हरियाणा के फरीदाबाद में नहीं लगी रोक, बीते साल 32 हजार 60 लोगों को कुत्ते-बिल्लियों ने काटा
फरीदाबाद.
शहर के कुत्ते कटकने होते जा रहे है। इस पर न तो नगर निगम अंकुश लगा पा रहा है और न ही पशुपालन विभाग। आलम यह है कि फरीदाबाद के बीके अस्पताल में हर रोज 70 से 80 मामले कुत्ते या बंदरों के काटने के सामने आ रहे है। इतना ही नहीं हर महिने करीब 5 से 6 लोगों को बिल्लियां भी काटकर जख्मी कर रही हैं। लेकिन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से एंटी रैबीज इंजेक्शन की डोज तक कम पड़ जाती हैं।
इसे देखते हुए इस बार विभाग ने छह महीने का एडवांस स्टॉक बीके अस्पताल में जमा कर दिया है। जबकि पहले मरीजों को बाजार में निजी मेडिकल सेंटरों से जाकर 350 से 380 रुपए का इंजेक्शन की एक डोज लगवानी पड़ रही थी। अस्पताल में दवा उपलब्ध होने से मरीजों को कुछ राहत जरूर मिली है। लेकिन आंकडे बताते हैं कि कुत्तों, बिल्ली और बंदरों के काटने के सर्वाधिक हमले बच्चों और बुर्जुगों पर ज्यादा हुए हैं।
बीते साल 32 हजार 60 लोगों को काटने के मामले सामने आ चुके हैं। साल के अप्रैल माह में सर्वाधिक 2680 लोग कुत्तों के हमले से जख्मी हुए हैं। जो अपने आप में ही चौंकाने वाला आंकडा है । जबकि यह आंकड़ा वर्ष 2019 में 22022 या था। ऐसे में जीत सालों से यह आकड़ा 10 हजार 48 ज्यादा है। यह बडी विकट स्थिति। हैं कि साल दर साल कुते काटने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। बीते साल में चार महीने तो ऐसे रहे जब मरीजों को बीके अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन ही नहीं मिले। इसमें फरवरी, मार्च, जून, जुलाई। लेकिन इस स्थिति से बचने के लिए इस बार स्वास्थ्य विभाग ने एडवांस में ही छह माह का एंटी रैबीज इंजेक्शनकी डोज उपलब्ध रखी है। कुत्तों के काटने के मामलों में 32 हजार 60 मरीजों में ऐसे मरीज भी शामिल हैं जिन्हें कुत्तों के अलावा बंदरों और बिल्ली ने भी काटा है। यानि फरीदाबाद में औसतन हर साल कुत्तों के काटने के 26 हजार अधिक मामले सामने आ रहे हैं। जवकि यह आंकडा वर्ष 2019 में 22 हजार 22 रहा था। साल दर साल यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद नगर निगम कुत्तों को पकड़ने और पशुपालन विभाग कुत्तों की नसबंदी करने के प्रति कोई पुरुता कदम नहीं उठा रहा है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने दावे किए थे कि कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाए जाएंगे और शहर में कुत्ता पकड़ने का अभियान तेज किया जाएगा। लेकिन यह सब खानापूर्ति में ही सिमट कर रह गया है। शुरूआती कुछ हफ्तों में शहर में कुत्ता पकड़कर नसबंदी एवं शेल्टर होम भेजने की कार्रवाई की गई। लेकिन अब यह पूरी तह से बंद है।
स्वास्थ्य विभाग के चीफ फॉर्मासिस्ट शैलेन्द्र की माने तो वर्ष 2025 में जनवरी में 2235, फरवरी में 2553 में, मार्च में 2372, अप्रैल में 2680, मई में 2586, जून में 2373, जुलाई में 2603, अगस्त में 2469, सितम्बर में 2511, अक्टूबर में 2386, नवम्बर 2300 और दिसम्बर में 2620 लोगों कुत्तों के शिकार हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग की माने तो इतने ही मामले निजी अस्पतालों में भी पहुंचने हैं। ऐसे में निजी अस्पतालों के आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो कुत्ता काटने के करीब 60 हजार से अधिक मामले फरीदाबाद शहर में आ रहे हैं। जो चौंकाने वाली संख्या है।
क्या कहते हैं शहर के जाने माने फिजीशियन
वीके अस्पताल के फिजीशियन डॉ. मोहित अग्रवाल व योगेश गुप्ता की माने तो कुत्ता काटने के रोगी को पानी से डर लगता है इसे हाईड्रोफोबिया हो जाता है। कुते के काटने पर उसका लार खून में मिल जाता है और यह धीरे धीरे मस्तिष्क में पहुंच जाता है। इसका डोज 0.3.7-14-30 के हिसाब से दिया जाता है। कुतों ये होने वाले रैबीज गैंग के जहर का असर मस्तिष्क पर पड़ता है। चिकित्सकों के अनुसार जब किसी की कोई भी कुत्ता काट लें तो उसके 24 घंटे के बाद एआरबी का इंजेक्शन लगवा लेना जरूरी होता है। चिकित्सकों की माने तो सर्दियों में कुर्ती, बंदर और बिल्ली के काटने के मामले बढ़ जाते हैं।
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