संत रामपाल से मिलने हरियाणा पहुंचीं नवजोत कौर, बोलीं- “आप बाहर आए, नहीं तो हमें जेल आना पड़ता”

May 20, 2026 - 12:14
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संत रामपाल से मिलने हरियाणा पहुंचीं नवजोत कौर, बोलीं- “आप बाहर आए, नहीं तो हमें जेल आना पड़ता”

अमृतसर.

पंजाब कांग्रेस की पूर्व प्रदेश प्रधान और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू की सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल से मुलाकात के बाद पंजाब की सियासत में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद रामपाल से लगातार विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की मुलाकातें सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में अब नवजोत कौर सिद्धू भी आश्रम पहुंचीं।

यह मुलाकात उस समय चर्चा में आई जब रामपाल के आधिकारिक सामाजिक माध्यम चैनल ‘स्प्रीचुअल लीडर संत रामपाल जी’ पर दोनों की बातचीत का वीडियो साझा किया गया। करीब दो मिनट चार सेकेंड के इस वीडियो में नवजोत कौर सिद्धू और रामपाल के बीच बातचीत दिखाई गई है। वीडियो में डॉ. नवजोत कौर सिद्धू अपना परिचय देते हुए कहती हैं कि वह पटियाला से आई हैं। वह बाहर आ गए, नहीं तो उन्हें जेल जाकर मिलना पड़ता। लेकिन भगवान ने उनकी सुन ली और उन्हें बाहर बुला लिया।

इस पर रामपाल मुस्कराते हुए कहते हैं कि लोगों की दुआएं उन्हें बाहर ले आईं। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों की सेवा केवल राजनीति से ही नहीं बल्कि धर्मनीति से भी की जा सकती है और समाज को अपनी नीति सुधारने की जरूरत है। मुलाकात के दौरान नवजोत कौर सिद्धू ने कहा कि वह रामपाल से भक्ति लेने आई हैं। इस पर रामपाल ने कहा कि भक्ति और सेवा सबसे ऊपर हैं तथा मनुष्य की सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है।

सेवा करना चाहती हैं नवजोत कौर
नवजोत कौर ने जवाब देते हुए कहा कि वह यही दोनों बातें सीखने आई हैं और बाकी सब चीजें उसके बाद की हैं। बातचीत के दौरान नवजोत कौर ने यह भी कहा कि वह राजनीति से ज्यादा धर्म के माध्यम से देश की सेवा करना चाहती हैं। इस पर रामपाल ने कहा कि पुराने समय में राजा धर्मनीति से शासन करते थे और जनता की सेवा करते थे, लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि जब समाज के प्रभावशाली लोग आश्रम में आते हैं तो उनका मनोबल बढ़ता है।

पहले भी पहुंची थी सतलोक आश्रम
गौरतलब है कि डॉ. नवजोत कौर सिद्धू करीब तीन महीने पहले भी फतेहगढ़ साहिब स्थित सतलोक आश्रम पहुंची थीं। उस दौरान उन्होंने कहा था कि यदि राजनीतिक लोग दूर हो जाएं तो संत समाज ही धरती को संभाल सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि वर्तमान राजनीति में लोग अपनी पहचान भूल चुके हैं।

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