पंचकूला आम मेले में दिखा आम का जलवा, 200 से ज्यादा किस्मों ने लुभाया लोगों को

Jul 11, 2026 - 14:14
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पंचकूला आम मेले में दिखा आम का जलवा, 200 से ज्यादा किस्मों ने लुभाया लोगों को

पंचकूला
 शुक्रवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पिंजौर स्थित यादविंद्रा गार्डन में 33वें आम मेला का उद्घाटन किया. इस बार मेले में हरियाणा समेत पांच राज्यों, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के किसान/आम उत्पादक शामिल हुए हैं. ये सभी आम उत्पादक अपने-अपने आम की छोटी-बड़ी 200 से अधिक किस्में लेकर पहुंचे हैं. पहले दिन हरियाणवी गायक और सांसकृतिक नृत्यों ने भी मेले में पहुंचे लोगों का खूब मनोरंजन किया.

आम के नाम खास, स्वाद भी लाजवाब:
मेले में लगे अलग-अलग स्टॉलों पर आम की ढेरों किस्में सजाई गई. खरीदारी के लिए भी दुकानें लगाई गई हैं. बच्चों से लेकर हर कोई आमों के नाम सुनकर खुश होता दिखा. हर कोई स्टॉल पर स्वाद चखने के बाद उनकी खरीदारी भी करते नजर आए. खरीदारों को उनकी मांग के अनुसार आम बेचे जा रहे थे. हर कोई आमों के नाम सुनकर खुश होता दिखा. दरअसल, मेले में आम की जितनी किस्में सजी हैं, उनके नाम भी उतने ही गुदगुदाने वाले हैं. आमों के नाम नेताओं-अभिनेताओं और कलाकारों के नाम पर भी देखे गए. यहां तक की मेले में करीब आठ किलोग्राम के एक बड़े एवं भारी आम का नाम मोदी रखा गया है. आम के उत्पादक शादाब ने बताया कि इस आम का नाम लोगों द्वारा ही रखा गया है. उन्होंने बताया कि अब वो इस आम के मोदी नाम को रजिस्टर्ड कराने के प्रयास में भी हैं.

झूले, सांस्कृतिक नृत्य व अन्य गतिविधियां
हर साल की तरह मेले में इस बार भी विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है. प्रवेश द्वारा के समीप बच्चों के लिए झूले, लोगों की सुविधाओं के लिए टिकट काउंटर भी बाहर खुले में है. वहीं तीनों दिन गार्डन के अंदर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कराया जाएगा. बच्चों और युवाओं के लिए अनेक रचनात्मक एवं मनोरंजक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाना है. इनमें रंगोली, फेस पेंटिंग, पोस्टर मेकिंग, ड्राइंग, ग्रुप डांस, ग्रुप सिंगिंग, हैंडराइटिंग, बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट, मेहंदी प्रतियोगिता, मैंगो क्विज़ और रोमांचक मैंगो ईटिंग प्रतियोगिता शामिल हैं.

गायक अमित सैनी रोहतकिया ने बांधा समां
मेले में रोजाना शाम को प्रसिद्ध कलाकार शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे. शुक्रवार को हरियाणवी गायक अमित सैनी रोहतकिया ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी प्रस्तुति दी और समां बांधे रखा. वहीं शनिवार, 11 जुलाई को पंजाबी गायक शमिंदर शम्मी और अंतिम दिन, 12 जुलाई को हरियाणवी गायक नवीन पुनिया अपनी प्रस्तुतियों से समा बांधेंगे. संगीत के साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां और मनोरंजन संबंधी गतिविधियां मेले को उत्सवमय बना रही हैं. वहीं, मेले में लगे फूड कोर्ट में आगंतुकों को आम से बने विशेष व्यंजनों के साथ विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं.

आम वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मेले के उद्घाटन के दौरान कहा कि 2047 का विकसित भारत खेतों से ही आकार लेगा. इसलिए अब समय आ गया है कि हरियाणा केवल उत्पादक नहीं, बल्कि वैल्यू क्रिएटर और निर्यातक बने. उन्होंने कहा कि जब हरियाणा के आम लंदन, न्यूयॉर्क, दुबई और टोक्यो के सुपरमार्केट तक पहुंचेंगे, तभी किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि होगी और भारत की पहचान वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयां छुएगी. इससे पूर्व उन्होंने विभिन्न राज्यों से आए प्रगतिशील किसानों द्वारा लगाए स्टॉलों का अवलोकन किया.

देश में फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन का नेटवर्क
मुख्यमंत्री ने हरियाणा और अन्य राज्यों से आए प्रगतिशील किसानों, बागवानों, उद्यमियों और पर्यटकों का स्वागत करते हुए कहा कि मैंगों मेले में 200 से अधिक आम की किस्में प्रदर्शित की गई हैं, जो किसानों के अनुभव, नवाचार और परिश्रम का परिणाम हैं. उन्होंने हरियाणा पर्यटन निगम और बागवानी विभाग को इस भव्य आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि ये मेला किसान की मेहनत का सम्मान है और हरियाणा की कृषि शक्ति का उत्सव है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बन रहा है. सबसे बड़ी ताकत गांव, किसान और कृषि हैं. कहा कि किसान की मेहनत का पूरा मूल्य तभी मिलेगा, जब वह बाजार की ताकत भी बने. इसी सोच से देशभर में फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन का नेटवर्क बन रहा है, छोटे किसानों के जुड़ने से लागत घटती है और आय बढ़ती है.

एआई की मदद से कृषि
 मुख्यमंत्री ने कहा कि "आज का भारत परंपरा पर गर्व करते हुए आत्मविश्वास से आधुनिक तकनीक अपना रहा है. 2047 तक विकसित भारत बनाना है, तो खेती को भी भविष्य के अनुरूप ढालना होगा. दुनिया आज एआई की चर्चा कर रही है, जिसका सबसे बड़ा लाभ किसान को मिलेगा. मिट्टी में तत्व की कमी, सिंचाई का समय, लाभकारी फसल, रोग का संकेत, मंडी की मांग, ये पहले से पता चले तो समय बचेगा, लागत घटेगी और आमदनी बढ़ेगी. आज ड्रोन खेत सर्वेक्षण कर रहे हैं, एआई मिट्टी की सेहत जांच रहा है, मौसम की जानकारी मोबाइल तक पहुंच रही है. एआई आधारित डिजिटल अकाउंटिंग से किसान अपने मोबाइल पर ही खर्च-आमदनी का पूरा हिसाब रख सकता है, जो स्मार्ट खेती का भविष्य है. तकनीक रास्ता दिखा सकती है लेकिन खेती की आत्मा किसान का अनुभव ही है. नतीजतन परंपरा और तकनीक, दोनों साथ चलेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमिजोत छोटी होती जा रही है, इसलिए सरकार किसानों को बागवानी फसले लगाने के लिए प्रेरित कर रही है. नया आम बाग लगाने पर 42 हजार रुपये प्रति एकड़ सब्सिडी दी जाती है और आम की फसल को भावांतर भरपाई योजना में शामिल किया गया है."

प्राकृतिक खेती के लिए 30 करोड़
 मुख्यमंत्री ने कहा कि "सरकार के प्रोत्साहन से वर्ष 2022 में शुरू हुई प्राकृतिक खेती योजना धरती की सेहत बचाने, लागत घटाने और भविष्य सुरक्षित करने का संकल्प है. लगभग 2 लाख किसानों ने 3 लाख एकड़ भूमि पंजीकृत करवाई है, 24 हजार किसान 44 हजार एकड़ से अधिक पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं. वर्ष 2025-26 में 20 हजार 727 एकड़ में प्राकृतिक खेती हुई और चालू वर्ष में प्राकृतिक खेती के लिए 30 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है. प्राकृतिक खेती में देसी गाय का विशेष महत्व है. वर्ष 2025 से देसी गाय आधारित जीवामृत-घनजीवामृत के लिए सब्सिडी बढ़ाकर 30 हजार रुपये की गई है. प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले कच्चे माल के भंडारण और प्रसंस्करण के लिए चार ड्रम खरीदने हेतु प्रत्येक किसान को 3 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है. वर्ष 2026-27 के बजट में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए अपेडा प्रमाणित प्राकृतिक व जैविक किसानों को 5 वर्षों तक प्रति वर्ष प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया है."

आम रत्न और आम केसरी होंगे पुरस्कृत
पर्यटन मंत्री डॉक्टर अरविंद शर्मा ने बताया कि "इस मैंगो मेले के दौरान किसानों के लिए अनेक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया है. इसके तहत 'आम रत्न' और 'आम केसरी' पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे. वहीं, हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि मैंगो मेला ना केवल किसानों और आम उत्पादकों को आम की विभिन्न किस्मों के प्रदर्शन का अवसर प्रदान करता है, बल्कि उन्हें अपने उत्पादों की बिक्री के लिए एक उपयुक्त मंच उपलब्ध कराता है. विश्व में होने वाले कुल आम उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही होता है." उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे खेती में कीटनाशकों (पेस्टिसाइड्स) का कम से कम उपयोग करें और प्राकृतिक खेती अपनाकर स्वस्थ एवं टिकाऊ कृषि व्यवस्था को बढ़ावा दें.

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