिव्य दृश्यात्मक आयोजन बन जाएगा। श्रद्धालु दीपों की रोशनी के साथ मां क्षिप्रा की कथा, उज्जैन के इतिहास और महाकाल की महिमा को लाइट एण्ड साउंड श्खो की मदद से अनुभव कर सकेंगे। 

कई घाटों पर एक साथ आरती की तैयारी

फिलहाल क्षिप्रा नदी की आरती केवल रामघाट तक सीमित है और ज्यादातर निजी समूहों द्वारा कराई जाती है।अब सरकार की योजना है कि कई घाटों को जोड़ा जाए और एक साथ सामूहिक आरती का आयोजन हो। इसका प्रारूप बनारस के मल्टी-घाट मॉडल जैसा होगा।

जहां एक ही समय पर अलग-अलग घाटों पर आरती होती है, लेकिन उनकी ध्वनि और लय एक होती है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0