जनप्रतिनिधि जल संरक्षण में दें योगदान ताकि कोरिया को मिले नई पहचान – कलेक्टर चंदन त्रिपाठी

Mar 14, 2026 - 11:44
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जनप्रतिनिधि जल संरक्षण में दें योगदान ताकि कोरिया को मिले नई पहचान – कलेक्टर  चंदन त्रिपाठी

जनप्रतिनिधि जल संरक्षण में दें योगदान ताकि कोरिया को मिले नई पहचान – कलेक्टर  चंदन त्रिपाठी

पानी के एक-एक बूंद को संरक्षित किया जाए-सीईओ डॉ आशुतोष चतुर्वेदी

जनभागीदारी से जलसंचय पर केंद्रीय भूमिजल बोर्ड की कार्यशाला सम्पन्न

कोरिया
कोरिया जिले में जल संरक्षण के अभियान को जनआंदोलन का रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। जिला पंचायत कोरिया के मंथन कक्ष में कलेक्टर चंदन त्रिपाठी की उपस्थिति में जनभागीदारी से जलसंचय अभियान पर एक कार्यशाला आयोजित की गई।

वैज्ञानिकों ने बताया जल संरक्षण का महत्व
कार्यशाला में केंद्रीय भूमिजल बोर्ड से आए वैज्ञानिकों ने जिले के जनप्रतिनिधियों को जल संरक्षण के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी और सरल संरचनाओं के माध्यम से जल संचय को बढ़ाने के उपाय बताए। कार्यशाला में केंद्रीय भूमिजल बोर्ड के तकनीकी विशेषज्ञों ने बताया कि जल संरक्षण के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य रिचार्ज जोन की पहचान करना है। उन्होंने बताया कि जमीन के भीतर चट्टानों के बीच बने गैप में पानी का संग्रह आसानी से किया जा सकता है, जिससे भूजल स्तर को तेजी से बढ़ाया जा सकता है।

कोरिया जिले में जल संचय की असीम संभावनाएं
केंद्रीय भूमिजल बोर्ड की विशेषज्ञ महिमा अवस्थी और शिप्रा ने बताया कि कोरिया जिले का अधिकांश क्षेत्र रिचार्ज जोन में आता है। जिले की लगभग सभी ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण की संरचनाएं बनाकर भूजल संसाधनों को मजबूत किया जा सकता है। इस अभियान के सफल होने से जिले के साथ-साथ पूरे प्रदेश को भी लाभ मिलेगा।

जनप्रतिनिधियों को निभानी होगी जिम्मेदारी
कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने कहा कि जल संरक्षण को तेजी से आगे बढ़ाकर जन आंदोलन बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते जल संरक्षण के लिए प्रयास नहीं किए गए तो आने वाला भविष्य चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों को इस अभियान में नेतृत्व की भूमिका निभाने की अपील की।

पानी के एक-एक बूंद को संरक्षित किया जाए
जिला पंचायत कोरिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा आज पानी की किल्लत एक वैश्विक समस्या बन रही है। ऐसे में हम सबकी जिम्मेदारी है कि पानी के एक-एक बूंद को संरक्षित किया जाए। बारिश की पानी को बेवजह बहने की बजाय धरती के अंदर समाहित की जाए ताकि भूजल स्तर बढ़ सके।

कैसे होता है भूमिगत जल रिचार्ज
वैज्ञानिकों ने बताया कि जमीन के नीचे चट्टानों की परतों के आधार पर रिचार्ज और डिस्चार्ज जोन बनते हैं। जहां पानी जमीन के अंदर समा जाता है उसे रिचार्ज जोन कहा जाता है, जबकि जहां पानी बाहर निकल जाता है उसे डिस्चार्ज जोन कहा जाता है।

जनप्रतिनिधियों ने जताई प्रतिबद्धता
कार्यशाला में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री मोहित पैकरा, उपाध्यक्ष श्रीमती वंदना राजवाड़े, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नविता शिवहरे, शिवपुर अध्यक्ष श्री अरुण जायसवाल, पटना नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गायत्री सिंह सहित कई जनप्रतिनिधियों ने जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में एसडीएम बैकुंठपुर सहित जल संसाधन, कृषि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अधिकारी तथा राजस्व विभाग के मैदानी कर्मचारी शामिल हुए।

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