नए साल में मध्यप्रदेश के 15 लाख कर्मचारियों को आयुष्मान जैसी सुविधा, 10 लाख तक कैशलेस इलाज

Dec 26, 2025 - 03:44
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नए साल में मध्यप्रदेश के 15 लाख कर्मचारियों को आयुष्मान जैसी सुविधा, 10 लाख तक कैशलेस इलाज

 भोपाल
 प्रदेश सरकार राज्य के 15 लाख से अधिक कर्मचारियों को नए साल 2026 में आयुष्मान जैसी स्वास्थ्य सुविधा योजना देने की तैयारी कर रही है।प्रस्ताव बना लिया गया है। इसमें कर्मचारियों को हरियाणा और राजस्थान की तरह कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। कुछ राशि उनके वेतन से अंशदान के तौर पर काटी जाएगी, शेष राशि सरकार जमा कराएगी।
कर्मचारी संगठनों के सुझाव पर बनाई योजना

मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के नाम से प्रस्तावित यह योजना राज्य सरकार ने कर्मचारी संगठनों के सुझाव पर बनाई है। इसके लिए भी आयुष्मान भारत की तरह प्रदेश और प्रदेश के बाहर के निजी अस्पतालों से अनुबंध किया जाएगा। कर्मचारी संगठन लंबे समय से कैशलेस उपचार सुविधा की मांग कर रहे हैं, जो जल्द ही उन्हें मिल सकती है।

10 लाख रुपये तक फ्री इलाज का प्रस्ताव

प्रस्तावित योजना में प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सेवानिवृत्त कर्मियों के परिवारों को सामान्य इलाज के लिए पांच लाख रुपये और गंभीर बीमारी होने पर दस लाख रुपये तक की निश्शुल्क चिकित्सा और ओपीडी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

वेतन और पेंशन से कितना देना होगा अंशदान

इसमें कर्मचारियों के वेतन और पेंशन से 250 से 1000 रुपये तक मासिक अंशदान लिया जाएगा। शेष राशि सरकार मिलाएगी। बता दें कि सरकार ने फरवरी 2020 में प्रदेश के कर्मचारियों के लिए फ्री इलाज की घोषणा की थी। इसका आदेश भी जारी हुआ था, लेकिन योजना शुरू नहीं की जा सकी। उत्तराखंड सरकार इसी तरह की योजना संचालित कर रही है।

इन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

स्थायी, अस्थायी, संविदा, शिक्षक संवर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, कार्यभारित, राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, आशा एवं उषा कार्यकर्ता, आशा सुपरवाइजर और कोटवार और आउटसोर्स स्वास्थ्य सुविधा का लाभ ले पाएंगे। इन कर्मचारियों की संख्या 15 लाख से अधिक है।

अभी खुद कराते हैं इलाज

प्रदेश में अभी कर्मचारी और पेंशनर्स इलाज का सारा खर्च खुद उठाते हैं और बाद में विभाग के माध्यम से खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करते हैं। यह प्रस्ताव कैबिनेट तक जाता है और सरकार बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) की दरों के अनुसार भुगतान करती है, लेकिन कई बार गंभीर बीमारी पर अधिक व्यय होने के कारण पूरा खर्च कवर नहीं होता, जिसके चलते कर्मचारियों को स्वयं ही इलाज का खर्च वहन करना होता है।

    हम तो लंबे समय से कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमा की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई। कई पेंशनर ऐसे हैं जो अपना जीवन यापन भी ठीक तरह से नहीं कर पाते, इलाज कराना तो बहुत दूर की बात है। सरकार को शीघ्र निर्णय लेकर इसे लागू करना होगा। सभी को स्वास्थ्य सुविधा मिलनी चाहिए।

    -सुधीर नायक, मंत्रालय सेवा अधिकारी, कर्मचारी संघ

 

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