राजस्थान में उद्योगों को बढ़ावा, रीको योजना के 12वें चरण में 5000 भूखंड उपलब्ध
जयपुर
राज्य सरकार उद्यमिता को बढ़ावा देने, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने और राजस्थान को एक अग्रणी औद्योगिक राज्य के रूप में स्थापित करने के लिये पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। सरकार के इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए रीको द्वारा संचालित प्रत्यक्ष आवंटन योजना को सरल, पारदर्शी एवं त्वरित बनाया गया है। योजना का बारहवां चरण 15 जुलाई, 2026 से प्रारंभ होगा।
राइजिंग राजस्थान इनवेस्टमेंट समिट के अंतर्गत राज्य सरकार के साथ एमओयू निष्पादित करने वाले उद्यमियों को योजना का लाभ प्रदान किया जा रहा है। जिन निवेशकों ने अभी तक एमओयू नहीं किया है, वे भी आवेदन एवं ईएमडी जमा कराने की अंतिम तिथि तक एमओयू कर प्रत्यक्ष आवंटन योजना के 12वें चरण में भाग ले सकते हैं।
बारहवें चरण में रीको द्वारा प्रदेश के 100 से अधिक औद्योगिक क्षेत्रों में 5,000 से अधिक औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक भूखण्ड निवेशकों के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस चरण में नवीन औद्योगिक क्षेत्र आईजीपी बोरानाडा विस्तार में 14 औद्योगिक भूखण्ड भी आवंटन हेतु जोड़े गये हैं।
इस चरण की ई-लॉटरी का आयोजन 31 जुलाई 2026 को होगा। जिन भूखण्डों के लिए केवल एक आवेदन प्राप्त होगा, उनका सीधे आवंटन होगा, जबकि एक से अधिक आवेदन प्राप्त होने की स्थिति में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए ई-लॉटरी प्रणाली के माध्यम से भूखण्डों का आवंटन किया जाएगा। निवेशकों की बढ़ती रुचि को दृष्टिगत रखते हुए प्रत्यक्ष आवंटन योजना की वैधता अवधि 31 दिसंबर, 2026 तक की गई है।
रीको प्रबंध निदेशक श्री सुरेश कुमार ओला ने बताया कि उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की मंशा है कि प्रदेश में ऐसा औद्योगिक वातावरण विकसित किया जाए, जहां आधुनिक आधारभूत अवसंरचना, निवेश-अनुकूल नीतियों तथा पारदर्शी प्रक्रियाओं के बल पर उद्योग सहजता से स्थापित एवं विकसित हो सकें। इसी ध्येय के अनुरूप रीको निरंतर सक्रियता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रत्यक्ष आवंटन योजना के अब तक 11 चरण सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं। इन चरणों में 1,844 औद्योगिक भूखण्डों का आवंटन किया जा चुका है, जिनके माध्यम से प्रदेश में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश तथा 37,000 से अधिक युवाओं के लिए रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इसके अतिरिक्त 466 भूखण्डों का आवंटन वर्तमान में प्रक्रियाधीन है, जिनसे 2,100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की संभावना है।
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