एसआईआर ने बढ़ाई सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की टेंशन, जेलों में एनआरआई भी हो सकते हैं प्रभावित

Nov 19, 2025 - 04:44
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एसआईआर ने बढ़ाई सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की टेंशन, जेलों में एनआरआई भी हो सकते हैं प्रभावित

भोपाल
 मध्य प्रदेश समेत देश के 12 राज्यों में मतदाताओं का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यानि एसआईआर शुरू हो गया है. इसमें बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं की वोटर लिस्ट का मिलान कर रहे हैं. लेकिन मिलान साल 2003 की मतदाता सूची से किया जा रहा है. ऐसे में कई लोगों को अगले चुनाव में मताधिकार से वंचित रहना पड़ सकता है. इस समस्या को लेकर अब तक सरकार ने कोई दिशा-निर्देश भी जारी नहीं किया है.

ऐसे समझें एसआईआर की प्रक्रिया

एसआईआर का मतलब है मतदाता सूची का विशेष गहन निरीक्षण यानि मतदाता सूची को अपडेट कर वास्तविक मतदाताओं की पहचान करना. इसके लिए बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना पत्र वितरित कर रहे हैं. मतदाताओं द्वारा इस फार्म को भरकर बीएलओ को वापस लौटाना अनिवार्य है. अन्यथा मतदाता सूची से नाम काटा जा सकता है.

एसआईआर में यहां उलझ रहा पेंच

दरअसल प्रत्येक मतदाता को जो फार्म दिया गया है, उसमें जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, आधार नंबर, मोबाइल नंबर भरना है. इसके साथ ही पुरानी वोटर लिस्ट का एपीआईसी नंबर भी दर्ज करना होगा. फार्म के साथ एक पासपोर्ट साइज फोटो भी लगानी है. खास बात यह है कि वर्तमान वोटर लिस्ट को वर्ष 2003 की लिस्ट से मिलाया जा रहा है. लेकिन कई लोग ऐसे हैं, जो साल 2003 में किसी और स्थान पर थे, लेकिन अब कहीं और निवास कर रहे हैं, ऐसे में उन लोगों के लिए एसआईआर प्रक्रिया चुनौती बन सकती है.

सरकारी और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को टेंशन

कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी ने बताया कि सेंट्रल गवर्नमेंट और राज्य के लाखों ऐसे कर्मचारी हैं, जो साल 2003 में किसी और जिले में पदस्थ थे. उन्होंने उस समय कहीं और वोट डाला था. लेकिन आप ट्रांसफर के बाद किसी और जिले में पदस्थ हो गए हैं या फिर ऐसे सेवानिवृत्त कर्मचारी जो सेवाकाल में किसी और शहर में थे और रिटायरमेंट के बाद किसी और शहर में बस गए हैं. ऐसे लोगों को साल 2003 की मतदाता सूची से वोटर लिस्ट का मिलान कराना बड़ी कठिनाई प्रक्रिया होगी.

46 हजार कैदियों का सत्यापन अधर में

जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया में व्यक्ति की प्रत्यक्ष मौजूदगी जरूरी नहीं होती है. वह व्यक्ति कहीं भी रहे, लेकिन उसके परिजन या प्रतिनिधि साल 2003 की मतदाता सूची के साथ वर्तमान सूची का मिलान कर फार्म भरकर बीएलओ को दे सकते हैं. लेकिन मध्य प्रदेश की जेलों में बंद करीब 46 हजार कैदियों लिए यह काम काफी कठिन है. यही कठिनाई एनआरआई या प्रवासियों के साथ है. क्योंकि इन लोगों के परिजन या रिश्तेदार यदि दूसरे राज्यों में रहते हैं, तो उन्हें फार्म भरने और जमा करने में काफी संघर्ष करना पड़ सकता है.

ऑनलाइन फार्म भर सकते हैं एनआरआई

जो लोग लंबे समय से विदेश में रह रहे है, उनके परिजनों को गणना प्रपत्र में उनकी जानकारी देना होगी. 2003 की वोटर लिस्ट में अगर उनका या उनके माता-पिता का नाम है तो वह यह फार्म भर सकते है. यदि उन्होंने दूसरे देश की नागरिकता ले ली है तो वे वोटिंग लिस्ट से बाहर कर दिए जाएंगे. हालांकि यदि फिजिकल फार्म नहीं भर सकते, तो ऐसी परिस्थिति में एनआरआई ऑनलाइन फार्म भी भर सकते है.

अधिकारी भी नहीं दे रहे जबाव

इस मामले में जब गोविंदपुरा एसडीएम रवीश श्रीवास्तव से बात की गई, तो उन्होंने जानकारी नहीं होने की बात कही. वहीं डिप्टी डीईओ भी इसका जबाव नहीं दे सके. वहीं इस मामले में जेल डीजी वरुण कपूर का कहना है कि इलेक्शन कमीशन से अभी जेलों में बंद कैदियों के एसआईआर को लेकर कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है. इस संबंध वही जानकारी दे पाएंगे. 

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