15 या 16 मई? जानें कब है ज्येष्ठ अमावस्या, क्यों मानी जाती है पापों से मुक्ति दिलाने वाली तिथि

May 14, 2026 - 13:14
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15 या 16 मई? जानें कब है ज्येष्ठ अमावस्या, क्यों मानी जाती है पापों से मुक्ति दिलाने वाली तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ महीने की अमावस्या का अपना एक अलग ही महत्व है. साल 2026 में यह पावन तिथि 16 मई, शनिवार के दिन पड़ रही है. वैसे तो अमावस्या की शुरुआत 15 मई की सुबह से ही हो जाएगी और यह 16 मई की दोपहर तक रहेगी, लेकिन उदया तिथि की परंपरा के अनुसार मुख्य पूजा-पाठ 16 मई को ही की जाएगी. यह दिन इसलिए भी खास होगा क्योंकि इसी दिन शनि जयंती और वट सावित्री का व्रत भी मनाया जाएगा, जिससे इस दिन की महिमा और भी बढ़ जायेगी. शास्त्रों में ज्येष्ठ अमावस्या को मन की शुद्धि और पूर्वजों को याद करने (तर्पण) के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है. असल में यह दिन हमें एक मौका देता है कि हम अपनी पुरानी गलतियों को सुधारें, जीवन में नई ऊर्जा का संचार करें और मन की शांति के लिए कुछ नेक संकल्प लें.

स्नान और दान का शुभ मुहूर्त और विधि
ज्येष्ठ अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में स्नान करने की अपना ही महत्व है. इससे शरीर की थकावट के साथ-साथ मन का भारीपन भी दूर हो जाता है. इस साल 16 मई को सूर्योदय के समय नहाना सबसे अच्छा रहेगा. अगर आप शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हैं, तो सुबह 4:05 से 5:20 के बीच का समय सबसे बढ़िया है. नहाने के बाद एक तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल चढ़ाएं और फिर अपनी श्रद्धा के अनुसार अनाज, कपड़े या काले तिल का दान करें. इस बार अमावस्या शनिवार को है, इसलिए शनि मंदिर में तेल चढ़ाना या किसी गरीब को खाना खिलाना बहुत सुकून देगा. दान सिर्फ पुण्य के लिए नहीं, बल्कि अपने अंदर की कड़वाहट को खत्म करके नई ऊर्जा भरने के लिए किया जाता है.

पापों से मुक्ति और पितृ तर्पण का विशेष विधान
ज्येष्ठ अमावस्या असल में खुद को मन से साफ करने और अपनी जड़ों से जुड़ने का दिन है. पुरानी परंपरा है कि पवित्र कुंड या गंगा में डुबकी लगाने से मन पर बोझ और अनजाने में हुई गलतियों का एहसास कम होता है. यह दिन हमारे पूर्वजों (पितरों) को याद करने का है. उनके नाम पर तर्पण करने या उन्हें याद करने से घर में शांति आती है और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद बना रहता है. जब पितर खुश होते हैं, तो घर के आपसी झगड़े भी कम होने लगते हैं और खुशहाली आती है.

अमावस्या के दिन दान और संयम का महत्व
अमावस्या के दिन अपनी इच्छाओं पर थोड़ा काबू रखने और दूसरों की मदद करने से बहुत शांति मिलती है. किसी जरूरतमंद को काले तिल, गरम खाना या कपड़ा दान करने से आपके जीवन की उलझनें कम हो सकती हैं. इस दिन कोशिश करें कि सादा भोजन करें और गुस्से से बचें, क्योंकि जब मन शांत होगा तभी पूजा-पाठ का असली फल मिलेगा. शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक दिया जरूर जलाएं; इससे शनि देव और पितर दोनों की कृपा मिलेगी. संयम और सादगी से बिताया गया यह दिन हमें अंदर से मजबूत बनाएगा और जीवन में संतोष और खुशी भर देगा.

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