शरीर में आर-पार घुसे 4 लोहे के सरिये, KGMU के डॉक्टरों ने साढ़े आठ घंटे की सर्जरी से बचाई मजदूर की जान

Jul 18, 2026 - 06:44
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शरीर में आर-पार घुसे 4 लोहे के सरिये, KGMU के डॉक्टरों ने साढ़े आठ घंटे की सर्जरी से बचाई मजदूर की जान

  लखनऊ
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों ने एक बेहद मुश्किल ऑपरेशन कर 23 साल के मजदूर की जान बचाई. युवक के शरीर में चार लोहे की सरिये आर-पार हो गए थे. करीब 8 घंटे 30 मिनट तक चली सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने सभी सरियों को उसके शरीर से निकाला. फिलहाल मरीज आईसीयू में भर्ती है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। 

फर्रुखाबाद के नरैया गांव का रहने वाला उमेश 13 जुलाई की सुबह लखनऊ के बादशाह नगर में एक निर्माणाधीन इमारत में काम कर रहा था. इसी दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया और वह कई फीट नीचे लोहे की सरियों पर जा गिरा. हादसा इतना गंभीर था कि चार लोहे के सरिए उसके शरीर के बाएं हिस्से से अंदर घुसकर पेट और छाती को चीरते हुए बाहर निकल आए. इनमें से तीन सरिए कंधे और गर्दन तक पहुंच गए थे। 

मौके पर मौजूद लोगों ने सरिये निकालने की कोशिश नहीं की. बल्कि उन सरियों को काटा और उसी हालत में उमेश को एंबुलेंस से केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया. डॉक्टरों का कहना है कि अगर सरिये मौके पर निकाले होते तो उसकी जान जा सकती थी. अस्पताल पहुंचने पर मरीज की हालत बेहद गंभीर थी. उसका ब्लड प्रेशर गिर रहा था और पेशाब में खून आ रहा था. जांच में पता चला कि सरियों से मूत्राशय, छोटी आंत, आमाशय, प्लीहा, डायफ्राम, बायां फेफड़ा और कई बड़ी खून की नसें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थीं. फेफड़े में हवा भर जाने से सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। 

लोगों की समझदारी से बची मजदूर की जान
प्रो. डॉ. समीर मिश्रा के निर्देशन में डॉ. नरेंद्र कुमार और उनकी टीम ने पहले मरीज को किसी तरह से संभाला. इसके बाद उसे ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया. डॉक्टरों ने बहुत सावधानी से एक-एक कर सरियों को निकाला और शरीर के सभी चोटिल अंगों की ठीक किया. यह ऑपरेशन करीब 8 घंटे 30 मिनट तक चला. इस दौरान मरीज को 3 यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल (PRBC) और 4 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (FFP) भी चढ़ाया गया। 

सर्जरी के बाद मरीज को आईसीयू में भर्ती किया गया. डॉक्टरों के मुताबिक अब उसकी हालत स्थिर है और लगातार निगरानी की जा रही है. KGMU की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने सफल ऑपरेशन करने वाली पूरी मेडिकल टीम की सराहना की. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में समय पर इलाज और अलग-अलग विभागों के तालमेल से मरीज की जान बचाई जा सकती है। 

डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी शख्स के शरीर में लोहे की रॉड या कोई नुकीली चीज धंस जाए तो उसे मौके पर या अस्पताल ले जाने से पहले कभी न निकालें. इससे तेज खून बह सकता है और मरीज की जान को खतरा हो सकता है. ऐसी चीजों को केवल ऑपरेशन थिएटर में विशेषज्ञ डॉक्टर ही निकालें। 

मेडिकल टीम की मेहनत से मिला मरीज को नया जीवन
इस जटिल सर्जरी में प्रो. डॉ. समीर मिश्रा, डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. यदवेन्द्र धीर, डॉ. रंबित, डॉ. चरणवीर, डॉ. महेश, डॉ. प्रज्ज्वल, डॉ. धैर्य, डॉ. अंकित, डॉ. अखंड, डॉ. मोहतास्नि, डॉ. सागर और डॉ. पार्थ शामिल रहे. एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. विपिन ने किया. उनकी टीम में डॉ. हरीश, डॉ. ओबेनथुंग और डॉ. मृणांजल शामिल रहे। 

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