हमें शुभ मुहूर्त मत बताइए — मंदिर-मस्जिद विवाद में हिंदू पक्ष पर सुप्रीम कोर्ट क्यों हुआ सख्त?

Jan 22, 2026 - 14:14
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हमें शुभ मुहूर्त मत बताइए — मंदिर-मस्जिद विवाद में हिंदू पक्ष पर सुप्रीम कोर्ट क्यों हुआ सख्त?

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (22 जनवरी) को फैसला सुनाया कि मध्य प्रदेश के धार में विवादित भोजशाला परिसर में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय कल यानी शुक्रवार, 23 जनवरी को पूजा-अर्चना कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद स्थल में शुक्रवार को बसंत पंचमी के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदू पूजा-अर्चना करेंगे, जबकि मुस्लिम समुदाय के लोग उसी दिन दोपहर एक बजे से तीन बजे तक जुमे की नमाज अदा करेंगे।
 
मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने इस आदेश के साथ ही दोनों पक्षों से आपसी सम्मान और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य और जिला प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की है। हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों ने शुक्रवार को बसंत पंचमी के दिन भोजशाला परिसर में अपनी-अपनी धार्मिक गतिविधियों के लिए अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने एक प्रस्ताव पर विचार करते हुए कहा कि जुमे की नमाज़ मस्जिद के अंदर एक तय जगह पर दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच अदा की जाएगी और नमाज़ के तुरंत बाद भीड़ वहां से तितर-बितर हो जाएगी। इस के बाद वहां हिन्दू समुदाय पूजा-अर्चना और अन्य गतिविधियां कर सकेंगे।

याचिका में क्या मांग?
दरअसल, हिन्दू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी डालकर मांग की थी कि भोजशाला मस्जिद परिसर में बसंत पंचमी होने के कारण शुक्रवार को वहां सूर्योदय से सूर्यास्त तक नमाज़ पढ़ने पर रोक लगाई जाए। हिन्दू पक्ष की तरफ से विष्णु जैन मामले की पैरवी कर रहे थे, जबकि मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद पैरवी कर रहे थे। सुनवाई के दौरान सलमान खुर्शीद ने कोर्ट से कहा, "ASI ने कहा है कि शुक्रवार को भी सर्वे जारी रहेगा। इस बीच, दो घंटे वहां नमाज़ अदा की जा सकेगी और पूजा भी होगी...नमाज़ सिर्फ़ दोपहर में होती है। हम दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बाद जगह खाली कर देंगे"।

मुहूर्त सूर्योदय से सूर्यास्त तक
बार एंड बेंच के मुताबिक, इस पर जस्टिस बागची ने कहा, "पूजा का मुहूर्त दोपहर 1 बजे तक है...पूजा दोपहर 1 बजे तक पूरी हो जाए और उसके बाद 1 बजे से 3 बजे तक नमाज़ होगी।" इसी बीच, एडवोकेट विष्णु जैन बोल पड़े, "...लेकिन मुहूर्त सूर्योदय से सूर्यास्त तक है।" इतना सुनते ही जस्टिस बागची भड़क उठे। उन्होंने कहा, "हमें मत बताइए मुहूर्ज्ञत कब है.. मुझे पर्सनली पता है कि यह दोपहर 1 बजे तक है।" इस पर जैन ने फिर सवाल किया, “क्या नमाज़ शाम 5 बजे के बाद हो सकती है क्योंकि हम वहां लंबे समय तक अखंड हवन वगैरह करने वाले हैं।”

हमें लोगों की संख्या बताई जाए: ASG
हिन्दू पक्ष की इस दलील पर सलमान खुर्शीद ने कहा, "जुम्मे की नमाज़ एक खास समय पर होती है। दूसरी नमाज़ अन्य समय पर हो सकती है.. लेकिन जुम्मे की नमाज़ सिर्फ़ दोपहर में ही हो सकती है।" मध्य प्रदेश सरकार और ASI की ओर से पेश ASG नटराज ने कोर्ट से कहा कि अगर हमें लोगों की संख्या बताई जाए.. तो हम कॉम्प्लेक्स के अंदर जगह बना सकते हैं और सुरक्षा व्यवस्था समेत अन्य इंतजाम कर सकते है। जहाँ आने-जाने का इंतज़ाम किया जा सके। इस पर खुर्शीद ने भरोसा दिया कि हम संख्या बता सकते हैं। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शुक्रवार को वहां नमाज और बसंत पंचमी पूजा दोनों होगी। नमाज दोपहर में दो घंटे अदा की जाएगी।

भोजशाला विवाद क्या?
बता दें कि यह याचिका एक ऐतिहासिक जगह से जुड़ी है, जिसे एक पक्ष भोजशाला सरस्वती मंदिर कहता है और दूसरा पक्ष मौलाना कमाल मस्जिद बताता है। हिंदू लोग भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित 11वीं शताब्दी का स्मारक है। एएसआई की ओर से सात अप्रैल, 2003 को की गई एक व्यवस्था के तहत, हिंदू मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा करते हैं और मुसलमान शुक्रवार को परिसर में नमाज अदा करते हैं।

 

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