UP स्कूलों में ‘नो फोन’ नियम, 1 अप्रैल से सख्ती

Mar 29, 2026 - 03:44
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UP स्कूलों में ‘नो फोन’ नियम, 1 अप्रैल से सख्ती

लखनऊ

उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में 1 अप्रैल से शुरू हो रहा नया शैक्षणिक सत्र (2026-27) छात्र-छात्राओं के लिए एक नई सुबह लेकर आ रहा है। अब स्कूलों की प्रार्थना सभा केवल प्रार्थना तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह ज्ञान और सूचना का केंद्र बनेगी। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बढ़ते 'स्क्रीन टाइम' के दुष्परिणामों को देखते हुए छात्रों के लिए समाचार पढ़ना अनिवार्य कर दिया है, जबकि कैंपस में मोबाइल लाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।

प्रार्थना सभा में 'न्यूज बुलेटिन'
माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब छात्र प्रार्थना सभा में प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अखबारों की सुर्खियां पढ़ेंगे। इसका उद्देश्य छात्रों में पढ़ने की आदत (Reading Habit) विकसित करना है।

इस पहल के तहत केवल खबर पढ़ना ही काफी नहीं होगा, बल्कि शिक्षकों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे समाचारों में आए कठिन शब्दों का सही उच्चारण सुनिश्चित कराएं। साथ ही, उन शब्दों का अर्थ और वाक्य प्रयोग भी समझाया जाएगा, जिससे छात्रों की भाषा दक्षता और सामान्य ज्ञान (GK) दोनों में सुधार होगा।

मानसिक स्वास्थ्य की चिंता
परिषद ने किशोरावस्था में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल की लत से बच्चों में आंखों की रोशनी कमजोर होना, एकाग्रता की कमी और ऑनलाइन गेम्स के प्रति बढ़ते रुझान जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं। इन्हीं को देखते हुए स्कूलों में छात्रों के मोबाइल लाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। परिषद का मानना है कि इससे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

तकनीक का सही संतुलन
दिलचस्प बात यह है कि एक ओर जहां मोबाइल पर पाबंदी है, वहीं दूसरी ओर परिषद छात्रों को 'डिजिटल साक्षर' बनाने की ओर भी कदम बढ़ा रहा है। नई व्यवस्था के तहत:

    सभी पंजीकृत विद्यार्थियों की व्यक्तिगत ईमेल आईडी बनाई जाएगी।
    शिक्षण के लिए स्मार्ट क्लास और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ाया जाएगा।
    छात्रों को 'खान एकेडमी', 'द टीचर एप', 'मनोदर्पण' और 'करियर एडवाइजर' जैसे पोर्टल्स के व्यावहारिक उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा का मेल
शिक्षा विभाग की यह पहल पारंपरिक पुस्तकों-अखबारों के प्रति जुड़ाव और आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बीच एक बेहतर संतुलन बनाने की कोशिश है। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के पहले जारी आदेशों को अब जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।

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