ईरान युद्ध पर राजनाथ सिंह की चेतावनी: मिडल ईस्ट की स्थिति सामान्य नहीं, दुनिया पर पड़ सकता है बड़ा असर

Mar 6, 2026 - 16:14
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ईरान युद्ध पर राजनाथ सिंह की चेतावनी: मिडल ईस्ट की स्थिति सामान्य नहीं, दुनिया पर पड़ सकता है बड़ा असर

नई दिल्ली   
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे अत्यधिक असामान्य करार दिया है। कोलकाता में आयोजित 'सागर संकल्प' (Sagar Sankalp) मैरीटाइम कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि इस तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा और व्यापार सप्लाई चेन पूरी तरह से बाधित हो रही है।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए 'होर्मुज' का महत्व
रक्षा मंत्री ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz और फारस की खाड़ी का जिक्र करते हुए कहा, "यह क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। जब यहाँ हलचल होती है, तो इसका सीधा असर तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ता है। वर्तमान में हम न केवल ऊर्जा, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी सप्लाई चेन के टूटने के गवाह बन रहे हैं, जिसका सीधा प्रहार वैश्विक अर्थव्यवस्था पर हो रहा है।"

असामान्यता ही अब नया सामान्य है
बदलते भू-राजनीतिक परिवेश पर बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि विभिन्न देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, "राष्ट्र आज जमीन, हवा, पानी और यहाँ तक कि अंतरिक्ष में भी एक-दूसरे से टकरा रहे हैं। यह एक चिंताजनक स्थिति है, और सबसे ज्यादा डराने वाली बात यह है कि यह असामान्यता अब 'न्यू नॉर्मल' (New Normal) बनती जा रही है।"
 
'आत्मनिर्भरता' ही एकमात्र समाधान

अनिश्चितता के इस दौर से निपटने के लिए रक्षा मंत्री ने 'आत्मनिर्भरता' पर जोर दिया। उन्होंने कहा:
    सप्लाई चेन की बाधाओं से बचने का एकमात्र तरीका खुद पर निर्भर होना है।
    रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (DPSUs) हमारी इस दृष्टि के प्रमुख स्तंभ हैं।
    एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र होने के नाते, भारत की जिम्मेदारी है कि वह आत्मविश्वास और स्पष्ट दृष्टि के साथ नेतृत्व प्रदान करे।

2047 के लिए बड़ा लक्ष्य
शिपबिल्डिंग (जहाज निर्माण) क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्री ने उद्योग जगत को स्पष्ट लक्ष्य दिए:

    2030 तक: भारत दुनिया के टॉप-10 जहाज निर्माण देशों में शामिल हो।
    2047 तक: भारत को टॉप-5 देशों की सूची में पहुंचाना।

उन्होंने कहा कि यह सपना बड़ा जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। इसके लिए सरकार, उद्योग और कार्यबल को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।

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