थलपति विजय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, करूर पीड़ितों को सरकारी नौकरी का फैसला बरकरार

Aug 14, 2026 - 16:44
 0  8
थलपति विजय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, करूर पीड़ितों को सरकारी नौकरी का फैसला बरकरार

चेन्नई 

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडू के मुख्यमंत्री विजय थलापति को बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया गया था जिसमें करुर भगदड़ में मारे गए 41 लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान था. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने तमिलनाडु सरकार और अन्य की याचिका पर नोटिस जारी किया है. साथ ही हाईकोर्ट के आदेश को अंतरिम रूप से स्थगित कर दिया है। 

सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने हाईकोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताई. उन्होंने विजय सरकार के फैसले को चुनौती देने के आधार पर सवाल उठाया। 

सिंघवी ने कहा, ‘अगर राज्य सरकार चाहती है कि भगदड़ पीड़ित लोगों के परिवारीजनों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जाए, तो हाईकोर्ट को इसमें क्या आपत्ति हो सकती है?’

उन्होंने दलील दी कि नौकरी से जुड़े मुद्दे पर जनहित याचिका (PIL) नहीं चलाई जा सकती। 
वहीं बेंच ने भी सवाल किया कि राज्य सरकार को इस त्रासदी से प्रभावित परिवारों को नौकरी देने से क्यों रोका जाना चाहिए? क्या ऐसी कोई वजह है?

जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “भगदड़ हुई, लोग मारे गए. अगर सरकार ने फैसला किया है कि उन्हें कुछ राहत दी जाए और पैसे से मुआवजा दिया जाए, तो आप कैसे कह सकते हैं कि नौकरी नहीं दी जानी चाहिए? मान लीजिए त्रासदी में परिवार का अकेला सदस्य मर गया, तो क्या सरकार को उसके बेटे या बेटी को नौकरी नहीं देनी चाहिए?”

हाईकोर्ट के द्वारा किए गए फैसले को वकील ने राजनीतिक हितों का टकराव बताया. वहीं राज्य की याचिका का विरोध कर रहे एक वकील ने दलील दी कि तमिलनाडु सरकार इस तरह सरकारी नौकरियां बांटने का विवेकाधिकार नहीं ले सकती। 

उन्होंने दावा किया कि जिस राजनीतिक दल पर भगदड़ की जिम्मेदारी बताई जा रही है, वही दल अभी राज्य की सत्ता में है. इसलिए सरकार के फैसले में हितों का टकराव हो सकता है। 

जब बेंच ने वकील से पूछा कि वह किस पार्टी की ओर से पेश हो रहे हैं, तो वकील ने बताया कि वह एक राजनीतिक दल की ओर से यहां सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं। 

तब जस्टिस चंद्रन ने कहा, “यहां राजनीति मत लाइए.”

मद्रास हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के 27 जुलाई के फैसले के बाद आया है. हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस सरकारी आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें करुर स्टांपीड के पीड़ित परिवारों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का प्रावधान था। 

हाईकोर्ट ने कहा था कि ये नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के खिलाफ हैं. जस्टिस सीवी कार्तिकेयन और जस्टिस आर शक्तिवेल की डिवीजन बेंच ने यह भी बताया कि सरकारी विभागों में कई लोग पहले से अनुकंपा नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। 

बेंच ने कहा था कि करुर पीड़ितों के परिवारों को नौकरी देते समय उन लोगों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है जो पहले से इंतजार कर रहे हैं। 

करुर भगदड़ मामला क्या है और कितने लोगों की हुई थी मौत
जानकारी के मुताबिक करूर में भगदड़ 27 सितंबर 2025 को सीएम विजय थलापति की पार्टी टीवीके की रैली के दौरान हुई थी. इसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी. इस त्रासदी के बाद जवाबदेही और भीड़ प्रबंधन की कमियों को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था और विपक्ष सहित लोगों ने इसके लिए विजय थलापति को भी जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया था. हालांकि यह भगदड़ हाल के वर्षों में तमिलनाडु में किसी राजनीतिक कार्यक्रम में हुई सबसे बड़ी दुर्घटनाओं में से एक थी। 

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0