भोपाल मेट्रो 65 फीट नीचे, 100 करोड़ी 'पाताल चीर' मशीन से अंडरग्राउंड कॉरिडोर बनेगा

Dec 31, 2025 - 12:44
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भोपाल मेट्रो 65 फीट नीचे, 100 करोड़ी 'पाताल चीर' मशीन से अंडरग्राउंड कॉरिडोर बनेगा

भोपाल 
 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल अब एक ऐसे ऐतिहासिक बदलाव की साक्षी बनने जा रही है, जो विकास की नई परिभाषा लिखेगा। भोपाल मेट्रो परियोजना अब सिर्फ पिलरों पर आसमान छूती नजर नहीं आएगी, बल्कि जमीन के 65 फीट नीचे अंधेरी परतों को चीरते हुए आधुनिकता का उजाला फैलाएगी। प्रदेश का पहला अंडरग्राउंड मेट्रो कॉरिडोर भोपाल के हृदय स्थल यानी पुराने शहर में बनने जा रहा है, जो तकनीक और इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना होगा।

पुराने भोपाल की विरासत और घनी आबादी को नया आधार
ऑरेंज लाइन के तहत तैयार होने वाला यह विशेष खंड पुल पातारा से बड़ा बाग सिंधी कॉलोनी तक करीब 3.39 किलोमीटर लंबा होगा। इसकी सबसे बड़ी चुनौती और खूबी यह है कि इसे जमीन से लगभग 19 से 20 मीटर की गहराई पर बनाया जा रहा है। पुराने भोपाल की तंग गलियों, ऐतिहासिक इमारतों और घनी आबादी को बिना किसी नुकसान पहुंचाए, जमीन के नीचे यह सुरंग शहर के ट्रैफिक दबाव को पूरी तरह खत्म करने का माद्दा रखती है। इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए सतह पर बिना किसी बड़े शोर या कंपन के निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा।

बेंगलुरु से आईं 100 करोड़ी 'पाताल चीर' मशीनें
इस महाप्रोजेक्ट को हकीकत में बदलने के लिए बेंगलुरु से दो विशालकाय टनल बोरिंग मशीनें (TBM) भोपाल पहुंच चुकी हैं। लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत वाली एक-एक मशीन की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह 5.8 मीटर व्यास की गोलाई में जमीन के भीतर जुड़वां सुरंगों का निर्माण करेगी। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, इन मशीनों के पुर्जों को जोड़ने और तकनीकी परीक्षण के बाद मार्च 2026 से खुदाई का मुख्य अभियान शुरू होगा। यह मशीनें हर दिन औसतन 15 मीटर की रफ्तार से रास्ता तैयार करेंगी, जिसमें खुदाई के साथ-साथ टनल को मजबूत करने का काम भी साथ चलता रहेगा।

रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड होंगे अंडरग्राउंड स्टेशन
इस अंडरग्राउंड रूट पर भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे दो सबसे व्यस्त स्टेशन होंगे। वर्तमान में इन स्थानों पर प्रारंभिक खुदाई का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। यह रूट न केवल करोंद क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुधारेगा, बल्कि यात्रियों को भोपाल स्टेशन से सीधे मेट्रो की सुविधा प्रदान करेगा। यह परियोजना भविष्य की अन्य मेट्रो लाइनों के लिए एक मॉडल के रूप में काम करेगी और भोपाल को एक ग्लोबल सिटी की कतार में खड़ा कर देगी।

 

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