केरल में राज्यपाल ने छोड़ा अधूरा भाषण, CM ने खुद पढ़ा केंद्र आलोचना वाला हिस्सा

Jan 21, 2026 - 17:14
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केरल में राज्यपाल ने छोड़ा अधूरा भाषण, CM ने खुद पढ़ा केंद्र आलोचना वाला हिस्सा

तिरुवनंतपुरम
केरल विधानसभा में मंगलवार को एक असाधारण घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने विधानसभा में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के संबोधन समाप्त करने के तुरंत बाद आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नीतिगत भाषण को पूरी तरह नहीं पढ़ा। इसके बाद सीएम ने खुद राज्यपाल द्वारा छोड़े गए भाषण के अंशों को पढ़कर सदन के पटल पर रख दिया। राज्यपाल द्वारा केंद्र सरकार की आलोचना से जुड़े कुछ हिस्से न पढ़े जाने पर मुख्यमंत्री ने कड़ा ऐतराज जताया और स्पष्ट किया कि मंत्रिमंडल द्वारा अप्रूव पूरा भाषण ही सरकार की नीति घोषणा है, जिसे बदला नहीं जा सकता।
 
मुख्यमंत्री के विरोध के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने भी स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो अंश राज्यपाल ने नहीं पढ़े, उन्हें पढ़ा हुआ ही माना जाए और मंत्रिमंडल से स्वीकृत पूरे भाषण को ही आधिकारिक रूप से सदन का हिस्सा माना जाए। उन्होंने कहा कि नीतिगत भाषण सरकार की घोषणा होता है और उसमें कोई भी काट-छांट या जोड़ संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।

इस मुद्दे पर विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने भी राज्य सरकार का समर्थन किया। उन्होंने कहा- संविधान के अनुसार राज्यपाल को वही भाषण पढ़ना चाहिए, जिसे मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी हो। यदि राज्यपाल जानबूझकर किसी हिस्से को छोड़ते हैं या उसमें कुछ जोड़ते हैं, तो यह गलत है।

जानकारी के अनुसार, राज्यपाल ने मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नीतिगत भाषण के अनुच्छेद 12, 15 और 16 नहीं पढ़े। इनमें केंद्र सरकार द्वारा केरल पर डाले जा रहे कथित वित्तीय दबाव और संघीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल थे। छोड़े गए हिस्सों में यह पंक्ति भी थी कि केरल लगातार गंभीर वित्तीय तनाव का सामना कर रहा है, जो केंद्र सरकार की उन कार्रवाइयों के कारण है, जो वित्तीय संघवाद के संवैधानिक सिद्धांतों को कमजोर करती हैं।

इसके अलावा, राज्यपाल उस अंश को भी पढ़ने को तैयार नहीं थे, जिसमें केंद्र द्वारा शक्तियों के अत्यधिक केंद्रीकरण, राज्य सूची के विषयों में हस्तक्षेप और राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों के लंबे समय तक लंबित रहने पर चिंता जताई गई थी। उस हिस्से में यह भी उल्लेख था कि इन मुद्दों पर राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है और मामला संविधान पीठ को सौंपा गया है।

विवाद उस समय और बढ़ गया, जब राज्यपाल ने एक पंक्ति में 'मेरी सरकार मानती है' शब्द जोड़ दिए। यह मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत भाषण का हिस्सा नहीं थे। मुख्यमंत्री ने अध्यक्ष से इसे हटाने की मांग की और कहा कि मूल भाषण से अलग कुछ भी स्वीकार्य नहीं है।

हालांकि, अपने नीतिगत भाषण के अन्य हिस्सों में राज्यपाल ने केरल के विकास की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में राज्य ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और विकेंद्रीकरण के क्षेत्र में केरल देश के लिए एक मॉडल बनकर उभरा है। राज्य में शिशु मृत्यु दर में कमी, रोजगार गारंटी योजनाओं की सफलता और गरीबी उन्मूलन के प्रयासों का भी उन्होंने उल्लेख किया।

राज्यपाल ने केंद्र सरकार के कुछ फैसलों की आलोचना करते हुए कहा कि केरल के वैध हिस्से में कटौती, जीएसटी हिस्सेदारी में कमी और ऋण सीमा घटाए जाने से राज्य के अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केरल ने राजस्व बढ़ाने, खर्च नियंत्रित करने और वित्तीय स्थिति सुधारने की दिशा में कदम उठाए हैं।

भाषण में राज्य की अर्थव्यवस्था को विकास पथ पर बताया गया और Vizhinjam Port परियोजना को आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन में सहायक बताया गया। राज्यपाल ने कहा कि इससे शिक्षित युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, उन्होंने कानून-व्यवस्था में सुधार, निर्बाध बिजली आपूर्ति, जीवन स्तर को बेहतर बनाने के न्यू केरल लक्ष्य, वन्यजीवों के कारण फसल क्षति पर मुआवजा सुनिश्चित करने और कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के लिए तैयार करने का भी उल्लेख किया।

 

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