केंद्र ने राज्यों के ऋण में गैर-बजटीय उधारी भी शामिल करने का निर्णय लिया, झारखंड के लिए चुनौती बढ़ी

May 28, 2026 - 15:44
 0  7
केंद्र ने राज्यों के ऋण में गैर-बजटीय उधारी भी शामिल करने का निर्णय लिया, झारखंड के लिए चुनौती बढ़ी

रांची

 केंद्र सरकार ने राज्यों को दी जानेवाली ऋण राशि में अब गैर बजटीय उधारी को भी जोड़ने का निर्णय लिया है। इसकी सूचना राज्यों को दे भी दी गई है। इस प्रकार नई व्यवस्था में राज्यों के लिए ऋण लेना पहले से कठिन हो जाएगा।

झारखंड सरकार के लिए मुसीबत की बात यह है कि इसमें गैर बजटीय उधारी को भी शामिल करने की बात कही गई है। ऐसा हुआ तो राज्यों को एफआरबीएम (फिस्कल रेस्पांसिबिलिटि एंड बजट मैनेजमेंट ) एक्ट के तहत मिलनेवाली ऋण राशि पहले से कम हो जाएगी।

कोविड काल में राज्यों को एक जीएसडीपी के हिसाब से चार प्रतिशत तक ऋण लेने की छूट दी गई थी और इसके ऊपर एक प्रतिशत ऋण बिना किसी शर्त के लिया जा सकता था। अब राज्यों को कोविड के कारण मिलनेवाली सुविधाओं को समाप्त कर दिया गया है।

साथ ही गैर बजटीय उधारी को शामिल किए जाने से ऋण लेने की सीमा निर्धारित हो जाएगी। झारखंड सरकार पर कुल बकाया कर्ज की राशि 1.10 लाख करोड़ रुपये के ऊपर पहुंच चुकी है। देश के कई राज्यों पर इससे भी अधिक कर्ज है।

कर्ज लेने की इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2003 में एफआरबीएम एक्ट को पास कराया था। यह कानून राज्यों को एक निर्धारित सीमा में ऋण लेने को बाध्य करता है। अभी यह सीमा बजट के हिसाब से तीन प्रतिशत पर सीमित है।

इसे कोविड काल में दो प्रतिशत तक बढ़ाने की छूट केंद्र सरकार से मिली थी। इसमें एक प्रतिशत सशर्त छूट थी तो एक प्रतिशत पर कोई शर्त नहीं थोपा गया था। अब राज्यों को मिलनेवाली गैर बजटीय उधारी को भी सम्मिलित करने के केंद्र के निर्देश के आलोक में वित्त विभाग ने कैबिनेट से प्रस्ताव भी पारित करा लिया है।

ऐसे में राज्य सरकार के लिए उधारी की सीमा और भी नियंत्रित हो जाएगी। आम तौर पर राज्य सरकार को विभिन्न एजेंसियों से विकास योजनाओं के लिए ऋण की राशि मिलती रहती है। नई व्यवस्था में इसको भी राज्य के ऊपर कुल ऋण में जोड़कर देखा जाएगा।
झारखंड पर पहले से ही 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का है कर्ज

झारखंड सरकार पूर्व में ही विभिन्न एजेंसियों से 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज उठा चुकी है।अलग-अलग वर्षों में विकास कार्यों को पूरा करने के लिए उधारी ली गई है।

कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को पूरा करने के लिए अभी भी राज्य सरकार बाजार से भी कर्ज उठाती है। चालू वित्तीय वर्ष में भी राज्य सरकार विभिन्न माध्यमों से 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण लेने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई राज्यों की प्री-बजट बैठक के दौरान मैंने यह मामला उठाया था। एफआरबीएम की सीमा तीन प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत तक करने की मांग की थी। तीन प्रतिशत के दायरे में ही झारखंड को और भी ऋण मिल सकता है। निर्धारित अनुपात को देखें तो राज्य सरकार अभी आठ हजार करोड़ रुपये और ऋण ले सकती है। अच्छी बात यह है कि हमें इसकी आवश्यकता नहीं पड़ रही है। गैर बजटीय ऋण को जोड़कर हमारे अधिकारों को रोका नहीं जा सकता है।
-राधाकृष्ण किशोर, वित्त मंत्री, झारखंड।

 

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0