MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे के भूमि अधिग्रहण पर लगाई रोक

Jul 4, 2026 - 04:44
 0  7
MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे के भूमि अधिग्रहण पर लगाई रोक

 उज्जैन

 मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर निर्मित होने वाला उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे विवादों से बाहर आने का नाम नहीं ले रहा है। पहले जावरा से लेकर उज्जैन तक किसानों ने इस सड़क का विरोध किया। मजबूरन सरकार ने इसे सामान्य हाईवे बनाने के साथ किसानों को चार गुना मुआवजा देने का ऐलान कर दिया। हालांकि किसानों को चार गुना मुआवजा मिला नहीं है। वहीं अब मप्र हाईकोर्ट (MP High Court) की इंदौर खंडपीठ ने उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण पर स्टे दे दिया है। न्यायालय ने गांव मंगरोला, सोडंग और झिरनिया उन्हेल के किसानों की याचिका पर सुनवाई कर विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इस स्टे पर आगामी सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

भूमि अधिग्रहण के नियमों का नहीं हो रहा पालन- याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता विशाल चौहान और आशुतोष जगताप ने तर्क दिया कि भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिनियम 2013 के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना की गई है। याचिका में बताया गया कि किसानों ने वैकल्पिक मार्ग, शासकीय भूमि के उपयोग और इंटरचेंज डिजाइन में बदलाव को लेकर आपत्तियां और सुझाव दिए थे। जिन पर प्रशासन द्वारा विधिसम्मत विचार नहीं किया गया। अधिवक्ताओं ने न्यायालय को यह भी अवगत कराया कि आपत्तियों की सुनवाई सक्षम प्राधिकारी के बजाय अन्य अधिकारी द्वारा की गई, जो सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।

प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि किसानों को अब तक मुआवजा राशि प्राप्त नहीं हुई है और इस मामले में कई महत्वपूर्ण वैधानिक प्रश्न विचारणीय हैं। तर्कों और तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने भूमि के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश पारित किया। अधिवक्ता विशाल चौहान ने बताया कि उच्च न्यायालय के इस फैसले से मंगरोला, सोडंग और झिरनिया के प्रभावित किसानों को एक बड़ी और महत्वपूर्ण अंतरिम राहत मिली है।

अन्य किसानों के लिए हो सकता है फायदा
तीन गांवों के किसानों द्वारा हाईकोर्ट में याचिका लगाने और स्टे मिलने के बाद अन्य किसानों के लिए भी हाईकोर्ट जाने का रास्ता खुल गया है। क्योंकि अब भी क्षेत्र के कई किसानों को भूमि अधिग्रहण का मुआवजा नहीं मिला है। वहीं सरकार ने चार गुना मुआवजे की घोषणा की थी, परंतु नागदा-खाचरौद विधानसभा के ही कई किसानों को दोगुना मुआवजा ही दिया गया है। यहीं नहीं किसानों द्वारा जमीन अधिग्रहण का विरोध करने पर प्रशासनिक और पुलिस अमला उन्हें डरा भी रहा है। जिसके कई वीडियों भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए है। ऐसे में वह किसान जिन्हें मुआवजा नहीं मिला है और जमीन अधिग्रहण हो रही है, वह भी हाईकोर्ट की शरण ले सकते है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0