'अवैध कब्जों पर कमेटी नहीं, कार्रवाई बताइए', हाईकोर्ट ने जज की जमीन पर कब्जे का लिया स्वत: संज्ञान

Feb 25, 2026 - 12:14
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'अवैध कब्जों पर कमेटी नहीं, कार्रवाई बताइए', हाईकोर्ट ने जज की जमीन पर कब्जे का लिया स्वत: संज्ञान

रांची.

झारखंड में जमीन पर अवैध कब्जा और फर्जी खरीद-बिक्री के मामलों पर अदालत का रुख और कड़ा हो गया है। झारखंड हाई कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से साफ शब्दों में कहा कि “कमेटी पर कमेटी बनाने का कोई औचित्य नहीं, जमीन पर ठोस कार्रवाई दिखनी चाहिए।”

अदालत ने मुख्य सचिव से स्पष्ट जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी। सीएनटी लागू होने के बाद भी भूमाफिया पर कार्रवाई नहीं होने से कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की।

SOP बनी नहीं, समीक्षा किस बात की?
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की पीठ ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि जब अवैध कब्जे रोकने के लिए एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) अभी तक बनी ही नहीं, तो उसकी समीक्षा के लिए नई कमेटी बनाने का क्या मतलब है? पूर्व में गठित पांच सदस्यीय कमेटी ने नए कानून की जरूरत से इनकार करते हुए कहा था कि राज्य में पहले से ही सीएनटी और एसपीटी एक्ट लागू हैं। जरूरत सख्त अमल और स्पष्ट एसओपी की है। बावजूद इसके सरकार की ओर से एक और कमेटी गठित करने की बात अदालत को रास नहीं आई।

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की जमीन पर कब्जे की कोशिश
मामला तब और गंभीर हो गया जब सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस इकबाल की जमीन पर कब्जे की कोशिश सामने आई। इसके बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर सरकार से जवाब तलब किया। न्याय मित्र अतनु बनर्जी ने अदालत में पक्ष रखा और राज्य में दखल-दिहानी, फर्जी रजिस्ट्री व अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई।

RIMS जमीन बिक्री कांड: ACB के नोटिस से मची खलबली
इधर, रांची में बहुचर्चित RIMS जमीन बिक्री मामले में जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बड़गाईं अंचल के वर्तमान व तत्कालीन सीओ, अंचल कर्मियों, स्थानीय अमीन, राजस्व कर्मचारियों और कथित जमीन दलालों को नोटिस भेजा है। सभी से पूछताछ की तैयारी है। जांच में प्रारंभिक तौर पर सामने आया है कि वर्ष 1993 के बाद से अधिग्रहित जमीन पर अवैध कब्जे और गलत रजिस्ट्री के प्रमाण मिले हैं। रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बावजूद दाखिल-खारिज और निबंधन किए जाने में लापरवाही व संभावित मिलीभगत की बात जांच में उभरकर आई है। गौरतलब है कि यह जांच हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई थी।

क्या होगा आगे?

  1. मुख्य सचिव से कोर्ट में विस्तृत जवाब
  2. एसओपी पर स्पष्ट टाइमलाइन
  3. ACB की पूछताछ के बाद संभावित एफआईआर/चार्जशीट
  4. अवैध रजिस्ट्री रद्द करने और कब्जा हटाने की कार्रवाई

झारखंड में जमीन से जुड़े घोटालों और अवैध कब्जों पर अब कानूनी शिकंजा कसता दिख रहा है। अदालत के सख्त तेवर और एसीबी की सक्रियता से आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे संभव हैं।

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