छत्तीसगढ़ में पेयजल संकट पर सख्ती: एक हफ्ते में हैंडपंप और पाइपलाइन सुधारने के निर्देश

May 9, 2026 - 10:14
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छत्तीसगढ़ में पेयजल संकट पर सख्ती: एक हफ्ते में हैंडपंप और पाइपलाइन सुधारने के निर्देश

रायपुर.

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी निकायों को पेयजल संकट के निवारण के निर्देश दिए हैं। विभाग ने राज्य के सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को परिपत्र जारी कर इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं।

विभाग ने सभी निकायों को हैंडपंपों, बोरवेल एवं अन्य जलप्रदाय प्रणालियों की एक सप्ताह में चेकिंग कर आवश्यक मरम्मत करने को कहा है। साथ ही पाइपलाइन में लीकेज या टूट-फूट को तत्काल सुधारने तथा नालियों से होकर गुजरने वाले पाइपलाइनों व हाऊस-सर्विस कनेक्शन को स्थानांतरित करने के भी निर्देश दिए हैं।

डिप्टी सीएम ने पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के दिए थे निर्देश
उप मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने हाल ही में निकायों की समीक्षा बैठक के दौरान गर्मियों में निरंतर और समुचित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके परिपालन में संचालनालय ने सभी निकायों को पेयजल संकट के निवारण तथा स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति के लिए निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने ऐसे वार्डों एवं बस्तियों जहां ग्रीष्म काल में जलस्तर नीचे चला जाता है, उन्हें चिन्हित कर उचित माध्यम से जलप्रदाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

इन्हें बनाया गया नोडल अधिकारी
नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी निकायों को जारी परिपत्र में कहा है कि ग्रीष्मकालीन पेयजल संकट के निवारण के लिए नगर निगमों में आयुक्त तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी नोडल अधिकारी होगें। पेयजल संकट के समाधान के लिए वे प्रतिदिन स्वयं शिकायतों के निराकरण की समीक्षा करेगें। जल प्रदाय योजनाओं के संधारण एवं मरम्मत के लिए प्राप्त शिकायतों को रजिस्टर में दर्ज कर समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करेंगे। विभाग ने सभी निकायों को संचालनालय से जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए ग्रीष्म काल में लोगों को शुद्ध पेयजल प्रदान करना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

विभाग ने निकायों को हैंडपंपों के जल को कीटाणुरहित करने ब्लीचिंग पावडर का घोल और सोडियम हाइपोक्लोराइड आवश्यक मात्रा में डालना सुनिश्चित करने को कहा है। जलप्रदाय में क्लोरीन की मात्रा का नियमित परीक्षण करने तथा आवश्यकतानुसार ओव्हरहेड टैंक में रि-क्लोरीनेशन सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देशित किया गया है। निकायों में स्थापित जल शोधन संयंत्रों, उच्च स्तरीय जलागारों एवं संपवेल के सिल्ट की सफाई एवं डिस-इन्फेक्शन भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने बस स्टैण्डों, बाजारों एवं अन्य प्रमुख स्थलों पर प्याऊ घर खोलने और वहां पानी की व्यवस्था के साथ मानव बल भी उपलब्ध कराने को कहा है। इसके लिए सामाजिक संस्थाओं एवं एनजीओ से भी स्वेच्छानुसार सहयोग लिए जा सकते हैं।

नगरीय प्रशासन विभाग ने 15वें वित्त आयोग एवं अन्य मद से स्वीकृत जल प्रदाय योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने को कहा है। ऐसी जल आवर्धन योजनाएं और अमृत मिशन के कार्य जो पूर्णता की स्थिति में हैं, उन्हे 15 दिनों में पूर्ण कर पेयजल आपूर्ति प्रारंभ कर कार्य पूर्णता वाली योजनाओं का तुरंत संचालन प्रारंभ करते हुए पेयजल आपूर्ति योजनाओं का लाभ नागरिकों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने के भी निर्देश निकायों को दिए गए हैं। निकायों को पशुधन के लिए भी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया है। इस हेतु निस्तारी के लिए तालाबों में जल भराव के लिए जल संसाधन विभाग एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से समन्वय स्थापित कर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने कहा गया है।

विभाग ने निकायों को भू-जल स्तर बढ़ाने नलकूप या बोरवेल के समीप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग या रिचार्ज पिट का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए नियमित जल परीक्षण कर रिपोर्ट संचालनालय को भेजने कहा गया है। निकायों को महामारी फैलने की जानकारी प्राप्त होने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग से समन्वय स्थापित कर उचित कार्यवाही करने कहा गया है।
विभाग ने निकायों में संचालित डोर-टू-डोर अपशिष्ट संग्रहण वाहनों के माध्यम से जल के दुरूपयोग को रोकने व जल संचयन के लिए प्रचार-प्रसार करने के साथ ही जनप्रतिनिधियों, स्वयं सेवी संस्थाओं एवं नागरिक समूहों के सहयोग से प्रत्येक वार्ड में जल संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए हैं।

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