सुपौल में पंचायत चुनाव 2026 की प्रक्रिया शुरू, गजट प्रकाशन के बाद आरक्षण रोस्टर पर टिकी निगाहें
सुपौल
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पंचायतवार जनसंख्या सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी की स्वीकृति से गजट का शनिवार को प्रकाशन कर दिया गया है। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार इस सूची के अंतिम प्रकाशन के साथ ही जिले में पंचायत चुनाव 2026 की महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरू हो गई है।
अब संभावित प्रत्याशियों और आमलोगों की नजरें नए आरक्षण रोस्टर पर टिक गई हैं, जिसके जारी होते ही पंचायतों की राजनीतिक तस्वीर बदलने के संकेत मिल रहे हैं। गजट में प्रत्येक पंचायत और प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र की कुल आबादी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या सहित कोटिवार जनसंख्या विवरण और सीमांकन संबंधी जानकारी दर्ज है।
इसी आधार पर मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, वार्ड सदस्य और पंच पदों के लिए आरक्षण रोस्टर का निर्धारण किया जाएगा। चुनाव कार्य में इसकी अहमियत को देखते हुए यह प्रक्रिया जिलाधिकारी के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण में निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी की गई है।
रोस्टर के लागू होते ही पंचायत स्तर पर बदल सकते हैं राजनीतिक
समीकरण
इस बार पंचायत चुनाव में मुखिया से लेकर जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच, पंच और वार्ड सदस्य तक के पदों के लिए आरक्षण चक्र में बदलाव किया जाएगा। पंचायती राज अधिनियम के प्रविधानों के अनुसार, किसी पद को लगातार दो आम चुनाव तक आरक्षित रखने के बाद उसका आरक्षण चक्र बदलना अनिवार्य है।
इसी प्रविधान के तहत वर्ष 2021 में जिन पदों पर आरक्षण लागू था, उनमें से कई पद अब सामान्य अथवा अन्य वर्गों के लिए आरक्षित किए जा सकते हैं। वहीं, कई नए क्षेत्रों को आरक्षण का लाभ मिलने की संभावना है। ऐसे में नए रोस्टर के लागू होते ही पंचायत स्तर पर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, पंचायत प्रतिनिधियों के विभिन्न पदों पर आरक्षण व्यवस्था पहली बार वर्ष 2006 में लागू हुई थी। इसका पहला चक्र वर्ष 2011 में पूरा हुआ।
इसके बाद 2016 और 2021 के चुनाव में जिन पदों को लगातार एक ही श्रेणी में आरक्षित रखा गया था, उनकी आरक्षण स्थिति वर्ष 2026 के चुनाव में बदलनी तय मानी जा रही है।
जिले में 5,446 पदों पर कराया जाएगा मतदान
जिले में वर्तमान में 174 पंचायतें हैं और पंचायत चुनाव में कुल 5,446 पदों पर मतदान कराया जाएगा। इनमें मुखिया के 174 पद, वार्ड सदस्य के 2,427 पद, जिला परिषद सदस्य के 25 पद, पंचायत समिति सदस्य के 244 पद, सरपंच के 174 पद तथा पंच 2,427 पद शामिल हैं।
पंचायत चुनाव में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग तथा महिलाओं को मिलाकर अधिकतम 50 प्रतिशत तक आरक्षण देने का प्रविधान है।
एससी-एसटी को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाता है, जबकि शेष पदों में अत्यंत पिछड़ा वर्ग को करीब 20 प्रतिशत आरक्षण मिलता है। महिलाओं के लिए भी सभी वर्गों में आरक्षण की व्यवस्था लागू रहती है।
174 पंचायतों में होंगे चुनाव
वर्ष 2016 में जब दूसरी बार आरक्षण निर्धारण किया गया था, तब जिले में पंचायतों की संख्या 181 थी। उस समय तैयार रोस्टर के अनुसार मुखिया पदों में 29 पद एससी-एसटी तथा 31 पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किए गए थे। सरपंच पदों में 27 पद एससी-एसटी और 31 पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित थे।
इसी प्रकार पंचायत समिति सदस्य के 42 पद एससी तथा 46 पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किए गए थे। जिला परिषद सदस्य के चार पद एससी और पांच पद पिछड़ा वर्ग के लिए सुरक्षित थे। वहीं, जिले के 11 प्रखंड प्रमुख पदों में से दो-दो पद एससी-एसटी और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किए गए थे।
हालांकि, नगर निकायों के परिसीमन के बाद वर्ष 2021 में जिले की सात पंचायतें नगर निकाय क्षेत्र में शामिल हो गईं, जिससे पंचायतों की संख्या 181 से घटकर 174 रह गई। पंचायतों की संख्या में कमी आने के कारण इस बार विभिन्न श्रेणियों में आरक्षित होने वाले पदों की संख्या भी घट सकती है।
जनसंख्या सूची और गजट प्रकाशन के बाद अब जिले भर के संभावित उम्मीदवारों, जनप्रतिनिधि को नए आरक्षण रोस्टर का इंतजार है। माना जा रहा है कि रोस्टर जारी होते ही कई पंचायतों में चुनावी रणनीतियां बदल जाएंगी और नए चेहरों के लिए चुनावी मैदान खुल सकता है।
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