7 महीने से लकवाग्रस्त महिला को एम्स में नई जिंदगी, रीढ़ के रास्ते दी दवा से खुलीं नसें

May 4, 2026 - 04:44
 0  8
7 महीने से लकवाग्रस्त महिला को एम्स में नई जिंदगी, रीढ़ के रास्ते दी दवा से खुलीं नसें

भोपाल
भोपाल एम्स में एक महिला को मानो नया जीवन दिया गया है। ललितपुर (उत्तर प्रदेश) की 65 वर्षीय यह महिला पिछले सात महीनों से न चैन से बैठ पा रही थी और न ही सो पा रही थी। रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण वह 'स्पास्टिक पैराप्लेजिया' जैसी गंभीर स्थिति का शिकार थीं, जिसमें मांसपेशियां अनियंत्रित रूप से जकड़ जाती हैं। वह लकवे जैसी लाचारी और असहनीय पीड़ा जूझ रही थी। ल्बे समय से चल रहे उपचार व दवाओं के हैवी डोज के बावजूद कोई राहत नहीं मिल रही थी, जिससे पूरा परिवार मानसिक रूप से टूट चुका था। ऐसे में एम्स भोपाल दर्द चिकित्सा यूनिट (एनेस्थेसियोलॉजी) और न्यूरोसर्जरी विभाग की टीमें आगे आईं। डॉक्टर्स ने आइटीबी तकनीक अपनाकर महिला की दिक्कत दूर कर दी। इतना ही नहीं, प्राइवेट अस्पतालों में लगनेवाला लाखों का खर्च भी बचा दिया।

वरदान बनी आइटीबी तकनीक
महिला कई माह से परेशान थीं। आखिरकार एम्स भोपाल के दर्द चिकित्सा यूनिट (एनेस्थेसियोलॉजी) और न्यूरोसर्जरी विभाग की संयुक्त टीम ने इस जटिल चुनौती को स्वीकार किया। डॉ. अनुज जैन और डॉ. सुमित राज के नेतृत्व में डॉक्टरों ने 'इंट्राथीकल बैक्लोफेन थेरेपी' (आइटीबी) अपनाने का निर्णय लिया। यह तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान है जिन पर सामान्य दवाएं बेअसर हो जाती हैं। इसमें दवा को सीधे रीढ़ की हड्डी के तरल (सेरेब्रोस्पाइनल क्लुइड) में पहुंचाया जाता है, जिससे कम खुराक में ही अधिकतम लाभ मिलता है और दुष्प्रभाव कम होते हैं।

उपचार की प्रक्रिया में सबसे पहले मरीज को ट्रायल इंजेक्शन दिया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम मिलते ही डॉक्टरों ने त्वचा के नीचे एक छोटा 'प्रोग्रामेबल ड्रग डिलीवरी पंप' प्रत्यारोपित कर दिया। यह डिवाइस निरंतर दवा की नियंत्रित मात्रा शरीर को पहुंचाता रहता है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज अब पूरी तरह दर्दमुक्त है और सामान्य नींद ले पा रही है।

एम्स में महज 7 लाख रुपए में उपचार: कम से कम 3 लाख रुपए बचाए
निजी अस्पतालों में 10 लाख रुपए से अधिक में होने वाला यह उपचार एम्स में मात्र 7 लाख रुपए में संभव हुआ। डॉ. जैन ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा के दौर में किसी भी मरीज को लंबे समय तक दर्द सहने की जरूरत नहीं है। डॉ. सुमित राज ने इसे टीम वर्क की जीत बताया।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0