ब्रेस्ट कैंसर इलाज में नई उम्मीद: गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी बना रही हल्दी आधारित ‘नैनो-जैल’

May 9, 2026 - 13:14
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ब्रेस्ट कैंसर इलाज में नई उम्मीद: गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी बना रही हल्दी आधारित ‘नैनो-जैल’

हिसार.

महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर मामलों के बीच गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) में हर्बल आधारित नैनो-जैल पर शोध शुरू किया गया है। फार्मास्युटिकल साइंसिज विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रेखा राव इस शोध के माध्यम से ऐसी जैल विकसित करने पर काम कर रही हैं, जो शुरुआती स्तर पर कैंसर कोशिकाओं की पहचान और लक्षित उपचार में सहायक हो सके।

शोध में गुरुग्राम स्थित डीपीजी यूनिवर्स कालेज की डॉ. वर्षा भी सहयोग कर रही हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार नैनो फार्मूलेशन तकनीक पर आधारित यह जैल प्रभावित हिस्से पर सीधे काम करने के सिद्धांत पर विकसित की जा रही है। इसमें हल्दी के सक्रिय तत्व ‘कुरकुमिन’ जैसे हर्बल घटकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे साइड इफेक्ट कम रहने की संभावना जताई जा रही है। शोध पूरा होने पर इसका पेटेंट कराया जाएगा।

जानें... क्या है नैनो-जैल तकनीक
शोध के तहत विकसित की जा रही जैल नैनो फार्मूलेशन तकनीक पर आधारित होगी। इसका उद्देश्य कैंसर कोशिकाओं को लक्षित कर दवा के प्रभाव को प्रभावित हिस्से तक केंद्रित करना है। शोधकर्ताओं के अनुसार वर्तमान उपचार में दवाओं की अधिक मात्रा और उनके व्यापक प्रभाव से शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ते हैं। नैनो-जैल तकनीक इस चुनौती को कम करने की दिशा में उपयोगी हो सकती है।

हरियाणा में बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर के मामले
हर साल लगभग 8 हजार से 10 हजार नए ब्रेस्ट कैंसर मामले सामने आने का अनुमान है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला और हिसार जैसे शहरी क्षेत्रों में मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञ बदलती जीवनशैली, तनाव, खानपान और जागरूकता की कमी को प्रमुख कारण मानते हैं। चिकित्सकों के अनुसार अधिकांश महिलाएं शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे बीमारी कई बार तीसरे या चौथे चरण में सामने आती है।

साइड इफेक्ट कम करने का प्रयास
इस जैल में हल्दी से प्राप्त ‘कुरकुमिन’ जैसे हर्बल तत्वों का उपयोग किया जाएगा। शोधकर्ताओं का मानना है कि हर्बल बेस होने के कारण इसके दुष्प्रभाव कम हो सकते हैं। जैल को त्वचा पर लगाने योग्य रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि प्रभावित हिस्से पर सीधे उपयोग संभव हो सके।

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