केरला फेस्ट सांस्कृतिक एकीकरण का जीवंत उदाहरण- राज्यपाल मंगुभाई पटेल

Nov 14, 2025 - 05:44
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केरला फेस्ट सांस्कृतिक एकीकरण का जीवंत उदाहरण- राज्यपाल  मंगुभाई पटेल

केरला फेस्ट: सांस्कृतिक एकीकरण का शानदार प्रतीक — राज्यपाल मंगुभाई पटेल

मंगुभाई पटेल बोले: केरला फेस्ट भारत की सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण

मलयाली समुदाय का जड़ों से जुड़ाव प्रेरणादायी- विधानसभा अध्यक्ष  तोमर

भोपाल 

राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि “केरला फेस्ट” सांस्कृतिक एकीकरण और भाईचारे की भावना का जीवंत उदाहरण हैं। मनोरंजन और सांस्कृतिक प्रदर्शन के अवसर के साथ ही केरल और मध्यप्रदेश के बीच समरसता का सशक्त सेतु है, जो मध्यप्रदेश को अपनी कर्म भूमि बनाने वाले मलयाली बहनों-भाइयों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव और हमारे देश की विविधता में एकता की भावना का सुंदर प्रतीक है।

राज्यपाल  पटेल केरला फेस्ट सेकण्ड ऐडिशन के शुभारंभ कार्यक्रम में जन समुदाय को  स्थानीय दशहरा मैदान में गुरूवार को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि मलयाली समुदाय का जड़ों से जुड़ाव अपनी भूमि संस्कृति और निष्ठा का आग्रह सभी के लिए प्रेरणादायी और अनुकरणीय है। कार्यक्रम में सचिव जल संसाधन विकास  जॉन किंगस्ली भी मंचासीन थे।

राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि मध्यप्रदेश के विकास में मलयाली समुदाय का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण, प्रेरणादायक और सराहनीय रहा है। मलयाली समुदाय ने प्रशासन और सेवा क्षेत्र में भी अपनी कार्यकुशलता और ईमानदारी से प्रदेश मे विशिष्ट पहचान कायम की है। प्रदेश में डॉक्टर, नर्स और शिक्षक के रूप में अनुशासन, परिश्रम, शिक्षा और सेवा की उत्कृष्ट भावना के साथ असंख्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाया है। सरकारी सेवाओं, बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों में उनकी सक्रिय भूमिका ने राज्य के प्रशासनिक और आर्थिक विकास को नई दिशा दी है। मलयाली समुदाय ने सामाजिक और मानवता की सेवा में भी हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है। प्रदेश के मलयाली समुदाय ने राज्य के विकास में योगदान के साथ ही अपने सांस्कृतिक मूल्यों को सहेज कर राज्य की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया है। समाज के साथ-साथ समग्र मानवता की सेवा के लिए समर्पित भाव से कार्य करने के लिए युनाईटेड मलयाली एसोसिएशन को बधाई दी।

विधानसभा अध्यक्ष  नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि मलयाली समुदाय कर्तव्यनिष्ठ समाज है इसीलिए साक्षरता और स्वच्छता में देश में अग्रणी है। समुदाय ने सेवा, समर्पण, रचनात्मक सृजनशीलता, सांस्कृतिक गतिविधियों और कार्य क्षेत्र में कर्तव्य परायणता से विशिष्ट स्थान बनाया है। उनकी नेक नियति और कार्य संस्कृति ने सभी को प्रभावित किया है। उन्होंने मध्यप्रदेश कॉडर के पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी के द्वारा भोपाल जहाँ नौकरी के लिए आने वाले लोग बस जाते हैं वैसे शहर में बसने के बजाए अपने केरल स्थित छोटे से घर में बसने के निर्णय की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि मलयाली समुदाय का अपनी संस्कृति के प्रति समर्पण का ही प्रमाण केरल से इतनी दूर रहकर भी उन्होंने अपने जीवन मूल्यों और परंपराओं को जीवंत बनाएं रखा है।

मुख्य महाप्रबंधक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया प्रबाश कुमार सुबुदि ने कहा कि गोड्स ओन कन्ट्री के कलर्स और फ्लेवर का प्रतीक केरला फेस्ट है। उन्होंने कहा कि मलयाली समुदाय जहाँ भी जाता है अपने सांस्कृतिक जीवन मूल्यों को लेकर जाता है। वह भारत की विविधता में एकता के सच्चे राजदूत हैं। उन्होंने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया विकास में सहयोग के लिए सामुदायिक प्रगति और सांस्कृतिक सद्भाव को बढ़ाने के हर गतिविधि को सदैव प्रोत्साहित करता है। 

नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक मती सी. सरस्वती ने कहा कि मलयाली समुदाय सांस्कृतिक चेतना, प्राकृतिक सौंदर्य, कला, परंपरा, अनुशासन और सोहार्द्र के लिए प्रसिद्ध है। केरल के वस्त्र, व्यंजन, कलाओं ने भारत की सांस्कृति धरोहर को समृद्ध किया है। समुदाय अपनी जड़ो को किस प्रकार जीवंत रख सकता है केरला फेस्ट का आयोजन उसका प्रमाण है। उन्होंने बताया कि नाबार्ड ने ग्रामीण कौशल, सृजनशीलता को बढ़ाने और स्व-सहायता समूहों के आत्म विश्वास और स्वावलंबन को मजबूत करने के लिए फेस्ट में 10 स्टाँलो को एस.एच.जी के लिए प्रायोजित किया है।

युनाइटेड मलयाली एसोसिएशन के अध्यक्ष ओ.टी. जोसेफ ने स्वागत उद्बोधन में बताया की संस्था चार दशकों से संस्कृति संवर्धन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका के क्षेत्रों में सहयोग के साथ ही मानवता की सेवा प्रयासों, विद्यालयों, आश्रय गृहों की मरम्मत, मोबाइल मर्च्युरी और अंत्येष्टी सहायता भी प्रदान करती है। आभार प्रदर्शन ऐसोसिएशन के उपाध्यक्ष  अनिल कुमार ने किया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में मलयाली समुदाय की महिलाओं ने केरल के लोक नृत्य की प्रस्तुति दी। अतिथियों को केरल के सांस्कृतिक प्रतीक हाथी के मस्तक पर शोभित किए जाने वाले आभूषण नेट्टी-पट्टम स्मृति स्वरूप भेंट किया गया। स्वागत पुष्प गुच्छ से किया गया। अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन से शुभारंभ हुआ।     

 

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