जल गंगा संवर्धन अभियान: जनसहभागिता से बदली गोचा नदी स्टॉप डैम की तस्वीर

May 1, 2026 - 04:44
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जल गंगा संवर्धन अभियान: जनसहभागिता से बदली गोचा नदी स्टॉप डैम की तस्वीर

सफलता की कहानी

जल गंगा संवर्धन अभियान: जनसहभागिता से बदली गोचा नदी स्टॉप डैम की तस्वीर

भोपाल

मध्यप्रदेश में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जल संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी जनआंदोलन के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक चल रहे इस अभियान ने प्रदेशभर में जल संरचनाओं के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन को नई गति दी है। इसी अभियान के अंतर्गत गुना जिले के जनपद पंचायत राघौगढ़ की ग्राम पंचायत मोररवास में जनसहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि सामूहिक प्रयासों से जल संकट जैसी चुनौती का समाधान संभव है।

सूखे स्टॉप डैम में लौटी जीवन की धारा

गोचा नदी पर स्थित स्टॉप डैम में पूर्व में पानी का ठहराव नहीं हो पाता था और वर्षा जल बहकर अन्य स्थानों पर चला जाता था। परिणामस्वरूप ग्रामीणों एवं पशुधन को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था। स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से 50 हजार रुपये की जनसहयोग राशि से बोरी बंधान का कार्य 6 से 11 अप्रैल के बीच पूर्ण किया गया। इस छोटे लेकिन प्रभावी प्रयास से अब स्टॉप डैम में जल ठहराव बढ़ा है और जल संग्रहण की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

श्रमदान से बना जनआंदोलन

इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामवासियों की सक्रिय भागीदारी रही। ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया और जल की प्रत्येक बूंद को सहेजने का संकल्प लिया। जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में यह कार्य सामूहिक रूप से पूर्ण किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में सकारात्मक संदेश प्रसारित हुआ।

मवेशियों एवं वन्य जीवों को मिला सहारा

बोरी बंधान से जल उपलब्धता में वृद्धि हुई है, जिससे अब मवेशियों एवं वन्य जीवों के लिए भी पानी की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित हो सकी है। जो स्थान पहले सूखा रहता था, वह अब जीवनदायी जल स्रोत के रूप में विकसित हो रहा है।

प्रेरणादायक मॉडल

गोचा नदी स्टॉप डैम का यह परिवर्तन ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत जनसहभागिता आधारित कार्यों की प्रभावशीलता को दर्शाता है। यह पहल प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभरी है और यह संदेश देती है कि सामूहिक प्रयास, जनसहयोग एवं सकारात्मक सोच से जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा सकता है।

 

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