आत्मनिर्भर महिला बनीं हिसार की पूनम, चूल्हा-चौका के साथ थामी ई-रिक्शा की स्टेयरिंग

Mar 9, 2026 - 13:44
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आत्मनिर्भर महिला बनीं हिसार की पूनम, चूल्हा-चौका के साथ थामी ई-रिक्शा की स्टेयरिंग

हिसार.

महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए हर चुनौती का सामना कर सकती हैं। जब घर की जिम्मेदारियां कंधों पर बढ़ती है तो महिलाएं चूल्हा-चौका संभालने के साथ-साथ रोजी-रोटी के लिए नए रास्ते भी तलाश लेती हैं। समाज की परंपराओं को पीछे छोड़ आजाद नगर निवासी पूनम भी पति और बच्चों का सहारा बनने के लिए ई-रिक्शा का स्टेयरिंग संभाल रही है। पूनम पिछले दो वर्षों से ई-रिक्शा चला रही है।

उसने बताया कि जब घर की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई तो उन्होंने पति के साथ मिलकर परिवार की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। शुरुआत में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई लोग ताना मारते थे कि यह महिलाओं का काम नहीं है।

सिटी बसें चलने से घटा है ई-रिक्शा का काम
पूनम ने बताया कि शहर में सिटी बस सेवा शुरू होने के बाद आटो और ई-रिक्शा चालकों के काम में काफी कमी आई है। कई सवारियां बसों में चली जाती हैं। जिससे रिक्शा चालकों की आमदनी प्रभावित हो रही है। कई बार सवारियों को लेकर चालकों के बीच विवाद भी हो जाता है। उनका कहना है कि दिनभर मेहनत करने के बाद भी कई बार पर्याप्त आमदनी नहीं हो पाती।

क्यों उठाना पड़ा यह कदम
पूनम ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। पति की आमदनी से बढ़ती महंगाई में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। दो बच्चों की जिम्मेदारी बढ़ने के कारण उसने भी कमाने का निर्णय लेना पड़ा। पढ़ी-लिखी नहीं होने के कारण कोई नौकरी नहीं मिली, इसलिए उन्होंने ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। यह भी बताया कि वह किराये के मकान में अपने परिवार के साथ रहती है, आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर घर का किराया देना भी मुश्किल हो गया था। इसलिए उसे पति की मदद के लिए यह कदम उठाना पड़ा।

कई बार आ जाती मारपीट की नौबत
पूनम ने बताया कि आज भी कई बार अन्य रिक्शा चालकों के साथ विवाद की स्थिति बन जाती है। कुछ मामलों में तो मारपीट तक की नौबत आ जाती है, लेकिन परिवार की जरूरतों को देखते हुए वह हर चुनौती का सामना कर रही है।

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