'पत्नी की देखभाल करनी है वो गर्भवती है', आरोपी की दलील सुनकर हाई कोर्ट ने दी जमानत
चंडीगढ़.
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज एक आरोपी को उसके बच्चे के जन्म और प्रसवोत्तर अवधि के दौरान उसकी पत्नी की देखभाल करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए छह सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी है।
जस्टिस संजय वशिष्ठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की पत्नी पहले से ही गर्भवती थीं और अब 05 जनवरी 2026 को उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया है। निःसंदेह, इस समय याचिकाकर्ता की पत्नी को अपने सबसे अच्छे साथी यानी अपने पति के साथ की आवश्यकता होगी। याचिकाकर्ता की पत्नी और नवजात शिशु के स्वास्थ्य आदि की देखभाल के लिए उन्हें विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
पांच जनवरी को दिया था बच्चे का जन्म
याचिकाकर्ता ने एनडीपीएस अधिनियम की धारा 22 के तहत पंजाब में दर्ज एफआईआर के संबंध में दो महीने की अंतरिम जमानत के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। यह याचिका इस आधार पर दायर की गई थी कि याचिका दायर करते समय उनकी पत्नी गर्भावस्था के उन्नत चरण में थीं और बाद में उन्होंने 05 जनवरी को एक बच्चे को जन्म दिया था। पुलिस रिपोर्ट में जमानत देने का विरोध करते हुए बताया गया कि याचिकाकर्ता के पास से ट्रामडोल हाइड्रोक्लोराइड यूएसपी 100 मिलीग्राम की 1,12,000 गोलियां बरामद की गई हैं और वह कथित तौर पर एक बड़े मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह का हिस्सा था। राज्य ने आगे तर्क दिया कि याचिकाकर्ता की पत्नी अपने ससुराल वालों और माता-पिता की देखरेख में है और जमानत पर रिहा होने की स्थिति में याचिकाकर्ता के फरार होने की संभावना है।
'देखभाल और ध्यान की आवश्यता है'
दोनों पक्षों की बात सुनने और रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद, न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता की पत्नी द्वारा हाल ही में बच्चे को जन्म देने के तथ्य पर कोई विवाद नहीं था। यह देखते हुए कि ऐसी अवस्था में एक महिला को अपने पति के साथ और समर्थन की आवश्यकता होती है और मां और नवजात शिशु दोनों को ही अत्यधिक देखभाल और ध्यान की आवश्यकता होती है,
न्यायालय ने मामले की बारीकियों में जाए बिना यह माना कि याचिकाकर्ता मानवीय आधार पर सीमित अंतरिम राहत का हकदार है। याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत इस शर्त पर दी गई थी कि वह राष्ट्रीयकृत बैंक से 5 लाख रुपए की एफडीआर के रूप में बैंक गारंटी निचली अदालत में जमा करे।
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