लुधियाना में माइनिंग माफिया पर नकेल: डॉक्टर तेजपाल गिल ने उठाई फसलों और सरकारी संपत्ति के नुकसान की आवाज

Apr 18, 2026 - 12:44
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लुधियाना में माइनिंग माफिया पर नकेल: डॉक्टर तेजपाल गिल ने उठाई फसलों और सरकारी संपत्ति के नुकसान की आवाज

लुधियाना. 
लुधियाना क्षेत्र में अवैध माइनिंग माफिया की सक्रियता ने स्थानीय किसानों और आम जनता की रातों की नींद उड़ा दी है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर डॉक्टर तेजपाल गिल ने अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध तरीके से की जा रही खुदाई के कारण न केवल उपजाऊ भूमि का क्षरण हो रहा है, बल्कि किसानों की तैयार फसलों को भी भारी क्षति पहुँच रही है। माफिया द्वारा की जाने वाली अनियंत्रित माइनिंग ने कृषि प्रधान क्षेत्र के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं।

सरकारी संपत्ति को पहुँच रहा भारी नुकसान
अवैध खनन का प्रभाव केवल फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी बुनियादी ढांचे को भी नुकसान हो रहा है। डॉक्टर गिल के अनुसार, भारी वाहनों की आवाजाही और अनियंत्रित खुदाई के कारण आसपास की सड़कों, ड्रेनेज सिस्टम और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों की स्थिति जर्जर होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि माफिया निजी लाभ के लिए सार्वजनिक संसाधनों का दोहन कर रहा है, जिसकी भरपाई अंततः आम जनता को ही करनी पड़ती है। यह स्थिति क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़ी बाधा बन गई है।

कैबिनेट मंत्री से सख्त हस्तक्षेप की गुहार
समस्या की गंभीरता को देखते हुए, डॉक्टर तेजपाल गिल ने कैबिनेट मंत्री से मुलाकात की और उन्हें विस्तार से जमीनी हकीकत से अवगत कराया। उन्होंने एक औपचारिक मांग पत्र सौंपते हुए आग्रह किया कि इस मामले में तुरंत उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाए। उन्होंने मांग की कि जो लोग भी अवैध खनन में लिप्त हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उनकी मशीनों को जब्त किया जाए। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार अवैध माइनिंग को लेकर शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाएगी।

पर्यावरण और जनहित की रक्षा का संकल्प
क्षेत्र में माइनिंग माफिया के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सामाजिक स्तर पर भी लामबंदी शुरू हो गई है। डॉक्टर गिल ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा और किसानों के हितों को बचाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन तेज किया जाएगा। यह मांग की गई है कि माइनिंग साइटों की नियमित निगरानी के लिए विशेष टीमें तैनात की जाएं ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।

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