ट्राइडेंट ग्रुप केस में हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, प्रदूषण बोर्ड पर लगे राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप

May 4, 2026 - 10:14
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ट्राइडेंट ग्रुप केस में हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, प्रदूषण बोर्ड पर लगे राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप

चंडीगढ़.

ट्राइडेंट समूह और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच चल रहे विवाद पर उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में ट्राइडेंट समूह ने बोर्ड की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया है, जबकि बोर्ड ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे नियमों के तहत की गई सामान्य जांच बताया है।

ट्राइडेंट ग्रुप हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उसके संस्थापक एवं राज्यसभा सांसद राजेंद्र गुप्ता के राजनीतिक पाला बदलने के तुरंत बाद पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने बदले की भावना से फैक्टरी पर असामान्य कार्रवाई शुरू कर दी व उसकी सुरक्षा भी वापिस ले ली गई है। सोमवार को याचिकाकर्ता ट्राइडेंट ग्रुप की ओर से  हाई कोर्ट के समक्ष यह प्रमुख तर्क रखा कि ट्राइडेंट ग्रुप पर कार्रवाई पर्यावरणीय उल्लंघन के बजाय “राजनीतिक प्रतिशोध” से प्रेरित प्रतीत होती है। अदालत को बताया गया कि कंपनी के चेयरमैन एमेरिटस के राजनीतिक रुख बदलने के बाद ही अचानक कड़ी कार्रवाई शुरू हुई। ट्राइडेंट ग्रुप ने कहा कि ट्राइडेंट ग्रुप के यार्न और अन्य डिवीजनों को 7 अप्रैल और 13 अप्रैल 2026 तक वैध कंसेंट/क्लियरेंस प्राप्त थे, जबकि पेपर डिवीजन का पूर्व अनुमति रिकॉर्ड भी मौजूद है और टॉवल डिवीजन के लिए आवेदन 30 जनवरी 2026 से लंबित है।

निरीक्षण विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत होना चाहिए
याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी कहा कि निरीक्षण करने की शक्ति पर कोई विवाद नहीं, लेकिन निरीक्षण भी विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। आरोप लगाया गया कि 30 अप्रैल की शाम लगभग 7:30 बजे 30 सदस्यीय टीम ने अचानक परिसर में प्रवेश किया, स्टाफ पर दबाव बनाया, नमूने लिए और प्रक्रिया का उचित पालन नहीं किया गया। अदालत को बताया कि सैंपलिंग रिपोर्ट पर उन्होंने “प्रोटेस्ट” के साथ हस्ताक्षर किए थे क्योंकि उन्हें आशंका थी कि कार्रवाई पूर्वाग्रहपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाई जा रही है। साथ ही, अदालत के समक्ष ई-फाइल की गई अतिरिक्त दस्तावेजी सामग्री पेश कर यह दर्शाने का प्रयास किया गया कि नियामक संस्थाएं पूर्व में लगातार निरीक्षण करती रही हैं और ट्राइडेंट ग्रुप को हालिया समय तक आवश्यक स्वीकृतियां मिलती रही हैं।

बोर्ड ने आरोप खारिज किए
दूसरी ओर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से इस पूरे आरोप को “कल्पना” करार दिया गया। बोर्ड के वकील ने स्पष्ट कहा कि यह कोई “रेड” नहीं बल्कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के तहत नियमित निरीक्षण था। अदालत को बताया गया कि वाटर एक्ट की धारा 23 के तहत रेड कैटेगरी और बड़े औद्योगिक इकाइयों की नियमित जांच अनिवार्य है तथा पिछले छह महीनों में लगभग 450 निरीक्षण किए जा चुके हैं। बोर्ड ने जोर देकर कहा कि अभी तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित ही नहीं हुआ है, इसलिए याचिका समयपूर्व है। उनका तर्क था कि ट्राइडेंट ग्रुप अदालत से मूलतः यह आदेश चाहता है कि भविष्य में संभावित प्रतिकूल रिपोर्ट के आधार पर भी कोई कार्रवाई न हो, जबकि अभी केवल निरीक्षण हुआ है और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।

याचिका की वैधता पर भी उठा सवाल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से सबसे पहले याचिका की वैधता  पर तीखा सवाल उठाया गया। बोर्ड के वकील ने अदालत को स्पष्ट कहा कि अभी तक उद्योग के खिलाफ कोई अंतिम या दंडात्मक आदेश पारित ही नहीं हुआ, इसलिए याचिका समयपूर्व  है। उनका तर्क था कि केवल आशंका के आधार पर अदालत से यह मांग नहीं की जा सकती कि भविष्य में संभावित कार्रवाई रोकी जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि कोई प्रतिकूल आदेश पारित होता है तो एनजीटी की धारा 14 के तहत वैकल्पिक वैधानिक उपाय उपलब्ध है, इसलिए सीधे हाई कोर्ट का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए।

सैंपल लेने के दौरान नहीं हुई नियमों की पालना
याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत के समक्ष विस्तार से कहा कि सैंपल लेने की शक्ति पर विवाद नहीं है, लेकिन कानून में निर्धारित प्रक्रिया बाध्यकारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि निरीक्षण टीम ने मौके पर विधिसम्मत नोटिस नहीं दिया, नमूनों को दो भागों में विभाजित नहीं किया, न ही उन्हें विधिवत सील कर उद्योग प्रतिनिधि के हस्ताक्षर लिए गए। धारा 21(3) का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यदि यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई तो ऐसे नमूनों की विश्लेषण रिपोर्ट कानूनी साक्ष्य के रूप में भी संदिग्ध हो सकती है।

कोर्ट में अन्य सांसदों का भी उठा मुद्दा
याचिकाकर्ता ने अदालत को यह भी बताया कि पीपीसीबी के अपने रिकॉर्ड के अनुसार 25 मार्च 2026 तक उद्योग के विभिन्न मानक निर्धारित सीमा के भीतर थे और 13 अप्रैल 2026 तक सहमति आदेश भी जारी किया गया था। ऐसे में एक महीने के भीतर अचानक कठोर रुख अपनाने पर संदेह स्वाभाविक है।
अदालत ने एक ओर माना कि राजनीतिक समय-क्रम से आशंका पैदा हो सकती है, लेकिन साथ ही कहा कि अंतिम सुरक्षा कानून सम्मत प्रक्रिया के भीतर ही दी जाएगी। कोर्ट को एक मीडिया हाउस के खिलाफ कार्रवाई ओर क्रिकेटर हरभजन सिंह व संदीप पाठक के खिलाफ कार्रवाई का भी हवाला दिया गया।

कंपनी का दावा- वैध कंसेंट मौजूद
कंपनी के पास अब भी वैध कंसेंट मौजूद हैं, हालिया निरीक्षण से पहले तक उसके अनुपालन रिकॉर्ड बोर्ड के दस्तावेजों में संतोषजनक हैं, और इसलिए बिना निष्पक्ष संयुक्त निरीक्षण के किसी भी कठोर कदम- विशेषकर बिजली कटौती, बंदी या 33A के तहत दमनात्मक आदेश- से 15,000 कर्मचारियों वाली सूचीबद्ध कंपनी को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

उसने अदालत से कम-से-कम इतना संरक्षण मांगा कि बिना शो-कॉज नोटिस या निष्पक्ष प्रक्रिया कोई कठोर कदम न उठाया जाए। इसके विपरीत, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अत्यंत आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि याचिका वस्तुतः अदालत से यह निर्देश चाहती है कि एक वैधानिक प्राधिकरण अपनी शक्तियों का उपयोग किस प्रकार करे जो न्यायिक मर्यादा के विपरीत है। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपन फैसला सुरक्षित रख लिया।

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