छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में बड़ा खुलासा, हर महीने 80 लाख रुपये कमीशन लेने का आरोप

Oct 15, 2026 - 16:14
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छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में बड़ा खुलासा, हर महीने 80 लाख रुपये कमीशन लेने का आरोप

रायपुर

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) मैनपावर भुगतान घोटाले में कमीशन वसूली के नेटवर्क को लेकर जांच में नए तथ्य सामने आए हैं।

ईओडब्ल्यू के पूरक आरोपपत्र के अनुसार, शासकीय शराब दुकानों के कर्मचारियों के ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के भुगतान के नाम पर मैनपावर एजेंसियों को अतिरिक्त राशि दी गई।

इसके बाद एजेंसियों से नकद कमीशन वसूला जाता था। सभी एजेंसियों से हर महीने करीब 70 से 80 लाख रुपये कमीशन आता था।

शराब सिंडिकेट प्रमुख अनवर ढेबर तक पहुंचाने के साक्ष्य मिले

तत्कालीन सीएसएमसीएल प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपये नकद कमीशन लेकर शराब सिंडिकेट प्रमुख अनवर ढेबर तक पहुंचाने के साक्ष्य मिले हैं। कमीशन की रकम एकत्र कर त्रिपाठी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सिद्धार्थ सिंघानिया निभाता था।

एक एजेंसी से 15.65 करोड़ रुपये देने का दावा

आरोपपत्र में सिद्धार्थ सिंघानिया के कथन का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि अक्टूबर 2019 से मार्च 2023 के बीच अकेले सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड की ओर से लगभग 15.65 करोड़ रुपये दिए गए। जांच में यह भी सामने आया कि त्रिपाठी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नवीन प्रताप सिंह तोमर के माध्यम से कथित कमीशन वसूली जारी रही।

इस दौरान सेवा शुल्क और ओवरटाइम की राशि पर कमीशन की दर बढ़ाकर एक-तिहाई किए जाने का विवरण भी मिला है।

दो कंपनियों को 48 करोड़ से अधिक का भुगतान

ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड को मिलाकर 48.08 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान हुआ। ईगल हंटर को 33.45 करोड़ और अलर्ट कमांडोज को 14.63 करोड़ रुपये मिले। इनमें से 38.31 करोड़ रुपये अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में भुगतान किए गए।

जांच एजेंसी के अनुसार, ईगल हंटर के संस्थापक बीआर लोहिया दोनों कंपनियों के प्रमुख निर्णय लेते थे। उनके निर्देश पर कर्मचारियों के ओवरटाइम और अतिरिक्त दिनों के बिल तैयार कराए गए, जबकि संबंधित कर्मचारियों को रकम नहीं मिलने की बात सामने आई।

बिल पास कराने के लिए 28.80 लाख रुपये

29 नवंबर 2023 को लंबित बिल पारित कराने के बदले तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर को कथित तौर पर 28.80 लाख रुपये दिए जाने थे। इसके लिए दिल्ली से 29.40 लाख रुपये का चेक भेजा गया। बैंक से रकम निकालने के बाद 60 हजार रुपये कार्यालयीन खर्च के लिए रखे गए और शेष राशि कमीशन के लिए अलग की गई।

रकम पहुंचाने से पहले ईडी की कार्रवाई में यह राशि बरामद हुई। जांच एजेंसी ने इसे मैनपावर भुगतान से जुड़ी कथित कमीशन वसूली के नेटवर्क का हिस्सा बताया है।

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