CRPF की K9 यूनिट बनी आतंकियों का खौफ, टॉयसन जैसे सैकड़ों डॉग कमांडो तैयार
नई दिल्ली
भारत की सुरक्षा में तैनात जवानों की बहादुरी की कहानियां अक्सर सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन कई बार असली हीरो वो होते हैं जो बोल नहीं सकते, फिर भी देश के लिए जान जोखिम में डाल देते हैं. ऐसी ही एक इंस्पायरिंग स्टोरी है टायसन की, जो भारतीय सेना की एलीट यूनिट 2 पैरा स्पेशल फोर्सेस का हाईली ट्रेंड के9 सोल्जर है. जम्मू-कश्मीर के हॉस्टाइल टेरेन में हुए एक हाई-रिस्क काउंटर-टेरर ऑपरेशन के दौरान टायसन ने जो साहस दिखाया, उसने साबित कर दिया कि बैटलफील्ड में करेज किसी इंसान या जानवर की पहचान से नहीं, बल्कि उसकी ट्रेनिंग और डेडिकेशन से तय होता है.
क्यों मिसाल बनी ऑपरेशन में टायसन की बहादुरी?
जम्मू-कश्मीर में इंटेलिजेंस इनपुट्स के आधार पर 2 पैरा एसएफ को एक टेररिस्ट हाइडआउट की जानकारी मिली थी. इलाके का टेरेन बेहद चैलेंजिंग था. ऊंचे पहाड़, घने जंगल और खराब मौसम ने इस ऑपरेशन को बेहद मुश्किल बना दिया था. .
आतंकियों के पास मॉर्डन वैपेंस की मौजूदगी ने इस ऑपरेशन को बेहद हाई-रिस्क ऑपरेशन बना दिया था. स्पेशल फोर्सेस ने हाइडआउट को कॉर्डन किया और टायगर को आगे बढ़ने का इशारा दिया गया. मिलिट्री के9 को अक्सर फर्स्ट कॉन्टैक्ट रोल में डिप्लॉय किया जाता है क्योंकि उनकी सेंसिंग एबिलिटी इंसानों से कई गुना तेज होती है.
टायसन बिना किसी हेजिटेशन के हाइडआउट की ओर चार्ज कर गया. उसी दौरान आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी. गोलियों की आवाज और एक्सप्लोजन के बीच भी टायसन पीछे नहीं हटा. ऑपरेशन के दौरान टायसन को गोली लग गई, बावजूद इसके उसने मिशन नहीं छोड़ा.
उसकी मौजूदगी और ट्रैकिंग कैपेबिलिटी ने कमांडोज को आतंकियों की एक्जैक्ट पोजिशन पहचानने में मदद की. इसके बाद 2 पैरा एसएफ ने डिसाइसिव असॉल्ट किया और तीन आतंकियों को मार गिराया, जिनमें आतंकी सैफुल्लाह भी शामिल था.
ऑपरेशन पूरा होने के बाद टायसन को तुरंत एयरलिफ्ट किया गया और एडवांस्ड मेडिकल केयर दी गई. अब उसकी कंडीशन स्टेबल है.
तरालु से शुरू हुई थी टायसन की ट्रेनिंग जर्नी
टायसन की जांबाजी के पीछे कई महीनों की इंटेंस ट्रेनिंग है, जो उसने सीआरपीएफ के डॉग ब्रीडिंग एंड ट्रेनिंग स्कूल में हासिल की थी.
कर्नाटक के तरालु में स्थित इस प्रीमियर इंस्टीट्यूशन में टायसन ने 7 फरवरी 2022 से 22 दिसंबर 2022 तक ट्रेनिंग ली. यहां डॉग्स को सिर्फ कमांड्स ही नहीं, बल्कि कॉम्बैट बिहेवियर भी सिखाया जाता है.
यहां के9 टीम्स को मल्टी-टास्किंग रोल्स के लिए तैयार किया जाता है, जिसमें इन्फैंट्री पेट्रोल, एक्सप्लोसिव डिटेक्शन, असॉल्ट ऑपरेशंस, ट्रैकिंग एंड सर्च मिशन शामिल हैं.
सीआरपीएफ के इस डॉग ब्रीडिंग एंड ट्रेनिंग स्कूल की शुरूआत 27 अगस्त 2011 को सिर्फ 15 पप्स और 6 ब्रीडिंग डॉग्स से हुई थी. बेंगलुरु सिटी सेंटर से लगभग 25 किलोमीटर दूर यह कैंपस मॉडर्न फैसिलिटीज से लैस है.
यहां बेल्जियन शेफर्ड मलिनोइस और डच शेफर्ड जैसी एलीट ब्रीड्स को पुलिस सर्विस के9 के तौर पर प्रिशिक्षत किया जाता है. आरपीएफ अब तक अपने इस सेंटर में 1377 से अधिक के9 टीम्स ट्रेंड कर ऑपरेशन एरिया में डिप्लॉय कर चुकी है.
सीआरपीएफ ने खड़ी की K9 सोल्जर्स और हैंडलर्स की फौज
सीआरपीएफ के अनुसार, दिसंबर 2025 तक डीबीटीएस ने 1377 K9 सोल्जर्स की फौज खड़ी कर ऑपरेशन एरिया में तैनात कर दिया है. साथ ही, 824 डॉग हैंडलर्स और 183 मास्टर ट्रेनर्स को भी प्रशिक्षित किया गया है.
बेंगलुरु स्थित इस डॉग ब्रीडिंग एंड ट्रेनिंग स्कूल में अब तक 1431 पप्स ब्रीड किए गए हैं. इन के9 सोल्जर्स ने देशभर में ऑपरेशंस (Operations) के दौरान 6207 किलो से अधिक एक्सप्लोसिव्स रिकवर करने में मदद की है.
ऑल इंडिया पुलिस कंपटीशन (AIPDM) 2018 के दौरान सीआरपीएफ के डीबीटीएस में ट्रेंड के9 बैशा डॉग ने नारकोटिक डिटेक्शन ब्रॉन्ज मेडल मेडल जीता था.
के9 जुबान डॉग ने नेशनल काउंटर-IED एक्सरसाइज में फर्स्ट पोजिशन हासिल किया था. इसके अलावा, के9 रेमो डॉग ने एक्सप्लोसिव डिटेक्शन में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था.
सीआरपीएफ के9 डैनबी और के9 वास्ट डॉग को पेरिस ओलंपिक्स 2024 सिक्योरिटी फ्रेमवर्क में शामिल किया गया था. वहीं, के9 बैशा ने ऑल इंडिया पुलिस कंपटीशन (AIPDM) 2025 में गोल्ड मेडल जीता था.
क्या डॉग ब्रीडिंग एंड ट्रेनिंग सेंटर में भारतीय ब्रीड के डॉग्स को भी ट्रेंड किया जाता है?
डॉग ब्रीडिंग एंड ट्रेनिंग सेंटर में फॉरेन ब्रीड्स के साथ-साथ अब इंडिजिनस यानी भारतीय डॉग ब्रीड्स को भी ऑपरेशनल रोल्स के लिए तैयार किया जा रहा है. पायलट प्रोजेक्ट्स के तहत मुधोल हाउंड, कोंबाई, मोंग्रेल और पंडिकोना जैसी भारतीय नस्लों के डॉग्स को ट्रेन किया जा रहा है. इन डॉग्स की खासियत यह है कि ये भारतीय मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों में आसानी से एडॉप्ट हो जाते हैं. इन्हें ट्रैकिंग, सर्विलांस और सिक्योरिटी ऑपरेशन्स जैसे ऑपरेशंस के लिए तैयार किया जा रहा है, जिससे ये फोर्स मल्टिप्लायर्स के रूप में उभर रहे हैं.
सेना या फोर्स से रिटायर होने वाले डॉग्स का क्या होता है?
ओपेरा — सीनियर के9 केयर सेंटर एक विशेष फैसिलिटी है, जिसे नवंबर 2024 में शुरू किया गया ताकि सर्विस डॉग्स को रिटायरमेंट के बाद सम्मानजनक जीवन मिल सके. ये डॉग्स अपने करियर के दौरान कई हाई-रिस्क मिशंस और ऑपरेशन्स का हिस्सा रहते हैं, इसलिए उनकी रिटायरमेंट लाइफ की देखभाल बेहद जरूरी होती है. इस सेंटर में उन्हें सुरक्षित शेल्टर, नियमित मेडिकल केयर और वेटरनरी सपोर्ट दिया जाता है.
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0