केरल बना ‘केरलम’ : केंद्र सरकार ने नाम बदलने के प्रस्ताव को दी मंजूरी

Feb 24, 2026 - 12:14
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केरल बना ‘केरलम’ : केंद्र सरकार ने नाम बदलने के प्रस्ताव को दी मंजूरी

केरल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 'सेवातीर्थ' में हुई मंत्रिमंडल की पहली बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए सूचना और प्रसारण मंत्री अश्चिनी वैष्णव ने पत्रकारों को बताया कि भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के बाद से ही केरल के नाम को बदलने की मांग की जा रही थी।

उन्होंने कहा कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति 'केरल नाम परिवर्तन विधेयक, 2026' के मसौदे को केरल विधानसभा की स्वीकृति के लिए भेजेंगी। इसके बाद संविधान के अनुच्छेद तीन के तहत राष्ट्रपति इस विधेयक पर केरल विधानसभा का मत प्राप्त करेंगी। केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि राज्य विधानसभा की स्वीकृति के बाद केंद्र सरकार इस पर आगे कार्रवाई करेगी और इस विधेयक को संसद में पारित कराने के लिए पेश किया जायेगा।

इससे पहले केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को केरल का नाम केरलम् करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसमें कहा गया था कि मलयालम भाषा में राज्य का नाम केरलम् है। एक नवंबर 1956 को राज्यों का गठन भाषाई आधार पर किया गया था। बता दें कि 1 नवंबर को केरल परिवार दिवस मनाया जाता है। इस प्रस्ताव में कहा गया कि राष्ट्र के स्वाधीनता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषी लोगों के लिए एक एकीकृत राज्य के गठन की मांग थी, लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में हमारे राज्य का नाम केरल अंकित किया गया।

केरल विधानसभा के प्रस्ताव में कहा गया है, " यह सभा केन्द्र सरकार से सर्वसम्मति से आग्रह करती है कि वह संविधान के अनुच्छेद तीन के तहत केरल के नाम को केरलम् करने के लिए तत्काल कदम उठाए।" गौरतलब है कि केरल में इस साल चुनाव भी होने हैं।

इसके बाद केरल सरकार ने केन्द्र सरकार से इस संबंध में कार्रवाई का अनुरोध किया था। इस पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय में विचार किया गया और प्रस्ताव को गृहमंत्री अमित शाह के अनुमोदन के बाद इस पर कैबिनेट के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया। इस प्रस्ताव पर कानून और न्याय मंत्रालय के कानूनी और विधायी विभाग की राय के बाद इसे मंत्रिमंडल के समक्ष लाया गया था।

 

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