गुजरात में पलटा गेम! IPS की नौकरी छोड़कर हारे चुनाव, पूर्व MLA को पंचायत चुनाव में मिली शिकस्त

Apr 28, 2026 - 15:44
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गुजरात में पलटा गेम! IPS की नौकरी छोड़कर हारे चुनाव, पूर्व MLA को पंचायत चुनाव में मिली शिकस्त

गांधीनगर 

गुजरात लोकल बॉडी चुनाव में बीजेपी ने विपक्ष का सफाया कर दिया है. नगर निगम से लेकर नगर पालिका और जिला पंचायत चुनाव में बीजेपी ने जबरदस्त जीत हासिल की है. आईपीएस की नौकरी छोड़कर सियासी पिच पर उतरे मनोज निनामा बीजेपी की सुनामी में भी जीत दर्ज नहीं कर सके. इतना ही नहीं आम आदमी पार्टी से विधायक रहे भूपत भयाली की भी सियासी नैया पार नहीं हो सकी। 

स्थानीय निकाय चुनाव से ठीक पहले मनोज निनामा ने वीआरएस लेकर बीजेपी का दामन थाम लिया था. निनामा गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी थे, लेकिन राजनीति में आने के लिए आईपीएस की नौकरी छोड़ दी. इसके बाद बीजेपी के टिकट पर अरावली के शामलाजी तालुका के ओध जिला पंचायत सीट से मैदान में उतरे थे। 

मनोज निनामा को बीजेपी ने आखिरी समय में प्रत्याशी बनाया था, जिसे लेकर सियासी माहौल काफी गर्म हो गया था. निनामा ने पूरे दमखम के साथ चुनाव लडे, उसके बाद भी जीत दर्ज नहीं कर सके. उन्हें उत्तर गुजरात के जिला पंचायत चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। 

पूर्व विधायक को चुनाव में मिली शिकस्त
गुजरात में आम आदमी पार्टी से पाला बदलकर बीजेपी में गए किसान नेता राजू करपड़ा को हार का सामना करना पड़ा है. वह सुरेंद्र नगर जिले की मूली-2 सीट से मैान में उतरे थे, लेकिन जीत न उन्हें भी जीत नहीं मिल सकी. इसी तरह से 2022 में आम आदमी पार्टी से भूपत भयाणी विधायक बने थे, लेकिन बाद में सियासी पाला बदलकर वो बीजेपी का दामन थाम लिया। 

भूपत भयाणी ने विधायकी और आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए थे.बीजेपी ने उन्हें जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ाया था, लेकिन भयाणी को आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा है। 

मनोज निनामा को लगा तगड़ा झटका
गुजरात कैडर के पूर्व IPS मनोज निनाम 42 सालों तक पुलिस में काम करने के बाद बीजेपी ने अरावली जिला पंचायत की शामलाजी तालुका की ओध जिला पंचायत सीट से चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन उन्हें तगड़ा झटका लगा है. मनोज निनामा 31 मई को रिटायर होने वाले थे, लेकिन वो अपने पैतृक जिले से चुनाव लड़ने के लिए वीआरएस ले लिया था. इसके बाद चुनाव मैदान में उतरे थे, लेकिन जीत नहीं सके। 

मनोज निनामा राजनीति में अपनी एंट्री की वजह खुद पर पूर्व IPS अधिकारी और अपने करीबी दोस्त पीसी बरंडा का प्रभाव रहा. पीसी बरंडा गुजरात में जनजातीय विकास, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री हैं, वह अरावली जिले की भीलोदा विधानसभा सीट से विधायक भी हैं, जिससे प्रभावित होकर सियासी पिच पर उतरे. इसके बाद बीजेपी के सेजल गोहेल ने कांग्रेस में शामिल हो गए. गोहेल ने ही निनामा को मात दिया है। 

आईपीएस एसोसिएशन ने आप विधायक की टिप्पणियों के खिलाफ चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपा

भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) एसोसिएशन की गुजरात इकाई ने सोमवार को राज्य चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपकर आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल इटालिया के खिलाफ हाल ही में सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के लिए कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन ने इन टिप्पणियों को पुलिस बल और चुनाव अधिकारियों के प्रति ‘अपमानजनक, निंदनीय और मानहानिकारक’ बताया है।

यह ज्ञापन इटालिया द्वारा 26 अप्रैल को किए गए फेसबुक लाइव वीडियो के बाद प्रस्तुत किया गया है, जो बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ।

ज्ञापन में एसोसिएशन ने कहा कि विधायक ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के संदर्भ में ‘अत्यंत भड़काऊ भाषा’ का प्रयोग किया।

एसोसिएशन ने इन टिप्पणियों को बल के सदस्यों का ‘व्यक्तिगत अपमान’ और चल रहे चुनाव काल में पुलिस और चुनाव तंत्र दोनों के प्रति ‘जनता के अविश्वास को भड़काने का सुनियोजित प्रयास’ बताया।

अध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह मलिक, अहमदाबाद पुलिस आयुक्त और सचिव निपुणा एम तोरावणे द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में कहा गया है कि सार्वजनिक संस्थानों की आलोचना लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली का एक वैध पहलू है, लेकिन ‘चरित्र हनन अस्वीकार्य है’।

इसमें यह भी कहा गया है कि पुलिसकर्मी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हैं और उन्हें कानून व्यवस्था बनाए रखने और सभी नागरिकों को निष्पक्ष रूप से सुरक्षा प्रदान करने का दायित्व सौंपा गया है, विशेष रूप से चुनावों के दौरान।

प्रसारण के विवरण से पता चलता है कि इटालिया ने पुलिस और चुनाव अधिकारियों के कुछ विभागों के कामकाज और निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए, और राजनीतिक गतिविधियों और प्रवर्तन कार्रवाइयों के संचालन में पक्षपात का आरोप लगाया।

एसोसिएशन ने कहा कि ऐसे बयानों से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार संस्थानों में जनता का विश्वास कम होने का खतरा है।

इन टिप्पणियों को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए एसोसिएशन ने चुनाव आयोग से विधायक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया और कहा कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने और चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों का मनोबल बनाए रखने के लिए ऐसे कदम आवश्यक हैं।

ज्ञापन की प्रतियां गृह विभाग के प्रधान सचिव और गुजरात के पुलिस महानिदेशक एवं महानिरीक्षक को भी भेजी गई हैं।

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