द्वारका एक्सप्रेसवे पर बढ़ी लापरवाही, छह महीने में 63 हजार से ज्यादा चालान

Jul 18, 2026 - 10:14
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द्वारका एक्सप्रेसवे पर बढ़ी लापरवाही, छह महीने में 63 हजार से ज्यादा चालान

गुरुग्राम
 द्वारका एक्सप्रेसवे पर हर दिन मौत सरपट दौड़ रही है। शुक्रवार दोपहर सेक्टर 37 में एवीएल सोसाइटी के पास सरिया लदे टेंपो से कार की टक्कर में एक कैब चालक की मौत हो गई। यह हादसा भी उसी लापरवाही की कड़ी है, जो एक्सप्रेसवे पर रोज दिख रही है।

द्वारका एक्सप्रेसवे 100-120 किलोमीटर की स्पीड के लिए बना है, लेकिन यहां नियमों को ताक पर रखकर ऐसे वाहन भी दौड़ रहे हैं, जो इस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंधित हैं। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़े चौंकाने वाले हैं।

इस साल के पहले छह महीनों में ही द्वारका एक्सप्रेसवे पर 63 हजार 400 वाहन चालकों ने नो एंट्री का नियम तोड़ा। प्रतिबंध के बाद भी मेन कैरेजवे पर धड़ल्ले से वाहन चालक अपने वाहन दौड़ा रहे हैं। नियम के अनुसार एक्सप्रेसवे के मेन कैरेजवे पर ई-रिक्शा, दो पहिया और तीन पहिया वाहनों का चलना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

लेकिन हकीकत कुछ और है। रोज सुबह से रात तक यहां ई-रिक्शा सवारी भरकर चलते दिख जाएंगे। बाइक सवार शार्टकट के चक्कर में हाईस्पीड लेन में घुस जाते हैं। आटो वाले पैसेंजर उतारने के लिए अचानक ब्रेक लगा देते हैं। सरिया, सीमेंट और मलबा लदे ओवरलोड टेंपो बिना रिफ्लेक्टर के चलते हैं।

ट्रैफिक विशेषज्ञों का कहना है कि जब 100 की स्पीड से आ रही कार के सामने अचानक 20 की स्पीड वाला ई-रिक्शा आ जाए तो टक्कर तय है। लेन बदलते समय इंडिकेटर न देना, ओवरटेक के चक्कर में गलत साइड लेना और मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाना अब आम हो गया है।

अब सिर्फ चालान नहीं, एफआइआर भी
एसीपी ट्रैफिक हाईवे व हेडक्वार्टर सत्यपाल यादव ने कहा कि एक्सप्रेसवे पर हादसे लगातार बढ़ रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह चालकों की लापरवाही है। हमारी टीम लगातार प्रतिबंधित वाहनों को नीचे उतार रही है। कैमरों और मैनुअल चेकिंग से रोजाना सैकड़ों चालान किए जा रहे हैं।

लेकिन लोग मान नहीं रहे। उन्होंने कहा कि अब पुलिस की रणनीति बदलेगी। जो वाहन दूसरे वाहन चालकों के लिए जानलेवा खतरा बन रहे हैं, उन्हें चिह्नित किया जाएगा। उनके खिलाफ सिर्फ चालान नहीं, सीधे एफआइआर दर्ज कराई जाएगी, ताकि लोग सबक लें और नियमों का पालन करें

सवाल सिस्टम का भी
द्वारका एक्सप्रेसवे पर ही 63 हजार चालान सिर्फ छह महीने में हुए हैं। ये भी कैमरों के माध्यम से किए गए। इसके अलावा भी हजारों चालान मैनुअल तरीके से किए गए हैं। इसका मतलब हर दिन 350 से ज्यादा लोग नियम तोड़ रहे हैं। क्या सिर्फ चालान से काम चलेगा।

एक्सप्रेसवे पर एंट्री प्वाइंट पर सख्त बैरियर, पुलिस की मौजूदगी, जागरूकता अभियान और कड़ी सजा जरूरी है। वरना हर हादसे के बाद हम सिर्फ शोक मनाते रहेंगे और फाइल में लापरवाही से मौत लिखकर केस बंद कर देंगे।

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