अंधविश्वास की जड़ों पर करारी चोट, क्लाइमेक्स चौंका देता है

Mar 6, 2026 - 13:33
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अंधविश्वास की जड़ों पर करारी चोट, क्लाइमेक्स चौंका देता है

आज के दौर में जब बॉक्स ऑफिस पर मसाला फिल्मों और फॉर्मूला स्टोरी का बोलबाला है, तब किसी सामाजिक विषय पर फिल्म बनाना अपने आप में बड़ा जोखिम होता है। लेकिन निर्माता सुदीप्तो सेन ने एक बार फिर यह जोखिम उठाया है। उनकी पिछली फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ जहां विवादों के बावजूद 300 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर गई, वहीं उनकी नई फिल्म ‘चरक’ भी एक ऐसे विषय को उठाती है जिस पर अक्सर समाज खुलकर बात करने से बचता है।


फिल्म की कहानी चरक उत्सव के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पूर्वी भारत के कई हिस्सों—खासकर पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा और झारखंड—में सदियों से मनाया जाता रहा है। यह उत्सव मां काली और भगवान शिव की आराधना से जुड़ा माना जाता है, लेकिन इसके साथ जुड़ी कुछ तांत्रिक प्रथाएं, अघोरी साधनाएं और अंधविश्वास भी समाज का एक स्याह सच हैं।
फिल्म इसी अंधेरे पक्ष को बेहद साहस के साथ सामने लाती है।

कहानी

घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे एक छोटे से गांव में चरक उत्सव की तैयारियां चल रही हैं। गांव की गरीबी, लोगों की रोजमर्रा की आदतें और वहां पसरा अंधविश्वास फिल्म के शुरुआती हिस्से में ही माहौल बना देते हैं।
इसी गांव के दो मासूम बच्चे और पुलिस चौकी का इंस्पेक्टर व उसकी लेखिका पत्नी कहानी के केंद्र में हैं। शादी के बारह साल बाद भी संतान न होने की पीड़ा से गुजर रहे इंस्पेक्टर के मन में भी कहीं न कहीं यह विश्वास घर कर जाता है कि शायद चरक उत्सव उसकी मनोकामना पूरी कर दे।


लेकिन इसी बीच गांव से दो बच्चों के गायब होने की घटना कहानी को एक भयावह मोड़ दे देती है। इसके बाद कहानी जिस दिशा में आगे बढ़ती है, वह दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है।
फिल्म का क्लाइमेक्स बेहद चौंकाने वाला है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है।

अभिनय

अंजली पाटिल और साहिदुर रहमान ने अपने किरदारों में गजब की सच्चाई दिखाई है। दोनों का अभिनय कहानी को विश्वसनीय बनाता है।
सहायक कलाकारों में सुब्रत दत्ता, शशि भूषण, नवनीश नील और शंखदीप ने भी अपने किरदारों को मजबूती दी है।

निर्देशन

निर्देशक शीलादित्य मौलिक ने फिल्म को यथार्थवादी अंदाज में पेश किया है। पश्चिम बंगाल के असली गांवों में की गई शूटिंग फिल्म को डॉक्यूमेंट्री जैसी वास्तविकता देती है।

निष्कर्ष

‘चरक’ सिर्फ मनोरंजन के लिए बनी फिल्म नहीं है, बल्कि यह अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों पर सीधा सवाल उठाती है। फिल्म यह भी बताती है कि अंधविश्वास सिर्फ अनपढ़ लोगों तक सीमित नहीं होता, बल्कि कई बार शिक्षित समाज भी इसकी गिरफ्त में आ जाता है।
अगर आप सिनेमा में सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि समाज की सच्चाई देखने की उम्मीद रखते हैं, तो यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए।

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