नई शिक्षा नीति 2020 से बदली देश की शिक्षा प्रणाली, बोले धर्मेंद्र प्रधान

Mar 2, 2026 - 15:44
 0  7
नई शिक्षा नीति 2020 से बदली देश की शिक्षा प्रणाली, बोले धर्मेंद्र प्रधान

नई दिल्ली
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि वर्ष 2047 तक, जब देश आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। इसके लिए शिक्षा सबसे बड़ा हथियार है। उनका कहना था कि भारत की ताकत उसकी युवा आबादी है। बड़ी संख्या में युवा पढ़ रहे हैं, नए विचार ला रहे हैं और नई तकनीक पर काम कर रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान नई दिल्ली में आयोजित स्टडी इन इंडिया एजु-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026 में बोल रहे थे। यहां उन्होंने 50 से अधिक देशों के राजनयिकों को संबोधित किया। यहां बताया गया कि सरकार चाहती है कि दुनिया के बड़े विश्वविद्यालय भारत में अपने परिसर खोलें। इसके लिए नियम बनाए गए हैं ताकि प्रक्रिया साफ और समय पर पूरी हो। गौरतलब है कि अगर विदेशी संस्थान भारत आएंगे तो भारतीय छात्रों को बाहर जाए बिना ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई करने के अवसर मिल सकेंगे। नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में यह बड़ा शिक्षा सम्मेलन हुआ। इसमें 50 से ज्यादा देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और अलग-अलग देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुलकर भारत की शिक्षा व्यवस्था और उसके भविष्य के बारे में बात की।
शिक्षा मंत्री ने विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों से भारत की तेजी से विकसित हो रही, नवाचार-आधारित शिक्षा प्रणाली के साथ सहयोग करने का आह्वान किया। इस कार्यक्रम का मकसद दुनिया को यह बताना था कि भारत अब सिर्फ पढ़ाई करने की जगह नहीं, बल्कि एक बड़ा शैक्षणिक केंद्र बन रहा है। भारत चाहता है कि न केवल विदेशी संस्थान बल्कि दूसरे देशों के छात्र भी यहां आएं, पढ़ें, शोध करें और मिलकर आगे बढ़ें। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 आने के बाद देश की पढ़ाई का ढंग बदल गया है। अब छात्रों को केवल किसी एक विषय तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है। छात्र एक साथ अलग-अलग विषय पढ़ सकते हैं। वहीं युवाओं के कौशल पर भी जोर दिया जा रहा है, यानी पढ़ाई ऐसी हो जो सीधे तौर पर भविष्य में काम आए। शिक्षा से सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि काम करने की क्षमता भी मिले।
शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यूजीसी ने एक पारदर्शी और समयबद्ध नियामक ढांचा तैयार किया है, जिससे विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने में मदद मिलेगी। ऑस्ट्रेलिया, इटली, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रमुख संस्थानों के आवेदनों को एक महीने के भीतर मंजूरी दे दी गई है। सम्मेलन में कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा को दुनिया तक पहुंचाना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीक का शिक्षा के क्षेत्र में उपयोग करना शामिल है। इसके अलावा, विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए नियम, कौशल शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर से जोड़ना, और भारत नवाचार 2026 पहल पर भी यहां चर्चा की गई।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि दुनिया में चाहे जितनी अनिश्चितता हो, शिक्षा हमेशा देशों को जोड़ने का काम करती है। पढ़ाई, शोध और ज्ञान का आदान-प्रदान ही असली साझेदारी बनाता है।
उन्होंने सभी देशों के प्रतिनिधियों से कहा कि वे अपने छात्रों और संस्थानों को भारत से जोड़ें। शिक्षाविदों के मुताबिक इस आयोजन का संदेश यह रहा कि भारत अब वैश्विक शिक्षा मंच पर मजबूत दावेदार बनना चाहता है। भारत दुनिया से कह रहा है कि आइए, यहां पढ़िए, शोध कीजिए, नए विचार लाइए और मिलकर आगे बढ़िए।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0