पहलगाम हमले के बाद 'पाकिस्तान जिंदाबाद' पोस्ट करने वाले को जमानत, हाईकोर्ट ने लगाई सख्त शर्त

Feb 27, 2026 - 15:44
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पहलगाम हमले के बाद 'पाकिस्तान जिंदाबाद' पोस्ट करने वाले को जमानत, हाईकोर्ट ने लगाई सख्त शर्त

प्रयागराज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद इंस्टाग्राम पर कथित रूप से ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार युवक फैजान को जमानत दे दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने फैजान बनाम स्टेट ऑफ यूपी मामले में पारित किया। पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट को लेकर पुलिस ने कार्रवाई की थी।

एटा से फैजान की हुई थी गिरफ्तारी
फैजान को मई 2025 में एटा जिले के जलेसर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया, जिनमें धारा 152 भी शामिल थी। यह धारा पूर्व में भारतीय दंड संहिता में राजद्रोह से जुड़े प्रावधान का स्थान लेती है। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी का सोशल मीडिया पोस्ट देश की संप्रभुता और प्रतिष्ठा के खिलाफ था और इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता था।

देश के खिलाफ नहीं सोशल मीडिया पोस्ट
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता एनआई जाफरी ने तर्क दिया कि आरोपी द्वारा की गई पोस्ट भले ही आपत्तिजनक प्रतीत हो, लेकिन उसमें भारत के खिलाफ कोई अपमानजनक, अवमाननापूर्ण या विद्रोह भड़काने वाला कथन नहीं था। उन्होंने कहा कि केवल किसी दुश्मन देश के समर्थन का उल्लेख करना स्वतः धारा 152 के तहत अपराध नहीं बनता। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि अधिकतम यह मामला धारा 196 बीएनएस के तहत आ सकता है, जिसकी सुनवाई मजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है और जिसमें तीन से पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।

कई शर्तों के साथ आरोपी को जमानत
राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध किया गया। हालांकि अदालत ने अपराध की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्यों, आरोपी की कथित संलिप्तता, जेलों में भीड़भाड़ और निचली अदालतों में लंबित मामलों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए आरोपी को जमानत देने का निर्णय लिया। अदालत ने कड़ी शर्तें लगाते हुए कहा कि आरोपी सोशल मीडिया पर कोई भी ऐसा पोस्ट अपलोड नहीं करेगा जो देश की प्रतिष्ठा या किसी समुदाय के खिलाफ हो।

साथ ही वह मामले के गवाहों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा और मुकदमे की कार्यवाही में पूरा सहयोग करेगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया गया तो उसकी जमानत को निरस्त भी जा सकता है।

 

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