ओडिशा में ‘कंगारू कोर्ट’ का कहर: बकरी चोरी के शक में 9वीं के छात्र की पीट-पीटकर हत्या

Mar 3, 2026 - 13:44
 0  7
ओडिशा में ‘कंगारू कोर्ट’ का कहर: बकरी चोरी के शक में 9वीं के छात्र की पीट-पीटकर हत्या

अनुगुल

ओडिशा में ‘कंगारू कोर्ट’ का बढ़ता चलन अब सीधे मासूमों की जान लेने लगा है। ताजा और दर्दनाक मामला मयूरभंज जिले से सामने आया है, जहां कंगारू कोर्ट की कथित सुनवाई के बाद भीड़ ने कक्षा नौ के छात्र को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया।

घटना इंदकोली गांव, थाना तिरिंग थाना क्षेत्र की है। मृतक 15 वर्षीय रायरांगपुर ग्रामीण थाना क्षेत्र का निवासी था।
बकरी चोरी के शक में ‘फैसला’ और फिर भीड़ का कहर:

बताया गया कि मृतक नाबालिग इन दिनों बसिंगी गांव में अपने चाचा के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था। वह बसिंगी सरकारी हाई स्कूल में कक्षा नौ का छात्र था। सोमवार दोपहर इंदकोली गांव में कथित बकरी चोरी के आरोप में स्थानीय लोगों ने दो नाबालिगों को पकड़ लिया और गांव में ही अनौपचारिक ‘अदालत’ लगा दी।

ग्रामीणों ने स्वयं ही ‘जांच’ और ‘सुनवाई’ कर डाली। इसके बाद भीड़ ने दोनों नाबालिगों की बेरहमी से पिटाई कर दी। इतना ही नहीं, गुस्साई भीड़ ने उसकी साइकिल को भी आग के हवाले कर दिया।
अस्पताल में तोड़ा दम:

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को भीड़ से बचाकर पहले स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। बाद में उन्हें रायरांगपुर उप जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान संबित ने दम तोड़ दिया।

दूसरे किशोर की हालत गंभीर बनी हुई है। उसे बेहतर इलाज के लिए पंडित रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, बारीपदा रेफर किया गया है।

11 गिरफ्तार, और धरपकड़ संभव:

पीड़ित के पिता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर अब तक 11 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और अन्य संलिप्त लोगों की पहचान की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

सवालों के घेरे में कानून-व्यवस्था:

राज्य के विभिन्न हिस्सों में कंगारू अदालतों के नाम पर हो रही ऐसी घटनाएं कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। चोरी के महज शक में एक स्कूली छात्र की जान चली जाना इस बात का संकेत है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी जागरूकता और पुलिस की सक्रियता दोनों पर और काम किए जाने की जरूरत है।
क्या होती है ‘कंगारू अदालत’?

‘कंगारू अदालत’ (Kangaroo Court) उस अवैध और अनौपचारिक न्याय प्रणाली को कहा जाता है, जिसमें कुछ लोग बिना किसी कानूनी अधिकार के स्वयं ही अदालत बन बैठते हैं, आरोप तय करते हैं और सजा सुना देते हैं। इसमें न तो निष्पक्ष जांच होती है, न आरोपी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिलता है और न ही कानून की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है।

ऐसी ‘अदालतें’ भारतीय कानून में पूरी तरह अवैध हैं। किसी भी अपराध की जांच और सजा देने का अधिकार केवल विधिवत स्थापित न्यायालयों को है। ग्रामीण क्षेत्रों में कभी-कभी सामाजिक दबाव या अफवाहों के आधार पर इस तरह की भीड़तंत्र वाली व्यवस्था खड़ी हो जाती है, जो कई बार हिंसा और जानलेवा घटनाओं में बदल जाती है।

 

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0