सरकार ने 4 साल में 34 किताबों को दी मंजूरी, लेकिन नरवणे की "फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी" पर क्यों लटकी तलवार?

Feb 7, 2026 - 07:14
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सरकार ने 4 साल में 34 किताबों को दी मंजूरी, लेकिन नरवणे की "फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी" पर क्यों लटकी तलवार?

नई दिल्ली

भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की पुस्तक 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' (Four Stars of Destiny) को रक्षा मंत्रालय की मंजूरी अभी तक नहीं मिली है। यह वही किताब है जिसका जिक्र लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने किया था। इसको लेकर खूब हंगामा हुआ था। आपको बता दें कि पिछले पांच वर्षों में दर्जनों सैन्य अधिकारियों की पुस्तकों को हरी झंडी मिल गई, वहीं जनरल नरवणे की यह किताब इकलौती ऐसी पांडुलिपि बनकर उभरी है, जो अब भी समीक्षा के अधीन है।

 एक रिपोर्ट में सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त जवाब के हवाले से कहा है कि रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 2020 से 2024 के बीच कुल 35 पुस्तकों के शीर्षक अनुमोदन के लिए आए थे। उनमें से 32 को अप्रूव किया जा चुका है। सिर्फ तीन ही अभी तक पेंडिंग है। उनमें नरवणे की किताब भी शामिल है।

RTI के अनुसार, जिन तीन किताबों को लंबित दिखाया गया था, उनमें से पूर्व सेना प्रमुख जनरल एन.सी. विज की पुस्तक 'अलोन इन द रिंग' मई 2025 में रिलीज हो चुकी है। वहीं ब्रिगेडियर जीवन राजपुरोहित की किताब को भी मंजूरी मिल गई है। अब इस सूची में जनरल नरवणे की किताब ही एकमात्र ऐसी है जो आधिकारिक रूप से मंत्रालय के पास अटकी हुई है।
आखिर 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' में ऐसा क्या है?

जनरल नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख थे। यह वह दौर था जब पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ तनाव चरम पर था। दिसंबर 2023 में प्रकाशित इस पुस्तक के कुछ अंशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा गलियारों में हलचल मचा दी थी। राहुल गांधी का दावा है कि किताब में जनरल नरवणे ने 31 अगस्त 2020 की उस रात का जिक्र किया है, जब चीनी टैंक रेचिन ला क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे।

राहुल गांधी के मुताबिक, उन्होंने लिखा है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बातचीत के दौरान उन्हें एक 'हॉट पोटैटो' (बेहद कठिन स्थिति) थमा दिया गया था। उन्हें पलक झपकते ही बड़े सैन्य फैसले लेने थे। माना जा रहा है कि लद्दाख गतिरोध और सरकार के साथ सैन्य संवाद के इन संवेदनशील खुलासों के कारण ही रक्षा मंत्रालय इसकी गहन समीक्षा कर रहा है।

हाल ही में जिन अधिकारियों की पुस्तकों को मंजूरी मिली है, उनमें लेफ्टिनेंट जनरल एस.ए. हसनैन, मेजर जनरल जी.डी. बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल योगेश कुमार जोशी जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

इस देरी पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार पूर्व सेना प्रमुख का अत्यधिक सम्मान करती है और विपक्ष महज इस मुद्दे का इस्तेमाल उनका मजाक उड़ाने के लिए कर रहा है। दूसरी ओर प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस और रक्षा मंत्रालय ने वर्तमान स्थिति पर चुप्पी साध रखी है।

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