किस्मत ने भारत पर मेहरबानी की! एलपीजी संकट से निपटने का फॉर्मूला मिलते ही बदल गया खेल

Apr 19, 2026 - 05:44
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किस्मत ने भारत पर मेहरबानी की! एलपीजी संकट से निपटने का फॉर्मूला मिलते ही बदल गया खेल

नई दिल्‍ली
 अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध ने भारत ही नहीं, दुनिया के तमाम देशों को गैस के संकट में धकेल दिया है. लेकिन, किस्‍मत भारत पर मेहरबान हुई और अचानक ग्‍लोबल मार्केट में प्राकृतिक गैस की कीमतें नीचे आ गईं. इसका फायदा उठाते हुए भारत ने ग्‍लोबल स्‍पॉट मार्केट से गैस की खरीदारी तेज कर दी है. इससे पश्चिम एशिया संकट के बाद बढ़ी गैस आयात की दिक्‍कतों से निपटने में मदद मिलेगी। 

गैस मार्केट से जुड़े ट्रेडर्स का कहना है कि देश की सरकारी कंपनियां भारत पेट्रोलियम कॉर्प, गेल इंडिया लिमिटेड और गुजरात स्‍टेट पेट्रोलियम कॉर्प ने अप्रैल से जून की डिलीवरी के लिए 16 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट यानी बीटीयू पर खरीदा है. ये सप्‍लाई 15 अप्रैल को बंद हुए ट्रेड में खरीदी गई है. ट्रेडर्स का कहना है कि यह एक बड़ा बदलाव है, क्‍योंकि इससे पहले कीमतें ज्‍यादा होने की वजह से भारतीय खरीदारों ने स्‍पॉट मार्केट से खरीदारी कम कर दी थी और कई ट्रेंडर रद्द कर दिए थे। 

क्‍यों आई है ऐसी नौबत
ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्‍य लगभग बंद हो गया है और कतर में हमले से दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी प्‍लांट भी बंद हो गया. इस कारण भारत सहित दुनिया को सप्‍लाई होने वाले 20 फीसदी गैस के हिस्‍से पर दिक्‍कतें आ गईं. यही वजह रही कि भारत को भी पिछले साल की समान अवधि की तुलना में एलएनजी डिलीवरी करीब 14 फीसदी कम रही और सप्‍लाई के मुकाबले आयात का औसत गड़बड़ हो गया। 

कीमत गिरी तो बढ़ गई खरीदारी
भारत ने गैस खरीद ऐसे समय में बढ़ाई है, जब ग्‍लोबल स्‍पॉट मार्केट में प्राकृतिक गैस की कीमतें गिरकर एक महीने से भी ज्‍यादा के निचले स्‍तर पर चली गई हैं. युद्ध शुरू होने के बाद एक समय ऐसा भी आया था जब नेचुरल गैस के दाम ग्‍लोबल मार्केट में दोगुने से भी ज्‍यादा हो गए थे. तब इसकी कीमत 25 डॉलर प्रति बीटीयू के आसपास थी. यही वजह रही कि भारतीय खरीदारों ने अपने ट्रेडिंग बंद कर दी थी. अब कीमतें 50 फीसदी तक नीचे आ गई हैं, जिससे खरीदारी एक बार फिर बढ़ने लगी है। 

गैस के लिए आयात पर निर्भर
भारत सरकार ने कुछ साल पहले एक अभियान शुरू किया था कि देश को गैस आधारित अर्थव्‍यवस्‍था बनाना है, ताकि प्रदूषण पर लगाम कसी जा सके. फिलहाल अपनी जरूरत का करीब 60 फीसदी गैस चाहे वह प्राकृतिक गैस या हो फिर एलपीजी आज आयात करनी पड़ती है. साल 2024 में भारत का प्राकृतिक गैस का आयात करीब 35 हजार क्‍यूबिक मीटर के आसपास पहुंच गया था. पिछले साल का आंकड़ा तो और भी अधिक था, लेकिन इस साल की शुरुआत से ही ईरान संकट की वजह से आयात में कमी दिख रही है. भारत सबसे ज्‍यादा गैस का आयात कतर, यूएई और अमेरिका जेसे देशों से करता है। 

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