खामेनेई की मौत पर अजमेर शरीफ के दीवान का बयान: हसनी-हुसैनी खानदान सिर नहीं झुकाता

Mar 2, 2026 - 14:44
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खामेनेई की मौत पर अजमेर शरीफ के दीवान का बयान: हसनी-हुसैनी खानदान सिर नहीं झुकाता

नई दिल्ली
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजराइल के हवाई हमले में हुई मौत के बाद भारत के शिया समुदाय में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। एक दिन पहले ही कश्मीर से लेकर कर्नाटक और लखनऊ तक लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किए हैं। इस मसले पर मुस्लिम स्कॉलर्स और उलेमाओं के तीखे बयान भी सामने आए हैं। इसी मसले पर अजमेर शरीफ दरगाह के चीफ सैयद जैनुल आबेदीन का कड़ा बयान सामने आया है।

यह जंग नहीं डिक्टेटरशिप
अजमेर शरीफ दरगाह के चीफ सैयद जैनुल आबेदीन का कहना है कि ईरान और इजराइल के बीच जो हो रहा है उसको जंग नहीं कहा जा सकता है। इसे डिक्टेटरशिप कहा जा सकता है। अमेरिका अपने फायदे के लिए दुनिया के नेताओं को बंधक बनाने की कोशिश कर रहा है। वह अलग-अलग मुल्कों में संपत्तियों को कैप्चर कर रहा है। अमेरिका इन मुल्कों के खनिजों पर कब्जा जमाना चाहता है। मौजूदा वक्त में अमेरिका की तानाशाही चल रही है।

हसनी हुसैनी खानदान ने गर्दन नहीं झुकाई
सैयद जैनुल आबेदीन ने कहा कि आयतुल्लाह अली खामेनेई साहब पर हुए हमले की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए। मिटिंग के दौरान हुए हमले में आयतुल्लाह अली खामेनेई समेत मारे गए तमाम टॉप लीडर्स को शहीद का दर्जा मिलता है। आयतुल्लाह अली खामेनेई साहब पैगंबर मोहम्मद साहब के खानदान से हैं। ये लोग हसनी और हुसैनी हैं। इस खानदान के लोगों ने कभी यजीदियों के सामने गर्दन नहीं झुकाई।

शिया आवाम के रहनुमा थे खामेनेई
सैयद जैनुल आबेदीन ने आगे कहा- अमेरिका और इस्राइल यजीदी कौम हैं। हुजूर ने अपने संदेश में ही साफ कर दिया था कि यजीदियों के साथ कैसा सलूक करना है। आयतुल्लाह अली खामेनेई केवल ईरान के सर्वोच्च नेता नहीं थे। वह पूरी दुनिया की इस्लामिक शिया आवाम के रहनुमा थे। पूरी दुनिया में जो पैनिक देखा जा रहा है इसके कुसूरवार अमेरिका और इस्राइल हैं। मेरा सवाल यह कि क्या यूएन का चार्टर्ड इसकी इजाजत देता है।

भारत सरकार से की अपील
सैयद जैनुल आबेदीन ने कहा कि ईरान और भारत के काफी जमाने से ताल्लुकात रहे हैं। मैं भारत सरकार से गुजारिश करूंगा कि इस पैनिक को खत्म कराने के लिए अपने पॉवर का इस्तेमाल करते हुए एक पहल करे। भारत के सूफी संतों ने जो अमन का पैगाम पूरी दुनिया को दिया है उसका अमल कराने की कोशिश की जानी चाहिए। इन मुल्कों के कारण जब से दुनिया ने अमन का पैगाम भुला दिया है तब से अशांति देखी जा रही है।

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