कोटा के सुल्तानपुर में दिखा कूनो का शावक KP-2 और मचा हड़कंप

Mar 28, 2026 - 11:44
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कोटा के सुल्तानपुर में दिखा कूनो का शावक KP-2 और मचा हड़कंप

राजस्थान

राजस्थान के हाड़ौती अंचल में इन दिनों एक अलग ही तरह का खौफ और रोमांच देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर चीतों के राजस्थान आने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला कोटा जिले के सुल्तानपुर इलाके का है, जहां मदनपुरा पंचायत के पीपल्दा सम्मेल गांव में मादा चीता आशा के ढाई साल के शावक KP-2 को देखकर हड़कंप मच गया है।
खेतों में दिखा चीता, गांव में सन्नाटा

बता दें कि शुक्रवार को जब ग्रामीण अपने खेतों की ओर जा रहे थे, तब उन्होंने KP-2 को झाड़ियों और खेतों के बीच से गुजरते देखा। चीते की मौजूदगी की खबर आग की तरह फैली और देखते ही देखते लोग डर के मारे अपने घरों में कैद हो गए। दरअसल, चीता रिहायशी इलाकों के बेहद करीब पहुंच गया था, जिसके बाद तुरंत स्थानीय पुलिस और वन विभाग को सूचित किया गया। फिलहाल, एहतियात के तौर पर पुलिस ने ग्रामीणों को खेतों की ओर न जाने की सलाह दी है।
दो भाइयों की जुगलबंदी: KP-2 और KP-3 का डेरा

ग्राउंड सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह सिर्फ एक चीते की कहानी नहीं है। आशा के दो शावक KP-2 और KP-3 पिछले तीन हफ्तों से राजस्थान की सीमा में घूम रहे हैं। KP-2 फिलहाल कोटा के सुल्तानपुर इलाके में अपनी लोकेशन बदल रहा है।
KP-3 पिछले 20 दिनों से बारां जिले की मंगरोल रेंज में जमा हुआ है। गौरतलब है कि कूनो नेशनल पार्क राजस्थान की सीमा से सटा हुआ है, इसलिए ये शावक नए इलाकों की तलाश में बार-बार इधर का रुख कर रहे हैं।
डरने की बात नहीं, यह कुदरती व्यवहार है

इस मामले पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के जानकारों का कहना है कि यह चीतों की स्वाभाविक फैलाव प्रक्रिया (Dispersal process) है। जब युवा चीते बड़े होते हैं, तो वे अपने लिए नए इलाके (Territory) की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं। वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों के अनुसार चीते स्वभाव से शर्मीले होते हैं और आमतौर पर इंसानों पर हमला नहीं करते। वे केवल छोटे शिकार की तलाश में रहते हैं। कूनो और राजस्थान की वन टीमें मिलकर इन पर 24 घंटे सैटेलाइट कॉलर के जरिए नजर रख रही हैं।

वन विभाग के अधिकारियों ने पीपल्दा सम्मेल और आसपास के गांवों के निवासियों से सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने साफ किया है कि घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि चीता केवल आराम करने के लिए पेड़ों के नीचे रुक रहा है। टीम लगातार चीते को वापस सुरक्षित वन क्षेत्र की ओर भेजने की कोशिश कर रही है।

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