अंबाला: मक्खन सिंह लबाना बने जिला परिषद चेयरमैन, सर्वसम्मति से चुने गए; बसपा छोड़ भाजपा में आने का मिला राजनीतिक लाभ

Sep 24, 2025 - 13:44
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अंबाला: मक्खन सिंह लबाना बने जिला परिषद चेयरमैन, सर्वसम्मति से चुने गए; बसपा छोड़ भाजपा में आने का मिला राजनीतिक लाभ

अंबाला 

हरियाणा के अंबाला जिले में जिला परिषद अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी मक्खन सिंह लबाना ने शानदार जीत हासिल की। खास बात यह रही कि उनके सामने कोई अन्य प्रत्याशी मैदान में उतरा ही नहीं, जिसके चलते वे निर्विरोध चुने गए। जिला परिषद के 14 सदस्यों ने उनकी उम्मीदवारी पर पूर्ण सहमति जताई।

विधायक का भी लड़ चुके हैं चुनाव

मक्खन सिंह लबाना 2009 में बसपा से विधायक सीट पर चुनाव लड़ चुके हैं। उनको 12 हजार वोट मिले थे। वह 2008 व 2009 में बसपा में रहे। इसके बाद वह काफी समय तक सक्रिय नहीं थे। इसी दौरान वह आम आदमी पार्टी में भी शामिल हुए थे। उन्होंने आम आदमी पार्टी के चिन्ह पर जिला परिषद का चुनाव जीता। मार्च 2024 में वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे। वहीं, उन्होंने सितंबर 2025 में भाजपा ज्वाइन की थी। लबाना ने कहा कि जब से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं। तब से देश तरक्की कर रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कार्यकाल में भी विकास कार्य हो रहे हैं। 

चुनाव की दिशा में बदलाव

अंबाला जिला परिषद में कुल 15 वार्ड हैं। इनमें से भाजपा समर्थित 8, कांग्रेस के 4 और बसपा के 3 पार्षद हैं। पहले संभावना जताई जा रही थी कि अध्यक्ष पद के लिए मतदान होगा, लेकिन सभी पार्षदों ने सर्वसम्मति से भाजपा हाईकमान की मंशा के अनुसार मक्खन सिंह लबाना के पक्ष में सहमति जताई।

सूत्रों का कहना है कि पार्षदों का मानना था कि इस बार किसी भी तरह का दलगत खेल न कर, भाजपा के फैसले को स्वीकार कर लिया जाए। चूंकि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने लबाना पर विश्वास जताया था, लिहाजा उनके निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया।

राजनीतिक सफर रोचक रहा

मक्खन सिंह लबाना कोई नए चेहरे नहीं हैं। उनका राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 2008-09 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से राजनीति की शुरुआत की। 2009 में वे बसपा प्रत्याशी के रूप में विधानसभा चुनाव मैदान में उतरे और करीब 12 हजार वोट हासिल किए। हालांकि उस समय उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन यह चुनाव उन्हें राजनीति की मुख्यधारा में पहचान दिलाने में अहम साबित हुआ।

इसके बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर अपने संगठन और जनता से जुड़े रहने का सिलसिला जारी रखा। वर्ष 2016 में वह पहली बार जिला परिषद सदस्य चुने गए। इसके बाद 2022 में भी उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की।

दो बार पार्षद रहते हुए उन्होंने जमीनी स्तर पर लोगों से मजबूत जुड़ाव बनाया और अपनी सक्रिय छवि कायम रखी। यही वजह रही कि भाजपा में शामिल होते ही उन्हें जिला परिषद अध्यक्ष पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जाने लगा।

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