गुजरात में समान नागरिक संहिता, लिव-इन वाले रहें अलर्ट; शादी में धोखाधड़ी पर 7 साल की सजा

Mar 25, 2026 - 11:44
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गुजरात में समान नागरिक संहिता, लिव-इन वाले रहें अलर्ट; शादी में धोखाधड़ी पर 7 साल की सजा

अहमदाबाद 

गुजरात विधानसभा ने  'गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक 2026' पारित कर दिया। इसमें शादी-विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों के बारे में एक समान कानूनी ढांचा प्रस्तावित किया गया है। इसी के साथ गुजरात यूसीसी लागू करने वाला दूसरा राज्य बन गया है।

गुजरात विधानसभा की 182 सीटों में से 161 सीटों पर भारी बहुमत होने के कारण बीजेपी के कई सदस्यों द्वारा प्रस्तावित कानून पर अपने विचार रखने के बाद यह विधेयक बहुमत से पारित कर दिया गया। उत्तराखंड के बाद गुजरात दूसरा ऐसा भारतीय राज्य बन गया है, जिसने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए विधेयक पारित किया है। हालांकि, इस विधेयक के कोई भी प्रावधान अनुसूचित जनजातियों के लोगों पर लागू नहीं होंगे।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह कानून संविधान के मूल सिद्धांतों और न्याय के विचार पर आधारित है. उनके अनुसार इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े मामलों में एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करना है, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों और दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों के कानूनों का अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है।

विधानसभा में तकरीबन 8 घंटे से अधिक समय तक चली बहस के बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित किया गया. गुजरात में सत्तारूढ़ भाजपा ने इसे सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इसका विरोध करते हुए इसे विधानसभा की सेलेक्ट कमेटी को भेजने की मांग की. विपक्ष का आरोप था कि सरकार ने इसे जल्दबाजी में पेश किया है और यह कुछ समुदायों के अधिकारों पर असर डाल सकता है. ‘गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड-2026’ नामक यह कानून पूरे राज्य में लागू होगा और गुजरात के उन निवासियों पर भी लागू होगा जो राज्य के बाहर रहते हैं. हालांकि, अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और संविधान द्वारा संरक्षित कुछ पारंपरिक समूहों (Traditional Groups) को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।


फर्जी तरीके से विवाह करने पर जेल

विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में विवाह का अनिवार्य पंजीकरण, लिव-इन रिलेशंस का रजिस्‍ट्रेशन, तलाक के लिए समान नियम और बेटियों व बेटों को उत्तराधिकार में समान अधिकार शामिल हैं. कानून के अनुसार, विवाह का रजिस्‍ट्रेशन 60 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा. ऐसा न करने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं, जबरन, धोखाधड़ी या दबाव में कराए गए विवाह के मामलों में 7 साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है. बहुविवाह या एक से अधिक विवाह करने पर भी समान सजा का प्रावधान किया गया है. तलाक के मामलों में भी नया प्रावधान किया गया है. इसके अनुसार अदालत की मंजूरी के बाद ही तलाक को वैध माना जाएगा और बिना ज्‍यूडिशियल प्रोसेस के किया गया तलाक अमान्य होगा. ऐसे मामलों में तीन साल तक की सजा का प्रावधान है. इसके साथ ही महिलाओं को बिना शर्त दोबारा विवाह करने का अधिकार भी सुनिश्चित किया गया है।


गुजरात UCC: 10 प्‍वाइंट में जानें सबकुछ

    गुजरात विधानसभा में पारित: गुजरात विधानसभा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल को बहुमत से पारित कर दिया, जिससे राज्य इसे लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया (पहला उत्तराखंड).

    समान कानून का उद्देश्य: बिल का मकसद सभी धर्मों और समुदायों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों पर एक समान कानूनी ढांचा लागू करना है।

    सीएम भूपेंद्र पटेल का बयान: मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इसे समानता और न्याय पर आधारित कानून बताया, जो सभी नागरिकों पर बिना भेदभाव लागू होगा।

    शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: विवाह के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा, नहीं करने पर 10,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।

    जबरन या धोखाधड़ी से शादी पर सजा: जबरन, धोखे या दबाव में की गई शादी पर अधिकतम 7 साल की सजा का प्रावधान रखा गया है. साथ ही बहुविवाह/पॉलिगैमी पर भी प्रतिबंध लगाया है।

    तलाक के नियम सख्त: तलाक केवल अदालत की मंजूरी और रजिस्ट्रेशन के बाद ही मान्य होगा, अन्यथा 3 साल तक की सजा हो सकती है. महिलाओं को दोबारा शादी का अधिकार सुनिश्चित किया गया है।

    लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन: लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य होगा; उल्लंघन पर 3 महीने तक की जेल या 10,000 रुपये तक जुर्माना लग सकता है।

    महिलाओं और बच्चों के अधिकार: बिल में महिलाओं के भरण-पोषण, बच्चों की पहचान, विरासत और सुरक्षा को कानूनी रूप से मजबूत करने का प्रावधान है।

    राजनीतिक प्रतिक्रिया: बीजेपी ने इसे ऐतिहासिक और समानता की दिशा में बड़ा कदम बताया, जबकि कांग्रेस और AAP ने इसका विरोध करते हुए इसे चयन समिति को भेजने की मांग की और इसे संविधान विरोधी बताया।

    संवैधानिक आधार: बिल को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत लाया गया है, जो राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश देता है।

लिव-इन में रहने वालों हो जाएं सावधान

विधेयक में लिव-इन संबंधों के पंजीकरण को भी अनिवार्य बनाया गया है. यदि कोई जोड़ा इसका पंजीकरण नहीं कराता है तो तीन महीने तक की कैद या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. यदि लिव-इन में रहने वाले व्यक्तियों की उम्र 18 से 21 वर्ष के बीच है, तो उनके माता-पिता को इसकी सूचना दी जाएगी. नाबालिगों से जुड़े मामलों में पॉक्सो कानून लागू होगा, जबकि विवाहित व्यक्ति द्वारा लिव-इन संबंध बनाने पर कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है. मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा करना है. उनके अनुसार विवाह और संबंधों का पंजीकरण कानूनी मान्यता सुनिश्चित करेगा, महिलाओं को परित्याग से बचाएगा और बच्चों को पहचान, भरण-पोषण और उत्तराधिकार से जुड़े अधिकारों की बेहतर सुरक्षा देगा. विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री ने X पर इसे गुजरात और देश के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया. उन्होंने कहा कि इस कानून से सभी धर्मों और समुदायों के लोगों के लिए समान कानूनी ढांचा लागू होगा और महिलाओं के अधिकारों को और मजबूती मिलेगी. बता दें कि इस विधेयक को तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था।
विपक्ष क्‍यों हमलावर?

उधर, विपक्ष ने इस कानून पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह विधेयक कुछ समुदायों की धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप कर सकता है और इसे जल्दबाजी में लाया गया है. कुछ नेताओं ने इसे अदालत में चुनौती देने की भी बात कही है. गौरतलब है कि भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों में शामिल अनुच्छेद 44 राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश देता है. इसी संदर्भ में गुजरात सरकार ने इस कानून को लागू करने की दिशा में कदम उठाया है. सरकार का दावा है कि इससे सामाजिक समानता और न्याय को बढ़ावा मिलेगा, जबकि विपक्ष का कहना है कि इस पर व्यापक चर्चा और सहमति की जरूरत थी. कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने इसे मुस्लिम विरोधी बताया है।

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