अमृतसर के तरणजीत संधू बने दिल्ली के उप-राज्यपाल, अमेरिका-श्रीलंका में भारत के राजदूत रहे
अमृतसर
तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उप राज्यपाल (LG) नियुक्त किया गया है। संधू वो शख्स हैं, जिनके काम को अमेरिका में बेहद सराहा गया। वो एक बार पंजाब के अमृतसर से चुनाव भी लड़ चुके हैं। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, उनका करियर बेहद शानदार रहा है। वे एक बेहद पढ़े लिखे परिवार से ताल्लुक रखते हैं। आइए आपको बताते हैं कि आखिर दिल्ली के नए उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू हैं कौन?
दादा रह चुके हैं SGPC के संस्थापक सदस्य
तरनजीत सिंह संधू के पिता तेजा सिंह समुंदरी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) के संस्थापक सदस्य रह चुके हैं। समुंदरी कांग्रेस नेता भी रहे। तरणनजीत सिंह संधू 1988 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं। उन्होंने साल 2024 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। उन्होंने अमेरिका और भारत के रिश्तों को सुधारने में बेहद अहम रोल निभाया। तरनजीत सिंह संधू का जन्म 23 जनवरी, 1963 को हुआ था।
लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं
नव नियुक्त उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू की पत्नी रीनत संधू भी भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी रह चुकी हैं। तरणजीत सिंह संधू 2024 में अमृतसर सीट से लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं। फरवरी 2024 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया था और भाजपा में शामिल हुए थे।
नवनियुक्त उपराज्यपाल संधू ने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत यूक्रेन में भारतीय दूतावास खोलने और वहां राजनीतिक एवं प्रशासनिक विंग के प्रमुख के रूप में की। तरणजीत सिंह संधू वाशिंगटन डीसी में प्रथम सचिव, फ्रैंकफर्ट में महावाणिज्य दूत, वाशिंगटन में उप मुख्य दूतावास अधिकारी और विदेश मंत्रालय में विभिन्न महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
पंजाब के अमृतसर में हुआ जन्म
श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त के रूप में भी उन्होंने सेवाएं दीं। उन्होंने अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी बेहतर संबंध बनाने में अहम भूमिका निभाई है। जानकारी के मुताबिक, तरणजीत सिंह संधू ने फरवरी 2020 में अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में कार्यभार संभाला और जनवरी 2024 तक इस पद पर रहे थे। सेवानिवृत्ति के बाद वे भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदार फोरम में बोर्ड के सलाहकार और इसके भू-राजनीतिक संस्थान के अध्यक्ष के रूप में भी जुड़े थे।
बता दें कि तरणजीत सिंह संधू का जन्म पंजाब के अमृतसर में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई अमृतसर से पूरी की। बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में स्नातक किया। इसके बाद वे भारतीय विदेश सेवा (IFS) में शामिल हुए। संधू 1988 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी हैं। अपने लंबे कूटनीतिक करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
कई प्रदेशों के राज्यपालों की नियुक्तियां कीं
दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में संधू की भूमिका प्रशासनिक समन्वय, कानून-व्यवस्था की निगरानी और केंद्र व दिल्ली सरकार के बीच तालमेल बनाए रखने की होगी। उनके अनुभव को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि वे प्रशासनिक कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार रात को कई प्रदेशों के राज्यपालों की नियुक्तियां कीं, जिसके तहत दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है।
सक्सेना ने कविंदर गुप्ता की जगह ली है, जिन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है। बयान में कहा गया है कि विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी तरणजीत सिंह संधू को दिल्ली का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली समेत नौ प्रदेशों में राज्यपाल व उपराज्यपाल को बदला गया है। यह नियुक्ति शपथ ग्रहण के दिन से प्रभावी होगी।
वहीं तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया। रवि ने सीवी आनंद बोस का स्थान लिया है, जिन्होंने दिन में इस्तीफा दे दिया था। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति मुर्मू ने बोस का पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद से इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। बयान के मुताबिक, केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल को तेलंगाना का राज्यपाल बनाया गया है। लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं, तेलंगाना के वर्तमान राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। बयान में कहा गया है कि (भाजपा के) वरिष्ठ नेता नंद किशोर यादव को नगालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
भारत-अमेरिका के संबंध सुधारने में भूमिका
संधू तीन बार अमेरिका में राजनयिक के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। भारत ने जब 90 के दौर में पोखरण परीक्षण किया था, तब संधू एक जूनियर राजनयिक थे। हालांकि, बाद में वह मिशन के उप प्रमुख हो गए थे। संधू ही वो शख्स हैं, जिन्हें भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को मजबूत करने का श्रेय जाता है। दरअसल, 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण के दौरान दोनों देशों के संबंध बेहद खराब हो गए थे। जिसे ठीक करने में संधू ने अहम रोल निभाया। अमेरिकी की राजनीति में चाहे रिपब्लिकन हों या फिर डेमोक्रेट। दोनों ही पार्टियां संधू के काम की कायल हैं।
माता और पिता दोनों ही बेहद पढ़े-लिखे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिका दौरा और अमेरिकी राष्ट्र जो बाइडेन के भारत दौरे पर संधू ने बेहद अहम भूमिका निभाई। संधू के पिता बिशन सिंह समुंदरी गुरु नानक विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति थे। उनकी मां जगजीत कौर संधू ने अमेरिका में डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी की और लौटने पर अमृतसर के सरकारी महिला कॉलेज में प्रिंसिपल के तौर पर ज्वाइन किया।
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