Iran War: समंदर का सिकंदर बनकर उभरा ईरान, इराक से सऊदी तक धमाकों से मचा हड़कंप, बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला

Mar 12, 2026 - 11:44
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Iran War: समंदर का सिकंदर बनकर उभरा ईरान, इराक से सऊदी तक धमाकों से मचा हड़कंप, बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला

तेहरान 

 मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव और भी गहरा होता जा रहा है. खाड़ी देश के इलाके में ईरान भारी पड़ता दिख रहा है. अमेरिका और इजरायल पर काल बनकर टूट पड़ा है. गुरुवार को ईरान ने पर्शियन गल्फ में दो तेल टैंकरों पर सुसाइड अटैक किया, जिसमें एक अमेरिकी स्वामित्व वाली टैंकर थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने यूएई और कुवैत में तीन स्ट्रेटेजिक टारगेट पर हमला किया. सैटेलाइट इमेज में साफ दिख रहा है कि फुजैराह के तेल जोन, शारजाह के इंडस्ट्रियल एरिया और कुवैत के अल-सलेम बेस पर हमले हुए हैं. दुबई के क्रीक हार्बर जैसे रिहायशी इलाकों में ईरानी ड्रोन हमलों ने पेंटागन की नींद उड़ा दी है. इराक से लेकर सऊदी अरब तक फैले इस बारूदी खेल और तेल टैंकरों पर होते लगातार हमलों ने साबित कर दिया है कि ईरान अब आर-पार की जंग के मूड में है, जिससे पूरी दुनिया पर महायुद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगा है.

ईरान ने गुरुवार को इराक के क्षेत्रीय जल क्षेत्र (Territorial Waters) में दो विदेशी तेल टैंकरों ड्रोन हमला किया. इस भीषण हमले में चालक दल के एक सदस्य की मौत हो गई है, जबकि इराकी अधिकारियों ने अब तक 38 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है. ईरान ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उसके अंडरवॉटर ड्रोन ने टैंकरों को उड़ा दिया, जिसे इराक ने अपनी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन करार दिया है.

दुबई के इन इलाके पर हमला
दुबई मीडिया ऑफिस ने बताया कि अधिकारियों ने कन्फर्म किया है कि आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और बिल्डिंग में रहने वाले सभी लोग सुरक्षित हैं. दुबई क्रीक हार्बर के पास एक बिल्डिंग पर ड्रोन गिरने की घटना हुई थी. सिविल डिफेंस टीमों ने ड्रोन के बिल्डिंग से टकराने के बाद लगी छोटी सी आग पर तुरंत काबू पा लिया. अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि किसी के घायल होने की खबर नहीं है.

अमेरिका के तीन ठिकानों पर ईरान का हमला
ईरान ने तेहरान के तेल ठिकानों पर हुए हालिया अमेरिका-इजरायल हमले का करारा जवाब देते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत में तीन रणनीतिक ठिकानों पर भीषण हमला किया है. सैटेलाइट तस्वीरों ने पुष्टि की है कि यूएई के फुजैराह तेल क्षेत्र और शारजाह के औद्योगिक इलाके को निशाना बनाया गया है. इसके अलावा, कुवैत स्थित ‘अल-सालेम’ सैन्य अड्डे पर अमेरिकी लॉजिस्टिक्स सेंटर्स पर भी सीधे प्रहार हुए हैं. ईरान का यह प्रतिशोध न केवल खाड़ी देशों में युद्ध की आग भड़का रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है.

तेल टैंकरों पर हमले के बाद इराक का बयान
इराकी पोर्ट्स कंपनी के महानिदेशक फरहान अल-फर्तूसी ने बताया कि हमला उस समय हुआ जब माल्टीज़ ध्वज वाला जेफिरोस (Zefyros) और मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाला सेफसी विष्णु (Safesea Vishnu) इराक के खोर अल-जुबैर बंदरगाह के पास साइडलोडिंग क्षेत्र में लंगर डाले हुए थे. चश्मदीदों और सैटेलाइट फुटेज में दोनों टैंकरों को आग की लपटों में घिरा देखा गया. आग इतनी भीषण थी कि तेल रिसाव के कारण समुद्र की सतह पर भी लपटें फैल गईं, जिससे बड़े पर्यावरणीय संकट का खतरा पैदा हो गया है.

इराक ने दी ईरान को चेतावनी
ईरानी के सरकारी न्यूज एजेंसी ने बताया कि उनकी सेना ने अंडरवॉटर ड्रोन के जरिए इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है. दूसरी ओर, इराक के संयुक्त अभियान कमान के लेफ्टिनेंट जनरल साद मान ने इसे इराकी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है. सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि धमाके के लिए विस्फोटकों से लदी एक ईरानी नाव का भी इस्तेमाल किया गया होगा. हमले के तुरंत बाद, इराक ने एहतियात के तौर पर अपने तेल बंदरगाहों का संचालन रोक दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आने की आशंका है.

ऑयल टैंकर का अमेरिका-ग्रीक कनेक्शन
ईरान के हमले का शिकार हुए जहाजों में से एक सेफसी विष्णु का मालिकाना हक अमेरिका की कंपनी सेफसी ट्रांसपोर्ट इंक के पास है. वहीं, दूसरी जहाज जेफिरोस ग्रीस की एक कंपनी का है. चूंकि एक जहाज अमेरिकी कंपनी का है, इसलिए इस घटना में वाशिंगटन के सीधे हस्तक्षेप की संभावना बढ़ गई है. इराक के तेल मंत्रालय ने इसे तनाव बढ़ाने वाला एक चिंताजनक संकेतक बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए वैश्विक समुदाय से संयम और सुरक्षा की अपील की है.

खतरनाक जंग की आहट?
इराकी मीडिया सेल ने इसे सोची-समझी तोड़फोड़ करार दिया है. वर्तमान में लापता चालक दल के सदस्यों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन जारी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान और इराक के बीच यह समुद्री टकराव और बढ़ा, तो फारस की खाड़ी में वैश्विक व्यापार पूरी तरह ठप हो सकता है. इराक ने साफ कर दिया है कि वह इस हमले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखता है.

 

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