बड़वानी उत्कृष्ट विद्यालय में 'अपात्र' का चयन: नियमों को ताक पर रखकर कार्तिक को भेजा नागालैंड, जिला टॉपर शिवम बागुल का हक मारा!

Mar 31, 2026 - 13:14
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बड़वानी उत्कृष्ट विद्यालय में 'अपात्र' का चयन: नियमों को ताक पर रखकर कार्तिक को भेजा नागालैंड, जिला टॉपर शिवम बागुल का हक मारा!

 बड़वानी

 बड़वानी -शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़वानी में 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' योजना के तहत छात्रों के चयन में एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। ताज़ा खुलासे ने विद्यालय प्रबंधन और चयन समिति की साख को पूरी तरह मटियामेट कर दिया है। आरोप है कि प्राचार्य और समिति ने जानबूझकर एक 'अपात्र' छात्र को उपकृत करने के लिए जिले के वास्तविक मेधावी छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया है।

​नियमों की धज्जियां: 2024-25 की योजना में 2025-26 के छात्र का चयन कैसे?

​सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि नागालैंड भ्रमण की यह योजना सत्र 2024-25 के लिए निर्धारित थी। नियमानुसार, इस अवधि में विद्यालय में अध्ययनरत छात्र ही इसके पात्र थे। लेकिन चयन समिति ने कार्तिक शुक्ल का चयन किया, जो सत्र 2024-25 में इस विद्यालय का छात्र ही नहीं था, बल्कि एक निजी स्कूल में पढ़ाई कर रहा था। कार्तिक ने सत्र 2025-26 में उत्कृष्ट विद्यालय में प्रवेश लिया है। सवाल यह है कि जो छात्र योजना के समय स्कूल का हिस्सा ही नहीं था, उसे हवाई यात्रा और सरकारी भ्रमण का लाभ किस 'जादुई' प्रक्रिया के तहत दे दिया गया?

​मेधावी छात्र शिवम बागुल की अनदेखी क्यों?

​चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सबसे बड़ा प्रहार तब होता है जब हम कक्षा 10वीं के परिणामों को देखते हैं। सत्र 2024-25 में उत्कृष्ट विद्यालय के छात्र शिवम बागुल (पिता राजेश बागुल) ने अपनी मेहनत से जिला टॉपर का गौरव हासिल किया था। कायदे से, ऐसे राज्य स्तरीय सांस्कृतिक समन्वय कार्यक्रम के लिए पहला हक जिले के उस टॉपर छात्र का था जिसने विद्यालय का नाम रौशन किया।

​लेकिन, चयनकर्ताओं ने एक जिला टॉपर (शिवम बागुल) को दरकिनार कर एक ऐसे छात्र (कार्तिक शुक्ल) को चुन लिया जो उस वक्त स्कूल में था ही नहीं। यह सीधे तौर पर मेधावी छात्रों के मनोबल को तोड़ने वाली कार्रवाई है।

​चयन समिति पर उठते तीखे सवाल:

​क्या चयन समिति को यह जानकारी नहीं थी कि कार्तिक शुक्ल सत्र 2024-25 में विद्यालय का छात्र नहीं था?
​जिला टॉपर शिवम बागुल के नाम पर विचार क्यों नहीं किया गया? क्या उस पर किसी 'खास' का दबाव था?
​प्राचार्य अनिल मिश्रा इस स्पष्ट नियम विरुद्ध चयन पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?

​भ्रष्टाचार की बू और जांच की मांग

​यह मामला केवल एक चयन की गलती नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और पद के प्रभाव का स्पष्ट उदाहरण प्रतीत होता है। अभिभावकों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि इस चयन प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

​शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की 'सेटिंग' और 'भाई-भतीजावाद' बड़वानी जिले की शिक्षा व्यवस्था पर एक काला धब्बा है। यदि जिला प्रशासन ने इस पर संज्ञान नहीं लिया, तो मेधावी छात्रों का व्यवस्था से भरोसा उठना तय है।

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