गर्भवती महिलाओं की HIV जांच में मध्यप्रदेश पीछे, केवल 46% हुई स्क्रीनिंग; आमजन की जांच लक्ष्य के करीब

Dec 1, 2025 - 11:44
 0  8
गर्भवती महिलाओं की HIV जांच में मध्यप्रदेश पीछे, केवल 46% हुई स्क्रीनिंग; आमजन की जांच लक्ष्य के करीब

भोपाल 

मध्यप्रदेश में HIV नियंत्रण को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। सामान्य आबादी की HIV जांच रिकॉर्ड तेजी से लक्ष्य के करीब पहुंच रही है, लेकिन गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग लगातार पिछड़ रही है, जो मां से बच्चे में वायरस के संक्रमण रोकने के लक्ष्य को सीधे चुनौती देती है। जबकि ICTC और PPP-ICTC मिलाकर राज्य में हुई HIV जांचों ने इस साल कमाल कर दिया है। अक्टूबर 2025 तक ही 12.23 लाख के लक्ष्य में 12.13 लाख जांच हो चुकी हैं। कई जिलों में आंकड़े लक्ष्य को पार कर चुके हैं। यह दर्शाता है कि आमजन के बीच टेस्टिंग नेटवर्क मजबूत और सक्रिय है। दूसरी ओर, वही अवधि में गर्भवती महिलाओं की HIV जांच जो सबसे संवेदनशील श्रेणी मानी जाती है। 22.85 लाख के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 10.54 लाख तक ही पहुंच पाई। यह आंकड़ा सिर्फ 46% उपलब्धि को दर्शाता है। मतलब आधी महिलाएं अभी भी HIV टेस्ट से बाहर हैं, जबकि यही टेस्ट भविष्य में जन्म लेने वाले बच्चों को HIV के खतरे से बचाता है।

गर्भवती महिलाओं की HIV जांच, 

 2023-24: लक्ष्य 22.25 लाख - उपलब्धि 20.98 लाख

2024-25: लक्ष्य 22.58 लाख - उपलब्धि 18 लाख

 2025-26: (अक्टूबर तक) लक्ष्य 22.85 लाख- उपलब्धि 10.54 लाख

लगातार तीन साल से लक्ष्य अधूरा
यानी तीन साल लगातार MP गर्भवती महिलाओं की HIV जांच का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाया।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह मां से बच्चे में HIV संक्रमण रोकथाम कार्यक्रम (PPTCT) की सबसे कमजोर कड़ी है। कम जांच से घटते संक्रमण के आंकड़ों की असल तस्वीर भी धुंधली

संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या
सन                  संक्रमित की  संख्या
- 2023-24         754
- 2024-25         671
- 2025-26        492 (अक्टूबर तक)


जांच कम होने के प्रमुख कारण 

संक्रमितों की संख्या कम दिख रही है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि जांच कम होगी तो संक्रमण वास्तविकता से कम दिखाई देगा। अधूरी स्क्रीनिंग का मतलब है कि कई महिलाएं और उनके नवजात जोखिम में बने रह सकते हैं। जांच कम होने का मुख्य कारण ग्रामीण इलाकों में समय पर ANC विजिट नहीं हो रही है। ICTC केंद्रों तक पहुंच की दूरी होने के कारण लोग जांच नहीं करवा पाते हैं। जागरूकता की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जांच करने में अभी भी शर्मिंदगी महसूस होती है। कुछ जिलों में ट्रेनिंग की कमी है। सब मिलकर गर्भवती महिलाओं की टेस्टिंग के आंकड़े नीचे खींच रहे हैं।


 मां-बच्चे की सुरक्षा के लिए टेस्टिंग की रफ्तार बढ़ाना जरूरी
जहां आम नागरिकों की HIV जांच में प्रदेश अच्छी प्रगति दिखा रहा है, वहीं गर्भवती महिलाओं की धीमी टेस्टिंग राज्य के स्वास्थ्य मॉडल पर बड़ा सवाल छोड़ती है। यदि गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग पर फोकस तेज़ नहीं किया गया, तो मां से शिशु में संक्रमण रोकने का राष्ट्रीय लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है। 

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0